योजना 136 में 28 करोड़ के ”गुलमोहर” के बुरे हाल

 

 

 

 

 

 

  • रहवासियों में रोष,2 वर्ष पुर्व ही हुआ था निर्माण
  • प्लास्टर उखडा,टाईल्सें टूटी,कई फ्लेटों में लिकेज,बिजली तार भी खुले हुए

शैलेन्द्र सिंह पंवार, इन्दौर। योजना क्रमांक 136 में विकास प्राधिकरण की हाईराईज बिल्डिंग के दो साल में ही बुरे हाल होने लगे है। बाथरूम लीकेज हो रहे है, टाईल्सें टूटी रही है, प्लास्टर उखड़ रहा है और बिजली के तारे खुले हुए है। इसको लेकर फ्लेट मालिकों में रोष है, ये इंजीनियरों का घेराव कर चुके है, वहीं सीईओ विवेक श्रोत्रिय तक भी अपनी बात रख आए है, अब देखना है इन सभी समस्याओं का हल कब तक होता है।

विकास प्राधिकरण ने योजना क्रमांक 136 में हाईराईज गुलमोहर काम्पलेक्स बनाया है। 2012 में इसका निर्माण शुरू हुआ और 2017 में यह निर्मित हो गया था। इस अवधि में फ्लेटों की बुकिंग भी शुरू कर दी गई थी, निम्न आय वर्ग के लोगों के रूचि लेने से 336 में से 183 फ्लेट बिक भी गए। 183 में से 160 परिवार 1 बीएचके के फ्लेटों में पिछले दो साल से रहने भी लगे है, लेकिन ये फ्लेट अब इनमे से कई परिवारों के लिए जी का जंजाल भी बन गए है। दरअसल फ्लेटों के साथ ही बिल्डिंग के भी बुरे हाल होने लगे है। कई स्थानों पर प्लास्टर उखडऩे लगा है, ड्रेनेज व पानी की लाईनें लीकेज होने लगी है। कई फ्लेटों के बाथरूम व किचनों की भी यही स्थिति है। फ्लेटों व काम्पलेक्स परिसर में टाईल्सें भी उखडऩे लगी है। बिजली के तार कई स्थानों पर खुले हुए है, इससे खतरें की आशंका भी बनी रहती है।

■ इंजीनियरों का किया घेराव
रहवासियों की माने तो यह स्थिति पिछले साल भर से है, इसकी प्राधिकरण के इंजीनियरों को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हो सका है। पिछले दिनों रहवासियों ने सहायक यंत्री राजेन्द्र शर्मा व उपयंत्रियों का काम्पलेक्स में ही घेराव कर दिया था, अगले दिन विधायक रमेश मेन्दोला के साथ इस संदर्भ में सीईओ विवेक श्रोत्रिय से भी मुलाकात की थी, इन्हे श्रोत्रिय ने जल्द ही सभी समस्याओं के निराकरण की बात कही है।

■ 38 हजार साल का मैंटेनेंस
प्राधिकरण फ्लेट मालिकों से 38 हजार रूपए साल का मैंटेनेंस भी वसूल रहा है। इस राशि से बिजली का बिल, स्वीपर, सुरक्षा गार्ड, कचरा संग्रहण शुल्क आदि की भरपाई की जाती है। रहवासियों के अनुसार इतनी राशि लेने पर बिल्डिंग व फ्लेटों में होने वाली टूट फूट का भी तत्काल मैंटेनेंस किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। प्राधिकरण को 183 फ्लेट मालिकों से मैंटेनेंस के 70 लाख सालभर में मिलते है।

■ ये तीन इंजीनियर जिम्मेदार
गुलमोहर काम्पलेक्स का निर्माण कार्यपालन यंत्री एमपी विमल, सहायक यंत्री राजेन्द्र शर्मा व उपयंत्री आलोक पांडेय की देख रेख में हुआ था, इस लिहाज से बिल्डिंग के बुरे हाल के लिए ठेकेदार के साथ ही ये तीनों इंजीनियर भी जिम्मेदार है। रहवासियों में भी इन तीनों ही इंजीनियरों को लेकर रोष है। निर्माण कार्य के दौरान भी इनकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में थी। हाईराईज बिल्डिंग की स्थिति बता रही है कि निर्माण कार्य में बडे पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

■ मैंटेनेंस नहीं किया ठेकेदार ने
ग्वालियर की एमडीपी इन्फ्रा प्रा. लिमि. कंपनी ने गुलमोहर हाईराईज बिल्डिंग का निर्माण किया था, निर्माण के बाद इसे तीन साल का मैंटेनेंस भी करना था, लेकिन इसके पहले ही कंपनी ने हाथ ऊंचे कर दिए, इससे स्पष्ट है कि इंजीनियरों के संरक्षण में भ्रष्टाचार किया गया था। चीफ इंजीनियर एसएस राठौर की माने तो मैंटेनेंस नहीं करने पर ठेकेदार की 3 करोड़ की राशि राजसात कर ली गई थी।

■ 70 फ्लेटों का मैंटेनेंस
बिल्डिंग की सालभर से हालत खराब होने पर 2019 में प्राधिकरण को इसके मैंटेनेंस के लिए 40 लाख का टेंडर निकालना पड़ा। कार्यपालन यंत्री अनिल चुघ की देखरेख में अभी तक 70 फ्लेटों का मैंटेनेंस किया जा चुका है। जिसमे किचन, टायलेट, टाईल्स व प्लास्टर के काम किए गए है। प्राथमिकता के आधार पर किस फ्लेट का पहले मैंटेनेंस हो, इसके लिए इंजीनियर व रहवासियों की चार लोगों की समिति भी बनाई जा रही है।

■ क्या कहते है जिम्मेदार
बाथरूमों के निर्माण में कुछ चूक जरूर हुई है, लेकिन फ्लेट मालिक जानबूझकर माहौल बना रहे है। सितम्बर में मैंटेनेंस की 2 वर्ष की अवधि समाप्त हो रही है, 50 प्रतिशत से अधिक परिवारों के रहने पर रहवासी संघ का गठन करना होता है, इसको लेकर प्राधिकरण तीन बार पत्र भी लिख चुका है। सभी रहवासी चाहते है इसके पुर्व उनके फ्लेट का मैंटेनेंस हो जाए, इसलिए माहौल बनाया जा रहा है।।

@ राजेन्द्र शर्मा, सहायक यंत्री इंविप्रा
∆ इस प्रोजेक्ट के निर्माण से शुरू से ही जुडा हुआ था, लेकिन अब नहीं हूं, बिल्डिंग व फ्लेटों में क्या दिक्कतें है ये संबंधित कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री व बिजली इंजीनियर ही अच्छे से बता सकते है।।

@ एमपी विमल, कार्यपालन यंत्री इंविप्रा
◆ एक नजर में गुलमोहर प्रोजेक्ट
– कुल लागत 28 करोड़
– 1 बीएचके के 336 फ्लेट (एलआईजी)
– कुल क्षेत्रफल 11 हजार स्क्वेयर मीटर
– 336 में से 183 फ्लेट बिके,160 परिवार निवासरत
– निर्माण कंपनी, एमडीपी इन्फ्रा प्रा.लिमि.ग्वालियर

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