रमन का ज्यूडिशरी सिस्टम सुधारने मोदी को सुझाव, सुबह और शाम लगें काेर्ट

रायपुर.सीएम डॉ. रमन सिंह ने केन्द्र सरकार को न्यायिक अधोसंरचना विकास के लिए बनने वाली समिति में वित्त सचिव को शामिल करने और अधोसंरचना विकास के कार्यों की मॉनिटरिंग उच्च न्यायालय के तीन जजों से करवाने का सुझाव दिया है। सीएम ने पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में यह सुझाव दिया।
– डॉ. रमन सिंह ने कहा कि न्यायिक सेवा संवर्ग में पांच वर्ष तक हर साल दस प्रतिशत पदों की वृद्धि की जानी चाहिए ताकि विगत पांच वर्ष या उससे ज्यादा समय से लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण हो सके।
– सभी अदालतों में रिक्त पदों की पूर्ति भी जल्द होनी चाहिए। डॉ. रमन सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि बहुत ही छोटे अथवा सामान्य प्रकरणों के निराकरण के लिए सेवानिवृत्त जिला जजों की सेवाएं ली जा सकती हैं।
– सुबह तथा शाम को अदालतें लगायी जा सकती हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिला स्तर पर कार्यरत विधिक सेवा प्राधिकरणों में पूर्णकालिक सचिवों की नियुक्ति होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण सुझाव
-किशोरों के लिए न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने हर दो माह में समीक्षा करें।
-14वें वित्त आयोग में राज्यों द्वारा उच्च न्यायालयों को भी वित्तीय सहायता दी जाए।
-राज्य द्वारा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को भी विकास कार्यों के लिए राशि दी जाए।
-सेवानिवृत्त जजों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभ दिए जाए।
-पुराने लंबित आपराधिक मामलों के निराकरण के लिए रिटायर जजों की नियुक्ति की जाए।
-अदालतों का कम्प्यूटरीकरण करने सेवा प्रदातों की सेवा प्राप्त करने समिति का गठन किया जाए।
-राज्यों में अलग से मॉडल वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करें।
-जेलों के रिक्त पदों की भी जल्द पूर्ति की जाए।
ग्रामीण न्यायालय का संकल्प पूरा हो : अकबर
– कांग्रेस के छत्तीसगढ़ मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने कोर्ट में लंबित मामलों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से ग्रामीण न्यायालय स्थापित करने की मांग की।
– उन्होंने कहा कि आज छोटे-छोटे मामलों में लोगों को सालों तक तारीख दर तारीख भटकना पड़ता है। भाजपा ने 2003 के घोषणा पत्र में ग्रामीण न्यायालय स्थापित करने की घोषणा की थी।
– भाजपा सरकार 13 साल पुराने अपने संकल्प को आज तक पूरा नहीं कर पाई। एेसे में न्याय व्यवस्था में सुधार और लंबित मामलों के निपटारे के लिए सरकार कुछ करेगी, ऐसा सोचना गलत है।