राजनीति गंदी नहीं, नैतिक मूल्यों के पतन के कारण वह हो रही है गंदी : दलाई लामा

Tatpar 30/11/2013

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार को पूरी दुनिया के लिए ‘नया कैंसर’ करार देते हुए तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने आज कहा कि राजनीति गंदी नहीं है, बल्कि राजनीति में नैतिक मूल्यों के पतन के कारण वह गंदी हो रही है और सभी पेशों में यह स्थिति है।

दलाई लामा ने कहा, ‘‘ भ्रष्टाचार न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के समक्ष नये कैंसर के रूप में उभर कर सामने आया है। यह हमारे भीतर और हमारी शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों एवं सिद्धांतों की कमी और जागरूक ज्ञान के अभाव के कारण है। ’’

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के एक समारोह में उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीति को गंदा मानते हैं लेकिन राजनीति गंदी नहीं है। राजनीति में नैतिक मूल्यों के पतन के कारण यह गंदी हो रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह स्थिति सभी पेशों में है। अगर नैतिक मूल्य का पतन हो जाए तब किसी पेश में गिरावट आती है।’’

तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू ने कहा, ‘‘ समाज और व्यक्ति के उत्थान के लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों और मानवतावादी दृष्टीकोण को समाहित किए जाने की जरूरत है। ’’

उन्होंने कहा कि शिक्षा का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और आज हम अपने जीवन में भौतिक सुखों के

बारे में ज्याद ध्यान दे रहे है । चारों ओर अर्थव्यवस्था और पैसे की बात हो रही है। 

दलाई लामा ने कहा कि भारत और दुनिया में करोड़ों की संख्या में गरीब हैं, ऐसे में इनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए गंभीर पहल किए जाने की जरूरत है।

दलाई लामा ने कहा कि हजारों वर्षो से भारत दुनिया के लिए ज्ञान और आध्यात्म के क्षेत्र में मागदर्शक रहा है। आज के युवाओं को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि युवा 21वीं सदी के आधार स्तम्भ है जिनपर देश और समाज का भविष्य निर्भर है। ऐसे में युवाओं को हजारों वर्ष पुरानी भारत की इस ताकत को आत्मसात करने की जरूरत है।

तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू ने कहा कि स्कूलों में ऐसी उपयुक्त नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए जो सभी धर्मो को मानने वाले और किसी भी धर्म को नहीं मानने वालों सभी का सम्मान करती हो।

उन्होंने कहा कि विश्व शांति असमान से नहीं आती बल्कि इसका भाव व्यक्ति के भीतर से निकलता है । भारत, दुनिया का गुरू रहा है और हमारी परंपरा (बौद्ध) नालंदा से निकली है।

उन्होंने कहा कि भारत को एक बार फिर से दुनिया का मागदर्शन करने के लिए आत्मविश्वास पैदा करने की जरूरत है और इसमें युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।