राज्यसभा उपसभापति की दौड़ में हरिवंश और हरिप्रसाद

कर्नाटक और विपक्ष की विपक्षी एकता का साया राज्यसभा उपसभापति के चुनाव में पड़ना तय माना जा रहा है। इस पद के लिए विपक्ष की ओर से कांग्रेस के बी.के हरिप्रसाद और एनडीए की ओर से जेडीयू के हरिवंश पर दांव लगाया गया है।

उच्च सदन के संचालन में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए भाजपा की पूरी ताकत इस पद पर अपने उम्मीदवार को जिताने में लग गई है तो विपक्ष भी आगामी चुनावों के मद्देनजर इन चुनावों को महागठबंधन की एकजुटता की परीक्षा मानकर चल रहा है।

जानिए, कौन हैं राजनीति के ये दो दिग्गज- 

हरिवंश

हरिवंश बिहार के प्रतिष्ठित अखबार प्रभात खबर के पूर्व संपादक और जेडीयू के महासचिव हैं। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरिवंश का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को हुआ था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई करने वाले हरिवंश ने अपने कैरियर की शुरुआत टाइम्स समूह से की थी।

इसके बाद हरिवंश ने रविवार और धर्मयुग जैसी कई प्रसिद्ध पत्रिकाओं में काम किया। फिर 90 के दशक में बिहार के बड़े मीडिया समूह से जुड़े और दो दशक तक अपनी सेवाएं दी। दिल्ली से लेकर पटना तक मीडिया में नीतीश कुमार की बेहतर छवि बनाने में हरिवंश का खासा योगदान है। हरिवंश राजपूत जाति से आते हैं। एनडीए हरिवंश के सहारे बिहार में राजपूत वोट बैंक को अपना ओर खींचने की कोशिश में है।

बी के हरिप्रसाद

बी.के हरिप्रसाद का जन्म 29 जुलाई 1954 को कर्नाटक में हुआ था। 1991 में शादी के बंधन में बंधे प्रसाद की एक बेटी है। बंगलूरू से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1972 में वो कांग्रेस के सदस्य बने। 2006 में वो कांग्रेस के महासचिव बने और अब तक इस पद पर बरकरार हैं।

साल 1990 में वो पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। मौजूदा समय में भी कर्नाटर से राज्यसभा के सदस्य हैं। वो कांग्रेस की कई अन्य समितियों और सेवा दल के प्रमुख पदों पर रहे हैं। कांग्रेस की सरकार के दौरान भी कई समितियों के प्रमुख पदों पर रहे हैं।

उपसभापति पद के लिए नौ अगस्त को सुबह 11 बजे चुनाव होगा। पूर्व उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल जून में खत्म होने के बाद से राज्यसभा में उपसभापति का पद खाली है। पी जे कुरियन केरल से कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुनकर आए थे।

नंबर पर टिका है सारा खेल

इस चुनाव में एनडीए और यूपीए के पास नंबर जुटा पाना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि दोनों ही पक्षों के पास जीत के लिए जरुरी आंकड़े नहीं है। चुनाव के जरिए विपक्ष की एकजुटता भी दिखेगी जिसके चलते नंबर जुटाने के लिए जोड़तोड़ का खेल भी शुरू हो गया है।

राज्यसभा में वर्तमान में 244 सांसद ही वोट करने की स्थिति में हैं। ऐसे में किसी भी दल को जीतने के लिए 123 सीटें मिलनी जरूरी हो जाती हैं। राज्यसभा में एनडीए के पास 115 सीटें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा भाजपा के पास 73 सीटें हैं। वहीं, यूपीए के पास 113 सीटें हैं जिनमें कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 50 सीटें हैं। वहीं अन्य दलों के पास राज्यसभा में 16 सीटें हासिल हैं, इनमें सबसे ज्यादा नौ सीटें बीजेडी के पास हैं।