राज्यसभा चुनाव : एक और निर्दलीय ने छोड़ा ‘कमल’ का साथ, भाजपा की जीत तय

जयपुर। प्रदेश में चार राज्यसभा सीटों के लिए शनिवार सुबह 9 बजे शुरू हुई वोटिंग अब पूरी हो गई है। वोट देने के लिए अधिकृत सभी 199 विधायकों ने वोट कास्ट कर दिया है। अंतिम वोटर के रूप में आई निर्दलीय अंजू देवी धानका ने भी भाजपा प्रत्याशी को वोट दे दिया। बोली, मैं निर्दलीय कमल मोरारका की प्रस्तावक बनी थी, लेकिन उन्होंने उसके बाद पूछा तक नहीं।

कैसे पलटी बाजी, शाम को ही परिणाम..
– कांग्रेस और भाजपा के सभी विधायक अपने सभी वोट डाल चुके हैं। पहला वोट नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने डाला था। इसके बाद सभी विधायकों ने लाइन में लगकर वोट डाला।

– पूर्व सीएम अशोक गहलोत, डूडी, प्रतिपक्ष के सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा, वरिष्ठ विधायक प्रघ्म्न सिंह भी साथ थे।
– सीएम वसुंधरा राजे समेत तमाम भाजपा, राजपा और निर्दलीय विधायकों ने भी वोट डाल दिए हैं।
– भाजपा के विधायकों की पहली बस को लेकर पार्टी अध्यक्ष अशोक परनामी विधानसभा परिसर में पहुंचे तो दूसरी का नेतृत्व मंत्री यूनुस खान कर रहे थे।
– भाजपा के सभी नेताओं ने भी चारों सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की जीत पक्की बताई है।

ये हैं पांच प्रत्याशी 

– भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू समेत ओमप्रकाश माथुर, रामकुमार वर्मा और हर्षवर्द्धन सिंह डूंगरपुर को प्रत्याशी बनाया गया है।
– जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उद्योगपति कमल मोरारका मैदान में हैं।
– मोरारका को कांग्रेस ने समर्थन की घोषणा की थी, उसके आधार पर उन्हें वोट दिया है। इसके अलावा तीन निर्दलीय समेत बसपा ने भी मोरारका को समर्थन किया है।

– अब जो भ्री स्थिति सामने आ रही है उससे राजस्थान की चारों सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्वित मानी जा रही है।
– उधर, बसपा के जेल में बंद विधायक बीएल कुशवाह को कोर्ट ने मतदान करने से इनकार कर दिया है।

यूं गड़बड़ाया नंबरों का गणित

– अभी तक छत्तीस के आंकड़े को आगे बढ़ाकर न्यूनतम 41 तक ले जाने की उम्मीद में तीन और नंबरों की कमी आ गई।
– कोर्ट ने कुशवाह की वोट डालने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया था।
– दूसरी ओर जमीदारा पार्टी की विधायक कामिनी जिंदल और सोनादेवी बावरी भी अब भाजपा के खेमे में आ ही गई थीं।
– प्रत्येक प्रत्याशी को जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए था, जो अब बदल कर 40 हो गया है।
– यह बदलाव वोट देने वाले विधायकों की संख्या में एक की कमी आने से हुआ है।

– अब चूंकि 200 में से केवल 199 विधायक ही वोट दे सकेंगे, ऐसे में तकनीकी रूप से प्रत्येक प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 40 विधायकों के वोट ही जरूरी होंगे।
– ऐसी स्थिति में भाजपा के चारों प्रत्याशी अपनी ही पार्टी के विधायकों से जीत सकते हैं, बशर्ते कि किसी भी विधायक का वोट रिजेक्ट नहीं हो।
– जबकि भाजपा के पास पहले से चार निर्दलीय और दो जमीदारां पार्टी के विधायकों का समर्थन है।
– जमींदारा पार्टी की दोनों विधायक अब भाजपा विधायकों के साथ बाड़ाबंदी में ही रहीं।
– इसी बाड़ेबंदी के दौरान जमींदारा पार्टी की दोनों विधायकों को सीएम ने मंच पर बैठाकर बताया कि वे दोनों भाजपा के लिए इस समय कितनी अहम हैं।

आखिर क्यों आई जमीदारा भाजपा के साथ

– पिछले दिनों पार्टी के प्रमुख बी.डी. अग्रवाल के खिलाफ छापे की कार्रवाई के बाद से चर्चा चल रही थी कि सरकार उन पर दबाव बना रही है।
– ऐसे में माना जा रहा था कि इसी दबाव के चलते उनकी पार्टी की दोनों विधायकों को भाजपा का साथ देना पड़ेगा।
– जानकारों का कहना है कि अंदरखाने क्या हुआ, यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन दोनों का भाजपा के साथ आने को इसी कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजपा की यह स्थिति

– अब शनिवार सुबह राजपा को लेकर भी अटकलें आने लगी थीं।

– बताया जा रहा था कि राजपा के चारों विधायक भी भाजपा को वोट कर सकते हैं, लेकिन जो अटकलें सामने आ रही थी, उसके बाद राजपा विधायकों की बैठक हुई।
– अब तय किया गया है कि जो पूर्व में तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
– यानी चारों राजपा विधायक किरोड़ी के नेतृत्व में कमल मोरारका को वोट देंगे।

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