राज्यसभा में बहस आज, नकवी से मिले निर्भया के माता-पिता

नई दिल्ली. राज्यसभा में जुवेनाइल बिल पर मंगलवार को चर्चा होगी। बिल पर बहस के वक्त निर्भया के माता-पिता भी मौजूद रहेंगे। बिल पर चर्चा करवाने को लेकर निर्भया के माता-पिता ने केंदीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से मुलाकात की। बता दें कि इस केस के नाबालिग रेपिस्ट के रिहा होने के बाद संसद पर इस बिल को लेकर प्रेशर बढ़ा है।
क्या कहा निर्भया की मां ने?
– निर्भया के माता-पिता ने कहा, ”दोषी रिहा नहीं होता यदि यह बिल 6 महीने पहले पास हो जाता। पर मैं चाहती हूं कि ये बिल पास हो जाए। मुझे सरकार ने भरोसा दिलाया है कि यह बिल पास हो जाएगा।”
– निर्भया के माता-पिता ने सोमवार को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से मुलाकात भी की थी। कांग्रेस से भी बिल पास कराने को लेकर चर्चा की।
जुवेनाइल बिल के अपडेट्स
– जुवेनाइल जस्टिस एक्ट अमेंडमेंट बिल लोकसभा में पास हो चुका है। लेकिन राज्यसभा में अटका हुआ है।
– मौजूदा कानून के तहत 16 से 18 उम्र के नाबालिग अपराधियों पर जुवेनाइल जस्टिस बाेर्ड में केस चलता है।
– सजा होने पर उन्हें ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक करेक्शन होम में रखा जाता है।
– बताया जा रहा है कि लोकसभा से पास हो चुका यह बिल अभी राज्यसभा की सिलेक्ट कमेटी के पास है।
– निर्भया गैंगरेप केस के दोषी की रिहाई पर रोक लगाने की मांग करती अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद वकीलों ने कहा था कि अगर राज्यसभा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव का बिल पास कर देती, तो निर्भया के रेपिस्ट को जेल में ही रखा जा सकता था।
क्या है निर्भया केस?
– 2012 दिसंबर में हुए निर्भया गैंगरेप केस में कुल छह लोग दोषी पाए गए थे। इनमें से एक ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी।
– बाकी दोषी जेल में हैं। आरोपियों में से एक घटना के वक्त नाबालिग था।
– उसे तीन साल करेक्शन होम में रखने के बाद रविवार रात रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई रोकने की अर्जी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
लॉ किसे जुवेनाइल मानता है?
एक जुवेनाइल (किशोर) वह है, जिसकी उम्र 18 साल से कम है। उधर, इंडियन पेनल कोड के मुताबिक किसी भी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगाने के लिए उसकी उम्र कम से कम 7 साल होनी चाहिए।
इस नए बिल की जरूरत क्यों पड़ी?
– पिछले एक दशक में जुवेनाइल क्राइम तेजी से बढ़ा है।
– नेशनल क्राइम रिकॉर्डस ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, 2003 से 2013 तक कुल क्राइम के अनुपात में बाल अपराध 1% से बढ़कर 1.2% हो गया है।
– वहीं, इसी पीरियड में, 16 से 18 साल के जुवेनाइल क्राइम में 12 फीसदी (54% से 66%) की तेजी देखी गई है।
पुराने बिल में क्या है?
– जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2000 के मुताबिक, दोषी जुवेलाइन को सजा के बाद केयर और प्रोटेक्शन दिया जाता है।
– उसे सुधारने की कोशिश की जाती है। इस कानून के मुताबिक अधिकतम तीन साल तक सजा हो सकती है। उस पर न तो जुर्माना लगाया जाता है और न एडल्ट क्रिमिनल की तरह केस चलाया जा सकता है।
नए बिल में क्या बदल रहा है?
– अब नए कानून के मुताबिक, सीरियस क्राइम में नाबालिग अपराधी (16 से 18 साल का) पर भी एडल्ट क्रिमिनल की तरह ही केस चलाया जाएगा।
– इसके लिए देश के हर जिले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को बनाया जाएगा।
– जेजीबी शुरुआती जांच के बाद यह तय करेगा कि जुवेनाइल अपराधी को करेक्शन होम (सुधार गृह) में भेजा जाए या नहीं। या एडल्ट की तरह केस चलाया जाए।
– जांच में नाबालिग की मानसिक और शारीरिक अवस्था का आकलन किया जाएगा।
– उसके बाद ही कोर्ट तय करेगा कि उस पर एडल्ट की तरह केस चलाया जाए या नहीं।
– सीडब्ल्यूसी केयर और प्रोटेक्शन की जरूरत वाले जुवेनाइल या बच्चों के लिए इंस्टीट्यूशनल केयर के बारे में तय करेगी।
इसलिए भी टल रहा था ये बिल?
– बिल की जांच कर रही स्थायी कमेटी के मुताबिक बिल जुवेनाइल से जुड़े क्राइम के गलत डेटा पर है। संविधान के कुछ स्पेशल प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
– बिल का विरोध करने वाले तर्क दे रहे हैं कि यह बिल जुवेनाइल के सुधारने के अधिकार को खत्म करता है।
– कई लोगों का मानना है कि यह बिल जुवेनाइल क्राइम को कम नहीं करेगा।
– यूएन कन्वेंशन के मुताबिक 18 साल से कम के उम्र के बच्चों को समान माना जाना चाहिए। अगर ये कानून आता है तो यह यूएन कन्वेंशन का उल्लंघन होगा। क्योंकि इस पर सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।
– बिल में दी गई कुछ सजा क्राइम की गंभीरता के अनुपात में नहीं है।

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