राज्यसभा /28 साल सांसद रहे मनमोहन का कार्यकाल खत्म, बजट सत्र में कोई पूर्व प्रधानमंत्री मौजूद नहीं होगा

नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का राज्यसभा में कार्यकाल शुक्रवार को खत्म हो गया। वे 28 साल तक राज्यसभा सदस्य रहे। पहली बार 1991 में असम से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद यह पहला मौका है जब मनमोहन सदन का हिस्सा नहीं होंगे। नई सरकार का बजट सत्र 17 जून से शुरू होने वाला है। इस बार कोई पूर्व प्रधानमंत्री बजट सत्र के दौरान सदन में मौजूद नहीं रहेगा। एचडी देवेगौड़ा भी लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।

असम में राज्यसभा की सात सीटें हैं। 14 जून को मनमोहन सिंह और एस कुजूर का कार्यकाल खत्म होने से दो सीटें खाली हो गईं। मई में इन सीटों पर चुनाव हुए। एक भाजपा और दूसरी सीट असम गण परिषद (एजीपी) के हिस्से में गई। भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा और एजीपी के बिरेंदर प्रसाद ने निर्विरोध जीत दर्ज की।

कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया

असम की दोनों खाली राज्यसभा सीटों पर कांग्रेस और एआईयूडीएफ पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था, क्योंकि उसके पास विधानसभा में सदस्यों की संख्या बहुत कम है। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 26 और एआईयूडीएफ के 13 विधायक हैं, जबकि भाजपा के 60 विधायक हैं।

अगले साल तीन सांसदों का कार्यकाल खत्म होगा
असम में अब भी कांग्रेस के चार राज्यसभा सांसद हैं। इनमें से भुबनेश्वर कलिता और डॉ. संजय सिन्ह का कार्यकाल 4 अप्रैल 2020 को खत्म होगा। इस दिन बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट पार्टी के बिश्वजीत डैमेरी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। विधानसभा में सदस्यता को देखते हुए संभावना है कि कांग्रेस के पास से यह सीटें छिन सकती हैं।

बजट सत्र में कोई पूर्व प्रधानमंत्री नहीं होगा
इस बार कोई पूर्व प्रधानमंत्री बजट सत्र में मौजूद नहीं रहेगा। मनमोहन सिंह का कार्यकाल खत्म हो गया है और एचडी देवेगौड़ा तुमकुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। देवेगौड़ा जून 1996 से अप्रैल 1997 और मनमोहन 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहे। मनमोहन ने 10 साल उच्च सदन में अगुआई की और 6 साल विपक्ष के नेता भी रहे थे। आखिरी बार 2013 में राज्यसभा सदस्य चुने गए थे।