राज्य कैबिनेट के 4 अहम फैसले, केबल टीवी पर मनोरंजन टैक्स 15 से बढ़कर 50 रु.

पटना.राज्य में केबल टीवी पर लगने वाले मनोरंजन टैक्स में तीन गुनी से भी अधिक बढ़ोतरी कर दी गई है। बुधवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। राज्य में प्रति केबल कनेक्शन 15 रुपए की बजाए अब 50 रुपए मनोरंजन टैक्स लगेंगे। इससे सरकार को सालाना 25 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। पटना में ही केबल उपभोक्ताओं की संख्या 2.5 लाख है, जबकि पूरे राज्य में 10 लाख।
जानिए राज्य कैबिनेट के अन्य फैसले…
– केबल ऑपरेटर बढ़े हुए टैक्स का बोझ आम उपभोक्ता से ही वसूलेंगे। इस फैसले को शराबबंदी की वजह से होने वाली टैक्स क्षति की भरपाई की कोशिश से जोड़ कर देखा जा रहा है।
– हालांकि कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि केबल कनेक्शन पर मनोरंजन कर की मौजूदा दर वर्ष 2007 से चली आ रही थी।
– चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने 22000 करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। वाणिज्य कर विभाग को मनोरंजन कर के रूप में अधिकतर राजस्व डिश टेलीविजन और केबल कनेक्शन से ही मिलता है।
– आंतरिक स्रोतों को चिह्नित करते हुए टैक्स की मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन किया जाना जरूरी हो गया था।
बजट में योजना और गैर योजना मद का अंतर खत्म
– राज्य बजट में योजना और गैर योजना मद का अंतर खत्म कर दिया गया है।
– बदली हुई व्यवस्था में सरकार राज्य के खर्च को योजना और गैर योजना की बजाए अब चार श्रेणियों में दिखाएगी।
– अगले वर्ष से बजट में गैर योजना मद का नाम बदल कर स्थापना और प्रतिबद्ध व्यय के रूप में दिखाया जाएगा।
जीएसटी में पंजीयन के लिए अनिवार्य होगा पैन नंबर
– जीएसटी में पैन के आधार पर कारोबारियों को निबंधन संख्या आवंटित किया जाना है।
– इसलिए वाणिज्य कर में पंजीयन के लिए पैन को अनिवार्य किया गया है।
– लेकिन विलासिता और मनोरंजन कर के आवेदन में पैन का ब्लॉक नहीं है।
– इसलिए वैट नियमावली में संशोधन करते हुए विलासिता और मनोरंजन कर के आवेदन में भी पैन अनिवार्य कर दिया गया है।
कारोबारियों को मिलेगा फॉर्म सी व एफ में सुधार का मौका
– प्रदेश के एक लाख से अधिक कारोबारियों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें 10 अक्टूबर 2015 से पूर्व ऑनलाइन निर्गत केंद्रीय फॉर्म सी और एफ में संशोधन का करने का मौका मिलेगा।
– इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इससे पहले निर्गत ऑनलाइन दोनों फाॅर्म में डम्मी देखने का प्रावधान नहीं था।
– अगर फार्म भरने में कोई गड़बड़ी हो जाती थी तो उसमें संशोधन करने का कोई प्रावधान वाणिज्य कर अधिनियम में नहीं था। इससे कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
– हालांकि वाणिज्य कर विभाग ने 10 अक्टूबर 2015 को साफ्टवेयर में परिवर्तन कर आवेदन की डम्मी की व्यवस्था कर दी थी। कारोबारी फार्म भरने के 48 घंटे बाद फाइनल आवेदन ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं।
– फार्म सी बिहार से बाहर से माल मंगवाने वाले कारोबारियों को देना पड़ता है। जबकि एफ स्टॉक ट्रांसफर वाले कारोबारियों को देना पड़ता है।
क्या हैं ये फॉर्म
– फार्म सी दूसरे राज्य से माल मंगवाने वालों को देना पड़ता है।
– फॉर्म एफ स्टॉक ट्रांसफर करने वालों भरना पड़ता है।