राफेल डील केस: CJI ने मोदी सरकार से कहा- कोर्ट के साथ हाइड एंड सीक का खेल क्यों खेल रहे हैं, ये नहीं चलेगा

राफेल डील मामले (Rafale Deal Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. केंद्र सरकार ने जवाबी हलफनामे के लिए और वक्त मांगा है. साथ ही कहा कि मंगलवार को होने वाली सुनवाई टाल दी जाए. इस पर सीजेआई रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने कहा कि वो इस संबंध में आदेश जारी करेंगे. इस दौरान मेंशनिंग में नाम ना बोलने पर बेंच में शामिल सीजेआई नाराज हो गए और उन्होंने केंद्र सरकार के वकील को फटकार लगाई. इसके साथ ही पीएम मोदी (PM Modi) और अमित शाह (Amit Shah) के कथित तौर पर आचार संहिता उल्लंघन मामले में अभिषेक मनु सिंघवी को भी फटकार लगाई. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सब कोर्ट के साथ हाइड एंड सीक का खेल क्यों खेल रहे हैं? 

सीजेआई ने कहा कि केंद्र के वकील कह रहे हें कि वो जवाबी हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं लेकिन ये नहीं बता रहे कि वो राफेल में हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं. इसलिए उनको और वक्त चाहिए तो वो सुनवाई टालना चाहते हैं. उनको कहना चाहिए कि कल (मंगलवार) दो बजे होने वाली राफेल मामले की सुनवाई में वो जवाबी हलफनामा दाखिल करना चाहते है. इसी तरह सिंघवी भी पीएम मोदी और अमित शाह का नाम नहीं ले रहे. आपको ये सब बंद करना चाहिए. कोर्ट के साथ हाईड एंड सीक खेल नहीं चलेगा

.View image on Twitter

View image on Twitter

ANI@ANI

Central Government seeks time to file a fresh affidavit in the Rafale review petition case and asks the court to defer the hearing which was fixed for tomorrow to allow it to file the affidavit.11711:00 AM – Apr 29, 201946 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy

बता दें, पीएम मोदी (PM Modi) और अमित शाह (Amit Shah) के खिलाफ कथित तौर पर आचार संहिता के उल्लंघन मामले में ‘कार्रवाई’ नहीं करने पर चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंची है. कांग्रेस (Congress) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ 24 घंटे में फैसला लेने के लिए आयोग को निर्देश दिए जाएं.

कांग्रेस ने कहा कि 23 अप्रैल को मतदान के दिन गुजरात में रैली करके प्रधानमंत्री ने आचार संहिता का उल्लंघन किया. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पीएम और अमित शाह के उल्लंघन की शिकायत की है लेकिन तीन हफ्ते बीतने के बाद भी चुनाव आयोग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है. आमतौर पर इस तरह के मामलों में चुनाव आयोग उल्लंघन करने वालों पर 72 घंटे तक प्रचार पर बैन लगाता है.