राष्ट्रपति चुनाव में अपोजिशन बिखरा, कोविंद को मिले 119 विपक्षी MLAs के वोट

नई दिल्ली. बीजेपी और एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद उम्मीद के मुताबिक मीरा कुमार को हराकर राष्ट्रपति चुन लिए गए। उन्होंने 3 लाख 34 हजार वोटों से चुनाव जीता और इस अंतर ने कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी है। चुनाव में विपक्ष पूरी तरह बिखर गया। जमकर क्रॉस वोटिंग हुई। कम से कम 10 राज्यों में कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार को अपनी ही पार्टी के पूरे वोट नहीं मिले। इस क्रॉस वोटिंग के कई सियासी मायने हैं। खासतौर से गुजरात में, जहां इसी साल राज्यसभा की तीन सीटों के लिए और विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी के महासचिव भूपेंद्र यादव ने दावा किया कि कोविंद के पक्ष में करीब 119 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। सबसे अधिक कांग्रेस के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।
वाघेला समर्थकों ने कोविंद को दिया वोट…
– मध्यप्रदेश, गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली में कोविंद को उम्मीद से अधिक वोट मिले। माना जा रहा है कि गुजरात में शंकर सिंह वाघेला के समर्थक विधायकों ने मीरा कुमार की बजाय कोविंद के पक्ष में वोट डाला। गुजरात में कोविंद को 132 और मीरा को 49 वोट मिले। राज्य में कांग्रेस के 57 विधायक हैं। यानी, 8 कांग्रेस विधायकों ने कोविंद को वोट दिया।
कोविंद को और कहां-कितने वोट मिले?
– दिल्ली में बीजेपी के चार विधायक हैं, पर कोविंद को छह वोट मिले। ये दो वोट आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के थे। पश्चिम बंगाल में कोविंद को 11 और मीरा को 273 वोट मिले। यहां बीजेपी और उसके सहयोगी दल के 6 वोट हैं। यानी, कोविंद को पांच वोट दूसरी पार्टियों के वोट मिले।
– त्रिपुरा में एनडीए का एक भी विधायक नहीं है। फिर भी उसके उम्मीदवार को यहां सात वोट मिले। माना जा रहा है कि ये वोट टीएमसी के बागी विधायकों के थे।
– महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के 185 विधायक हैं। फिर भी कोविंद 208 के आंकड़े तक पहुंच गए। गोवा में भी कोविंद को उम्मीद से पांच अधिक विधायकों का समर्थन मिला। यहां कांग्रेस के 16 विधायक हैं। पर मीरा कुमार को 11 का समर्थन ही मिला।
– असम में भी बीजेपी के 87 विधायक होने के बावजूद कोविंद को 91 वोट मिले। उत्तर प्रदेश में मीरा को 74 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ 65 वोट मिले।
राजस्थान में 10 बीजेपी एमएलए ने मीरा को दिए वोट
– मीरा कुमार के पक्ष में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और नगालैंड में क्रॉस वोटिंग हुईं। राजस्थान में कांग्रेस के 21 और बसपा के तीन विधायक हैं। पर मीरा कुमार को 34 वोट मिले। 10 बीजेपी एमएलए ने मीरा को वोट दिए।
नए राष्ट्रपति की शख्सियत के 3 किस्से…
पढ़ाई के लिए घर से पैसा न लेना पड़े इसलिए स्टेनो की नौकरी करते थे
– रामनाथ पढ़ने में अच्छे थे। वे बचपन में घर से आठ किमी दूर पैदल जाकर पढ़ने जाते थे। जब वो पढ़ाई के लिए शहर गए तब कोर्ट में स्टेनो की नौकरी करने लगे। ताकि पिताजी से पैसे न मंगाने पड़े। लॉ करने के बाद वो सिविल सर्विस की तैयारी करने दिल्ली चले गए। पढ़ाई में दिक्कत न हो तो पिता ने गांव की जमीन बेच दी।
कोविंद ने अपना पुश्तैनी घर भी सरकार को कर दिया दान
– रामनाथ कोविंद बचपन में ही गांव छोड़ चुके थे। कानपुर देहात के परौंख गांव में अब उनका कोई नहीं रहता। कोविंद के पास उनका पुश्तैनी घर था, वो भी उन्होंने गांव की पंचायत को बारात घर के लिए 1999 में दान कर दिया। जायदाद के नाम पर उनके पास आज भी कुछ नहीं है।
बड़ी बहन अपने हाथों से खाना परोसती थी, तभी खाते थे
– कोविंद खाना तभी खाते थे, जब बड़ी बहन परोस कर देती थी। एक दिन बहन बाजार गई। सभी ने खाना खा लिया। पर कोविंद ने नहीं खाया। वापस आकर बहन ने मनाया तब जाकर खाना खाया। तब से वो कोविंद को खाना खिलाए बिना बाहर नहीं जाती थीं।
गांव में जश्न: लोगों ने गाया- मेरे बाबा की भई सरकार
– रामनाथ कोविंद 71 साल पहले कानपुर देहात के परौंख गांव में पैदा हुए थे। रामनाथ जिस घर पर जन्मे थे, उसे अब दो कमरे का कम्युनिटी सेंटर बना दिया है। गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव का रिजल्ट आने से पहले ही यहां लोग जमा होने शुरू हो गए थे। ढोल-नगाड़े ताशे बजने लगे। भजन से लेकर अखंड रामायण का पाठ शुरू हो गया। लोगों ने गांव की सड़कों को खुद ही साफ किया। जब तक रिजल्ट आया तब तक लोग, ‘मेरे बाबा की भई सरकार’ गाना शुरू कर चुके थे। रहमान ने दो रकत शुक्राने की नमाज अदा की है। फिर कहा, “खुदा का शुक्र अदा करने के लिए वे यहां आए हैं। खुशी की बात है, जिस राष्ट्रपति के बारे में हम किताबों में पढ़ा करते हैं और अब वह हमारे गांव के लल्ला हैं।”

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