राहुल गांधी की नजर अब मप्र के विधानसभा चुनाव पर

भोपाल, 14 मार्च 2013 | अपडेटेड: 15:52

मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में मंथन का दौर शुरू हो गया है. हर पार्टी के नेता सक्रिय हो चले हैं. कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नेताओं से रायशुमारी तेज कर दी है. इन बैठकों में उस मंत्र को खोजा जा रहा है जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत की हैट्रिक को रोका जा सके.

राज्य में नौ वर्षों से भाजपा की सरकार है. बीते दो चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इसी साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, जिसमें भाजपा की कोशिश हैट-ट्रिक बनाने की है तो कांग्रेस हार के सिलसिले को खत्म कर जीत हासिल करना चाहती है.

राज्य विधानसभा की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि भाजपा के 151 तो कांग्रेस के 66 विधायक हैं. बीते चार वर्ष की अवधि में हुए विधानसभा के उप-चुनाव में कांग्रेस को कई सीटें गंवाना पड़ी हैं. पहले वर्ष 2003 और 2008 के विधानसभा चुनाव में पराजय और फिर उप-चुनावों में मिली हार भी कांग्रेस को चिंता में डाले हुए है. इस हार के सिलसिले को कैसे तोड़ा जाए यह कांग्रेस के सामने यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है.

विधानसभा चुनाव में भले ही आठ माह का वक्त हो, मगर कांग्रेस ने अभी से तैयारी तेज कर दी है. समन्वय समिति की बैठक के बाद राज्य के सांसदों के साथ राहुल गांधी दिल्ली में बैठक कर चुके हैं और मंगलवार को एक बार फिर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ मिले.

बीते कुछ दिनों दिल्ली में हुई कांग्रेस नेताओं की बैठक में राहुल गांधी ने सिर्फ चुनाव जीतने पर जोर दिया. साथ ही सभी को यह भी हिदायत दी कि एकता के सूत्र को और मजबूत करें, ताकि गुटबाजी की झलक तक नजर न आए. राहुल गांधी के साथ बैठक करने के बाद भूरिया व अजय सिंह ने इतना तो जाहिर कर ही दिया है कि कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत का रास्ता बनाना है.

राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की कमान संभालने के बाद राज्य के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर उन्होंने जाहिर कर दिया है कि उनके लिए विधानसभा चुनाव काफी अहमियत वाले हैं. हो भी ऐसा क्यों न, क्योंकि वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में होने वाला विधानसभा चुनाव आने वाले चुनावों की रूपरेखा जो तय करेंगे.