रिटायर होने के बाद क्यों मार दिए जाते हैं आर्मी डॉग्स, जानिए अभी

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत आर्मी डॉग्स (कुत्ते) को रिटायरमेंट के बाद मारा नहीं जाएगा। डॉग्स देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके बारे में कई नियम और बातें बेहद दिलचस्प हैं।
आर्मी के कुत्ते उसी तरह देश की सेवा करते हैं, जिस तरह सैनिक। लेकिन स्थिति यह है कि इन्हें तब तक ही जीवित रखा जाता है, जब तक ये काम के रहते हैं। इसके बाद इन्हें जहर देकर मार दिया जाता है। इस चलन को लेकर कई एनिमल एनजीओ और संस्थाओं ने सवाल खड़े किए। वकील संजय सिंह ने कोर्ट में याचिका भी दायर की, जिसके परिणाम स्वरूप एडिशनल सॉलीसिटर जनरल संजय जैन ने हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि छह माह के अंदर कुत्तों को जीवित रखने की योजना बनाएंगे। विदेशों की बात की जाए तो वहां एडॉप्शन का कानून है।
ब्रिटेन में 2009 से 13 के बीच 318 कुत्तों को एडॉप्ट किया गया, जबकि 288 को इनकी खराब सेहत के कारण मारना पड़ा। भारत में कई राज्यों में भी पुलिस के कुत्तों को इनके ट्रेनर्स द्वारा एडॉप्ट कर लिया जाता है। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में एडॉप्शन की सुविधा है। रैंक नहीं, नंबर से पहचाने जाते हैं कुत्तों को रैंक से नहीं, बल्कि नंबर और नाम से पहचाना जाता है। इनकी बुद्धि क्षमता इनकी नस्ल पर निर्भर करती है। इसी लिहाज से कुत्ते अलग-अलग कामों में माहिर होते हैं। इनकी योग्यता के अनुसार ही इनकी ड्यूटी लगाई जाती है।

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