रुपये में कमजोरी, महंगाई से चिंतित रिजर्व बैंक ने नहीं घटाईं ब्याज दरें

tatpar 17 june 2013

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक ने खाद्य मुद्रास्फीति की ऊंची दर, रुपये में गिरावट तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश-प्रवाह को लेकर अनिश्चितता के चलते ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक की सोमवार को पेश मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में रेपो दर को 7.25 प्रतिशत व नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को चार फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा गया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने समीक्षा पेश करते हुए कहा, मौद्रिक नीति का ताजा रुख आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच इस समय उभर रहे पारस्परिक प्रभाव, जोखिम के संतुलन के अलावा बाह्य क्षेत्र के हाल के घटनाक्रमों के आधार पर तय किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रोत्साहन पैकेज को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के फैसले का जिक्र किया।

फेडरल रिजर्व की ओर से 22 मई को की गई इस घोषणा के बाद भारत सहित अन्य उभरते बाजारों से धन की निकासी शुरू हो गई थी और इससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर के समक्ष रुपया नीचे आ गया है। चालू खाते का घाटा पहले ही चिंता का विषय बना हुआ है। दिसंबर तिमाही में चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के रिकॉर्ड स्तर 6.7 प्रतिशत पर पहुंच गया था।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि चालू खाते के घाटे को कम कर इसे संभालने लायक स्तर तक सीमित करने के लिए निकट भविष्य की चुनौती है कि इस घाटे की भरपाई संतुलित विदेशी मुद्रा प्रवाह के जरिये हो सके। इस साल 1 जनवरी के बाद से रुपया अमेरिकी डॉलर के समक्ष 5.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

पिछले सप्ताह यह कारोबार के दौरान 58.98 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर तक चला गया था। सुबह के कारोबार में रुपया 57.84 प्रति डॉलर पर चल रहा था। रिजर्व बैंक ने अपने दिशानिर्देशन में विशेष रूप से महंगाई के जोखिम का उल्लेख किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि महंगाई की दर में टिकाऊ या स्थायी गिरावट से ही मौद्रिक रुख को नरम करने का रास्ता खुला सकता है।

रिजर्व बैंक द्वारा यथास्थिति कायम रखने से बाजार की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका लगा है। इससे पिछली तीन मौद्रिक नीति घोषणाओं में केंद्रीय बैंक रेपो दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती कर चुका है।