रेस्टोरेंट्स में सर्विस चार्ज लेना गैर-कानूनी, कंज्यूमर अफेयर्स सेक्रेटरी ने कहा- कस्टमर्स इसे देने से मना कर सकते हैं

नई दिल्ली.केंद्र सरकार ने रेस्टोरेंट बिल में सर्विस चार्ज को लेकर स्थिति और साफ कर दी है। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी हेम कुमार पांडे ने moneybhaskar.com को बताया कि होटल्स और रेस्टोरेंट्स का सर्विस चार्ज वसूल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। अगर इसके बाद भी होटल्स-रेस्टोरेंट्स ओनर्स नहीं मानते हैं तो सरकार इसके लिए सख्त कानून लाएगी। बता दें कि रेस्टोरेंट्स में 5 से 20% सर्विस चार्ज जरूरी तौर पर वसूले जाने की कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद केंद्र ने यह स्थिति साफ की है। अगर कंज्यूमर को किसी रेस्टोरेंट में सर्विस पसंद न आए तो वह आज से ही चार्ज देने से मना कर सकता है। DainikBhaskar.com एक्सपर्ट्स के जरिए बता रहा है ये फैसला किस तरह कंज्यूमर के हक में है…
– कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी हेम कुमार पांडे ने moneybhaskar.com को बताया कि अभी ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसमें सर्विस चार्ज लेने का प्रावधान है। ऐसे में होटल, रेस्टोरेंट्स का सर्विस चार्ज वसूल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
– उन्होंने बताया कि यह कस्टमर के ऊपर है कि वह सर्विस चार्ज देना चाहता है या नहीं। अगर कस्टमर सर्विस से इम्प्रेस होकर सर्विस चार्ज देना चाहता है, तो वह दे सकता है लेकिन कोई भी होटल या रेस्टोरेंट जबरदस्ती सर्विस चार्ज नहीं ले सकता। पेमेंट स्लिप पर सर्विस चार्ज लिखना भी पूरी तरह से गैर-कानूनी है। होटल, रेस्टोरेट कारोबारियों को सर्विस चार्ज को लेकर ट्रांसपैरेंसी रखनी चाहिए।
– सेक्रेटरी ने कहा कि अभी हम चाहते हैं कि यह मसला कंज्यूमर और होटल्स-रेस्टोरेंट्स ओनर्स के लेवल पर सुलझ जाए। केंद्र ने एडवाइजरी जारी की है। अगर इसके बाद भी होटल्स-रेस्टोरेंट्स ओनर्स नहीं मानते हैं तो सरकार इसके लिए अलग से सख्त कानून लाएगी।
क्या कहता है रेस्टोरेंट एसोसिएशन?
– नेशनल रेस्‍टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के रियाज अमलानी ने सर्विस चार्ज को कानूनी बताया। उन्होंने कहा कि अगर कस्‍टमर सर्विस चार्ज नहीं भरना चाहतेे तो उनके पास ऑप्‍शन है कि वह उन होटलों में न खाएं, जहां सर्विस चार्ज लिया जाता है।
Q. क्या ये नया फैसला है?
– नहीं। सर्विस चार्ज पर ये नियम पहले से था। लेकिन, कुछ होटल्स और रेस्टोरेंट्स जबरदस्ती सर्विस चार्ज वसूल रहे थे। जबकि सर्विस चार्ज देना है या नहीं, यह कंज्यूमर का अपना फैसला होता है।
– ज्यादातर कंज्यूमर्स विवाद से बचने के लिए इसे दे देते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं है। ऐसे मामलों की शिकायत जब मिनिस्ट्री से हुई तो यह स्पष्टीकरण जारी किया गया।
– कंज्यूमर राइट्स मामलों के वकील अनुराग तोमर ने DainikBhaskar.com को बताया कि ये कंज्यूमर के अधिकारों की बात है। ये केंद्र का कानून है जो 1986 में बना था। इसे राज्यों को मानना ही होगा।
Q. अगर मैं आज ही रेस्टोरेंट जाऊं तो क्या वहां सर्विस पसंद न आने पर उसका चार्ज देने से मना कर सकता हूं?
– कंज्यूमर राइट्स मामलों के वकील और कंज्यूमर एक्टिविस्ट अजय बग्गा ने बताया कि आप आज से ही सर्विस चार्ज देने से मना कर सकते हैं। अगर विवाद हो तो आप इसकी शिकायत कंज्यूमर फोरम, जिले के कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर से कर सकते हैं। आप core.nic.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।
Q. क्या रेस्टोरेंट बिल में सर्विस चार्ज जोड़ना सही है?
– कंज्यूमर ऑनलाइन के फाउंडर बेजॉन मिश्रा ने बताया, ”सर्विस चार्ज लेना ही गैर-कानूनी है। इसे रेस्टोरेंट्स बिल में नहीं जोड़ सकते। यह खुशी से दी जाने वाली रकम होती है। आप आज से ही रेस्टोरेंट्स में यह सर्विस चार्ज देने से मना कर सकते हैं। एडवाइजरी के बाद राज्यों को इसे तुरंत मानना होगा। अगर सर्विस चार्ज नहीं देना चाहते हैं तो कोई रजिस्टर्ड रेस्टोरेंट ओनर अापको वहां आने या खाने से नहीं रोक सकता।”
Q. बिल में कितना सर्विस चार्ज जुड़ा होता है? क्या सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स एक ही है?
– अलग-अलग रेस्टोरेंट्स 5% से 20% तक सर्विस चार्ज लेते हैं। सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। सर्विस चार्ज को आप साधारण भाषा में ‘टिप’ भी कह सकते हैं। होटल या रेस्टोरेंट दावा करते हैं कि वो ये पैसा अपने स्टाफ को डिस्ट्रीब्यूट करते हैं।
Q. केंद्र की एडवाइजरी मेरे लिए किस तरह फायदेमंद है?
– अगर किसी होटल या रेस्टोरेंट की सर्विस या क्वॉलिटी से खुश नहीं तो सर्विस चार्ज ना दें। क्योंकि, ये ऑप्शनल है। मेंडेटरी यानी जरूरी नहीं। अभी यदि आपका बिल 1000 रुपए आता है और आपको सर्विस पसंद नहीं आई तो आपके 50 से 200 रुपए तक बच सकते हैं।
Q. केंद्र ने स्थिति साफ कर दी, अब राज्य सरकारों को क्या करना होगा?
– डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने कहा है कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट कंज्यूमर्स से जबरदस्ती सर्विस चार्ज नहीं ले सकता।
– अब राज्यों को बड़ी कंपनियों, होटलों और रेस्टोरेंट्स को केंद्र की एडवाइजरी की जानकारी देनी होगी। राज्य सरकारें कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 को मानने के लिए बाध्य हैं।
– अगर होटल या रेस्टोरेंट जबर्दस्ती इसे वसूलें तो इसकी शिकायत, कंज्यूमर फोरम में की जा सकती है।
Q. होटल या रेस्टोरेंट्स को क्या ऑर्डर?
– अब इन्हें नोटिस बोर्ड या बाकी जगहों पर सर्विस चार्ज पर सरकार के ऑर्डर की जानकारी देनी होगी।
Q. क्या कहता है 1986 का कंज्यूमर प्रोटेक्टशन एक्ट
– कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के मुताबिक, अगर किसी कंज्यूमर को गलत तरीके से सर्विस के बदले पैसा देने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह इसकी शिकायत कंज्यूमर फोरम से कर सकता है। (पूरा एक्ट जानने के लिए यहां क्लिक करें)
Q. कहां करें शिकायत?
– अगर आप देश के 28 राज्यों में से कहीं भी हैं तो सरकार ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर तय किए हैं, जहां आप मौके से ही शिकायत कर सकते हैं। (हेल्पलाइन नंबर जानने के लिए यहां क्लिक करें)
Q. रेस्टोरेंट के बिल में दूसरे टैक्स भी होते हैं?
– हां। 12.5% वैट, 5. 6% सर्विस टैक्स। 1 जून से इस पर 0.5% कृषि कल्याण सेस भी लगाया जा रहा है।
Q. सर्विस टैक्स कितना होता है?
– सर्विस टैक्स टोटल बिल अमाउंट का 5.6% ही हो सकता है। इससे ज्यादा नहीं। ये कम्पलसरी है। यानी आपको देना ही होगा।
85 लाख इम्प्लॉइज पर पड़ेगा फैसले का असर: NRAI
– नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के प्रेसिडेंट रियाज अमलानी ने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि सर्विस चार्ज को
ऑप्शनल करने के फैसले से देश में फूड सर्विस इंडस्ट्रीज में काम करने वाले करीब 85 लाख इम्प्लाॅइज को बहुत बड़ा नुकसान होगा।
– यह सिर्फ मालिक के लिए नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट में काम करने वाले सभी इम्प्लाॅइज के लिए है। इनमें बर्तन धोने वाला, केयरटेकर,
साफ-सफाई करने वाला वो सभी लोग शामिल हैं जो सर्विस चार्ज पर डिपेंड हैं।