ललित मोदी को पासपोर्ट दिलाने के लिए सुषमा की बेटी ने 7 बार की पैरवी

नई दिल्ली. करप्शन के आरोपी आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की मदद कर घिरीं सुषमा स्वराज पर विपक्ष ने हितों के टकराव का आरोप लगाया है। विपक्ष ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए कहा है कि विदेश मंत्री की बेटी बांसुरी स्वराज ललित मोदी की वकील हैं और उन्होंने ललित के पासपोर्ट को बहाल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। बांसुरी सात बार ललित मोदी के पासपोर्ट से जुड़े केस में कोर्ट में पैरवी कर चुकी हैं। बांसुरी ने 2013 में पांच बार और 2014 में दो बार अदालत में जिरह की थी। कांग्रेस ने इस विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पार्टी ने पूछा है कि पीएम और ललित मोदी के बीच क्या संबंध है। यही नहीं, कांग्रेस ने सुषमा स्वराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। इस बीच, विवाद के सामने आने के दो दिन बाद भी प्रधानमंत्री की तरफ से इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है।

कौन हैं बांसुरी स्वराज?

बांसुरी स्वराज सुषमा स्वराज की बेटी हैं। वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रैजुएट हैं। नई दिल्ली हाईकोर्ट में ललित मोदी के पासपोर्ट मामले में बांसुरी उस लीगल टीम का हिस्सा रही हैं, जिसने यह मामला अप्रैल 2012 से अगस्त 2014 तक लड़ा था। सुषमा स्वराज ने खुद स्वीकार किया है उन्होंने मानवीय आधार पर ललित मोदी को पुर्तगाल जाने के लिए कागजात दिलावाने में मदद की थी। इससे पहले आरोप लगा था कि सुषमा के पति ने अपने भतीजे का 2013 में ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी के लॉ कोर्स में एडमिशन में ललित मोदी से मदद मांग थी। तब सुषमा लोकसभा में नेता, विपक्ष थीं।

ईडी के नोटिस के साथ शुरू हुआ था कानूनी विवाद

कानूनी विवादों की शुरुआत उस वक्त हुई थी, जब मई 2010 में फेमा के उल्लंघन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ललित मोदी को नोटिस भेजा था। ललित मोदी ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जिसके बाद मार्च 2011 में मुंबई स्थित रिजनल पार्सपोर्ट ऑफिस ने उनके पासपोर्ट (No. Z-1784222) को निरस्त कर दिया था। इसी फैसले को 18 अप्रैल 2012 को ललित मोदी ने कोर्ट में चैलेंज किया था।

हाईकोर्ट में ललित मोदी की पैरवी कर रही थीं सुषमा की बेटी

जब अपने पासपोर्ट निरस्त होने के मामले में ललित मोदी ने हाईकोर्ट में अपील की थी तो उस वक्त सुषमा की बेटी उनकी पैरवी करने वाली लीगल टीम में शामिल थीं। उस वक्त ललित के लिए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने पैरवी की थी जो कि आज देश के अटॉर्नी जनरल हैं। उस वक्त बांसुरी यूयू ललित की सहायक थीं जो कि कई मौकों पर मोदी की पैरवी कर चुके हैं और फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के जज हैं।

केस में राहत के बाद ललित मोदी ने बांसुरी को कहा था-शुक्रिया

हाईकोर्ट में पासपोर्ट मामले में राहत मिलने के बाद ललित मोदी ने अपनी लीगल टीम को बधाई दी थी। ललित मोदी ने केस में राहत के बाद ट्विटर पर लिखा था, ”आज का मेरा आखिरी ट्वीट दुनिया की सबसे महान लीगल टीम को समर्पित, उसके बिना मैं आज यहां नहीं होता। महमूद अब्दी, बांसुरी स्वराज, रोजर घेरसन, डॉरटसेल मार्था, बियांका हेलमिरिक, वेंकटेश ढोंड, अभिषेक सिंह, अंकुर चावला शुक्रिया।” बता दें कि आईपीएल में वित्तीय अनियमितताओं की तमाम गड़बड़ियों के बाद ललित मोदी देश छोड़कर लंदन में रहने लगे थे, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उनके पासपोर्ट को रद्द कर दिया था, जिसके खिलाफ ललित मोदी दिल्ली हाईकोर्ट गए और 27 अगस्त 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ललित मोदी के पासपोर्ट को रद्द करने के केंद्र सरकार के आदेश को असंवैधानिक करार दिया।

ईडी ने ललित मोदी पर लगाए थे गंभीर आरोप

जनवरी 2013 में हाईकोर्ट की सिंगल- जज बेंच ने पासपोर्ट बहाल करने की अपील को खारिज कर दिया था। जस्टिस राजीव शाकेधर ने ईडी के पहलु को महत्व देते हुए देश हित में ऐसा किया था। ईडी ने चिंता जाहिर की थी, ”देश के आर्थिक हितों का सम्मान करते हुए हमें ऐसे व्यक्ति से पूछताछ की जरूरत है जिसने सैकड़ों करोड़ रुपए देश के बाहर जमा कर रखे हैं।” उस दौरान के रिकॉर्डस से पता चलता है कि ललित मोदी की ओर से बांसुरी मौजूद थीं।

प्रशांत ने की देश में कॉन्फिल्क्ट ऑफ इंट्रेस्ट कानून की मांग
आम आदमी पार्टी से निकाले गए नेता और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, ”ललित मोदी फरार है, ब्रिटिश सरकार ने भी उनकी यात्राओं पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। सुषमा ने ऐसे समय में उनकी मदद की है जब उनकी बेटी ललित मोदी की वकील हैं। यह अनुचित है, देश में कॉन्फिल्क्ट ऑफ इंट्रेस्ट का कानून होना चाहिए जो कि इसे एक अपराध माने। क्योंकि सुषमा जी की बेटी मोदी से अपनी फीस ले रही है, उनके लिए यह गलत है कि वह अपने आधिकारिक क्षमता के आधार पर मोदी की मदद करें।”