लापरवाही से गाड़ी चलाने के लिए सजा और कड़ी होनी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं के मुकदमों में दी जा रही मामूली सजा पर चिंता प्रकट की है। न्यायालय ने कहा है कि इस संबंध में भारत का रिकॉर्ड अशोभनीय है। दण्ड कानूनों की जांच और समीक्षा की जाए।

न्यायालय ने कहा कि गरीब और पैदल यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। सभ्य नागरिक वाहन चलाते समय भयभीत रहते हैं तथा खुद को सबसे ऊपर समझने वाले लोगों के आपत्तिजनक रवैये से आशंकित रहते हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि कानून बनाने वालों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए में सजा देने की नीति पर फिर से गौर करना चाहिए। यह धारा दुस्साहसी और लापरवाही के कारण होने वाली मौत से संबंधित है। इसमें अधिकतम दो साल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।

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