लोकसभा में कागज फेंकने पर स्पीकर ने 6 सांसदों को 5 दिन के लिए सस्पेंड किया

नई दिल्ली. लोकसभा में सोमवार को बोफोर्स और गोरक्षकों की हिंसा के मुद्दे पर प्रश्न काल और शून्य काल में जमकर हंगामा हुुआ। हालात ये बन गए कि कांग्रेस सांसदों ने सदन में कागज उछाले। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसका विरोध किया। बाद में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने छह सांसद गौरव गोगोई, के सुरेश, अधीर रंजन चौधरी, रंजीत रंजन, सुष्मिता देव और एमके राघवन को 5 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी।
बोफोर्स का जिन्न बाहर आ गया है…
– शून्यकाल के दौरान कांग्रेस और विपक्ष के नेता गोरक्षकों की हिंसा के विरोध में वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। तभी, बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने बोफोर्स के मुद्दे को उठाया।
– उन्होंने कहा- “एक इन्वेस्टिगेटर के हवाले से एक टीवी चैनल ने बताया कि पूर्व पीएम राजीव गांधी और स्वीडन के पूर्व पीएम ओलोफ पाल्मे के बीच लेनदेन हुआ था। ये कहना कि 30 साल पुराना मुद्दा है और इसे उखाड़ना सही नहीं है, गलत है। अगर इसे गलत तरीके से दफन कर दिया गया तो ये भूत-पिशाच बनकर पीछा करता रहेगा। बोफोर्स का जिन्न बोतल से बाहर गया है।”
– इसके बाद कांग्रेस के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया और सदन में स्पीकर की तरफ पेपर उड़ाने लगे।
प्रश्नकाल के दौरान गोरक्षकों के मुद्दे पर हंगामा
– विपक्षी सांसदों ने प्रश्न काल के दौरान गोरक्षकों की हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारने के मामले में हंगामा किया।
– इस पर कांग्रेस, टीएमसी और आरजेडी सांसद वेल में आ गए और प्रश्न काल को सस्पेंड करने और गोरक्षकों के मसले पर चर्चा की मांग करने लगे। सुमित्रा ने सांसदों की मांग को खारिज कर उनसे अपनी जगह पर बैठने को कहा।
– सुमित्रा ने कहा, “चर्चा बंद नहीं होगी। प्रश्न काल को भी रोका नहीं जाएगा। ये कोई तरीका नहीं है। मैं किसी मुद्दे के लिए चर्चा नहीं रोकूंगी। अगर कोई चर्चा होगी तो वो प्रश्न काल के बाद होगी।”
क्या बोले खड़गे?
– कांग्रेस के लोकसभा में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कहा- “प्रधानमंत्री जी ने तीन बार ये कहा कि गोरक्षक गुंडे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।” इस बीच अपोजिशन के मेंबर्स ने ‘गोरक्षा के नाम पर हत्या बंद करो, खून खराबा बंद करो’, ‘देश को तोड़ने नहीं देंगे’ के नारे लगाए।
– इस बीच हंगामा बढ़ जाता है। सुमित्रा दो तीन बार सांसदों को चुप कराने की कोशिश कराती हैं। वे सत्ता पक्ष के सांसदों से कहती हैं कि आप लोग तो शांति से बैठिए। तभी कांग्रेस समेत विपक्ष के सांसद वेल में स्पीकर की टेबल के पास पहुंच गए।
सरकार ने कहा- ऐसे सांसदों के खिलाफ कार्रवाई हो
– पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने कहा- “कांग्रेस सांसदों के इस बर्ताव की निंदा की जानी चाहिए। सुमित्रा महाजन को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।”
– “पूरा हिंदुस्तान गाय को गोमाता मानता है और गोमाता की गोरक्षा होनी चाहिए। यह पूरे देश का मत है। इस बीच यदि कोई इसके नाम पर कानून अपने हाथ में लेता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
– “गृह मंत्रालय 2016 में सभी प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर चुका है। जिस प्रदेश में ऐसी घटना होती है तो उस प्रदेश की सरकार को वहां के अराजक तत्वों से निपटना चाहिए।”
– अनंत कुमार ने स्पीकर और सदन का सम्मान नहीं करने के लिए के. सुरेश का नाम लिया। कहा कि ऐसे मेंबर्स का सदन से निलंबन कर देना चाहिए।
रिपब्लिक टीवी की इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी में क्या खुलासा हुआ?
रिपब्लिक टीवी ने पूर्व चीफ इन्वेस्टिगेटर से बातचीत के टेप रिलीज किए हैं। ये इन्वेस्टिगेटर हैं स्टेन लिंडस्टॉर्म। लिंडस्टॉर्म स्वीडन इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के चीफ थे और बोफोर्स घोटाले में चीफ इन्वेस्टिगेटर थे। स्वीडिश रेडियो ने तब स्टेन का इंटरव्यू किया था। स्टेन के पास 350 डॉक्युमेंट्स थे। इनमें बैंक्स को दलाली के पेमेंट के इंस्ट्रक्शंस, हैंडरिटन नोट्स, मिनिट्स ऑफ मीटिंग्स और बोफोर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्टिन अर्ब्डो की डायरी शामिल थी।
– बोफोर्स घोटाले में 31 साल बाद रिपब्लिक टीवी की इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी में स्वीडन के पूर्व चीफ इन्वेस्टिगेटर ने तीन दावे किए हैं। पहला- ”राजीव गांधी बोफोर्स डील में गैरकानूनी तरीके से हो रहे पेमेंट्स के बारे में जानते थे।” दूसरा- ”राजीव गांधी ने स्वीडिश पीएम से एक फ्लाइट में पेमेंट्स के बारे में चर्चा की थी।” तीसरा- ”राजीव चाहते थे कि बोफार्स डील के बदले स्वीडिश पीएम भी फंड्स रिसीव करें।”
क्या था बोफोर्स घोटाला?
– बोफोर्स तोप घोटाले को आजाद भारत के बाद सबसे बड़ा मल्टीनेशनल स्कैम माना जाता है। 1986 में हथियार बनाने वाली स्वीडन की कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को 155mm की 400 तोपें सप्लाई करने का सौदा किया था। यह डील 1.3 अरब डाॅलर (डॉलर के मौजूदा रेट से करीब 8380 करोड़ रुपए) की थी।
– 1987 में यह बात सामने आई थी कि यह डील हासिल करने के लिए भारत में 64 करोड़ रुपए दलाली दी गई। उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे।
– स्वीडिश रेडियो ने सबसे पहले 16 अप्रैल 1987 में दलाली का खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स कांड के नाम से जाना जाता है। इसी घोटाले के चलते 1989 में राजीव गांधी की सरकार गिर गई थी।
– ओलोफ पाल्मे की बाद में हत्या हो गई थी।

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