लोग टैक्स में छूट चाहते हैं, लेकिन हमें तो इकोनाॅमी भी देखनी पड़ती है: जेटली

नई दिल्ली. जीएसटी भंवर में है। मोदी सरकार का दूसरा आम बजट आने वाला है। सरकार बेफिक्र है। कह रही है-देश तरक्की कर रहा है। लेकिन जनता चुनाव के दौरान भाजपा के किए लुभावने वादों के पूरा होने का इंतजार कर रही है। इनकम टैक्स छूट हो या कालाधन, जीएसटी हो या महंगाई…मुद्दे कई हैं। मोदी सरकार में इकोनॉमिक फ्रंट संभाल रहे फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली से इन्हीं मुद्दों पर बात की सुजीत ठाकुर ने…
– 18 महीनों में जनता को बहुत कड़वी दवा पिला दी, मीठी दवाई कब देंगे?
जेटली : कड़वी दवाएं हमेशा बीमारी ठीक करने के लिए दी जाती हैं। बाद में इनका असर हमेशा मीठा ही रहता है। कुछ जरूरी चीजें होती हैं जो देश की इकोनॉमी के लिए माकूल होती हैं। हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। प्रोडक्शन और ग्रोथ रेट बढ़ रहा है। इसका असर लोगों की जिंदगी पर दिखेगा।
– चुनावों से पहले आपकी पार्टी इनकम टैक्स छूट की सीमा 5 लाख करने की बात कहती थी, क्या वो सिर्फ जुमला था?
जेटली : ये सही है कि लोग इन्कम टैक्स में बड़ी छूट चाहते हैं। हम इससे इनकार भी नहीं कर रहे। लेकिन हमें देश की इकोनॉमी भी देखनी पड़ती है। सरकार इसी व्यावहारिकता परख कर फैसला लेगी। बजट तक इंतजार कीजिए।
– इस बार आम बजट किसके लिए होगा? कंज्यूमर या इकोनॉमी के लिए?
जेटली : कंज्यूमर और इकोनॉमी एक-दूसरे से बंधे हुए हैं। किसी एक के बारे में सोचकर फैसले नहीं लिए जा सकते। कंज्यूमर ही सही मायनों में इकोनॉमी का प्रमुख कंपोनेंट है। अगर कंज्यूमर को खुश रखेंगे, तभी तो इकोनॉमी रफ्तार पकड़ेगी।
– जीएसटी से आम आदमी खुश क्यों हो?
जेटली : क्योंकि सबसे ज्यादा फायदा आम आदमी को ही होगा। हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा। टैक्स चोरी रुक जायेगी। कंपनियों का झंझट और खर्च भी कम होगा। कारोबारियों को सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। ये देश के डेवलपमेंट के लिए क्रांतिकारी कदम होगा।
– विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि आपकी सरकार तो कॉरपोरेट की सरकार है?
जेटली : जनधन योजना, बीमा योजना, मुद्रा बैंक कॉरपोरेट के लिए हैं? सबका साथ, सबका विकास नारा ही नहीं, सोच भी है। क्या इसमें गरीब नहीं आते? छोटे रोजगार करने वाले नहीं आते? पहले रेहड़ी लगाने वाले, छोटी-मोटी दुकान चला कर रोजगार करने वाले बैंक से लोन ले सकते थे क्या? बैंक में गरीब व्यक्ति खाता खुलवा सकता था क्या?
– कालाधन भी तो आपका एजेंडा था! उसके नतीजे क्यों नहीं मिले?
जेटली : काले धन के मुद्दे पर हमारी सरकार पूरी तरह न सिर्फ गंभीर है बल्कि गंभीरता से काम भी हो रहा है। नतीजे आ रहे हैं पर कानूनी नजरिए से ये बातें मौजूदा समय में साझा करना उचित नहीं है।
– 18 महीनों में कितना एफडीआई बढ़ा? उम्मीद से ज्यादा या कम?
जेटली : सरकार बनने के बाद 24% एफडीआई बढ़ा है। देश में एफडीआई करीब 40 खरब 58 अरब रुपए हो गया है। ग्रीनफिल्ड प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट भी बढ़ा है। लेकिन यहां बात उम्मीद की नहीं, दिशा की है। यदि दिशा सही हो तो नतीे आते ही हैं और देश ये देख भी रहा है।
– कितना बदला देश का इकोनॉमिक्स?
जेटली : बदलाव तो कई आए हैं। कुछ नजर आने लगे हैं और कुछ जल्द दिखेंगे। करप्शन 100% रुका है। पहले देश निराशा के दौर से गुजर रहा था, आज उम्मीद से भरा है। उद्योग जगत से लेकर छोटे कारोबारी वाले तक उम्मीदों से भरे हुए हैं। हम ही नहीं, दुनियाभर की तमाम एजेंसियां भारत के तेज गति से तरक्की करने के अनुमान जता रही हैं।
– ‘अच्छे दिन आएंगे’ नारे का क्या हुआ?
जेटली :18 महीनों में एक भी घपला-घोटाला नहीं हुआ। पेट्रोल के दाम गिरे। महंगाई कंट्रोल में है। विश्व स्तर पर देश की साख बनी है। क्या मई 2014 के पहले ऐसा था? नहीं। अब हुआ।