विधानसभा चुनाव: त्रिपुरा में 25 साल से BJP का खाता नहीं खुला, इस बार 51 सीटों पर CPM को चुनौती

अगरतला.नॉर्थ-ईस्ट के त्रिपुरा में 18 फरवरी को, मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को वोटिंग है। बीजेपी पहली बार इन तीन राज्यों में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही है। यही वजह है कि इन राज्यों मे सत्तापक्ष को इस पार्टी से सीधे चुनौती मिल रही है। बीजेपी के 25 से ज्यादा केंद्रीय मंत्री यहां कैम्पेन कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को त्रिपुरा में 2 चुनावी रैलियां कीं।

24 से ज्यादा मंत्री और 100 से सांसद कैम्पेन में उतरे

– बीजेपी ने त्रिपुरा में वाममोर्चा के लाल किले पर कब्जा करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है।

– बीजेपी की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, करीब दो दर्जन केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, वरिष्ठ नेता और 100 से ज्यादा सांसद, विधायक यहां लगातार जनसंपर्क और रैलियां कर रहे हैं।

– त्रिपुरा में बंगाली हिंदू आबादी में करीब 70% नाथ योग संप्रदाय के वोटर हैं। अगरतला में नाथ मंदिर भी है। इन्हें लुभाने के लिए यूपी के सीएम योगी ने यहां दो दिन रोड शो और जनसभाएं की हैं।

बीजेपी को मिला आईपीएफटी का साथ
– बीजेपी राज्य में क्षेत्रीय दल इंडिजीनियस पीपुल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी 60 में से 51 सीटों पर और आईपीएफटी 9 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। आईपीएफटी काफी वक्त से अलग आदिवासी बहुल त्रिपुरालैंड राज्य बनाने की मांग करती रही है।

– बीजेपी के चुनाव प्रचार की कमान असम के मंत्री और नाॅर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (नेडा) के संयोजक डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा संभाल रहे हैं। इससे पहले वह मणिपुर और असम विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

माणिक सरकार की इमेज साफ-सुथरी
– त्रिपुरा में पिछले 25 साल से माकपा की सरकार है। पर इस बार उसे अपना गढ़ बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि सीएम माणिक सरकार की राज्य में साफ-सुथरी छवि और व्यक्तित्व बीजेपी के प्रयासों पर भारी पड़ रहा है।

– माणिक 20 साल से राज्य में सीएम हैं। इसीलिए बीजेपी सीएम पद के लिए किसी नाम की घोषणा से बच रही है। पिछले पांच विधानसभा चुनावों में माकपा को चुनौती देने वाली कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस इस बार हाशिए पर हैं।

– बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है। तृणमूल के 6 विधायक चुनाव से पहले ही बीजेपी में शामिल हो गए थे, इसलिए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी इस बार त्रिपुरा चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रही हैं।

माकपा का कैडर बेहद मजबूत

– पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तुलना में त्रिपुरा की राजनीति थोड़ी अलग है। यहां सीएम माणिक सरकार की स्वच्छ छवि की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ हर पंचायत तक पहुंचा है। इसके साथ माकपा का संगठन हर गांव तक फैला है। सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता की जांच पंचायत स्तर के पदाधिकारी करते हैं। हर महीने योजनाओं की समीक्षा होती है। इसमें जरूरतमंदों की सूची तैयार होती है।

संघ ने आदिवासियों में पैठ बनाई

– पिछले 4 साल में बीजेपी का जनाधार राज्य के मूल आदिवासियों के बीच बढ़ा है। इसकी वजह संघ है। दरअसल, बांग्लादेश से आकर बसे बंगालियों की वजह से मूल आदिवासी अल्पसंख्यक हो गए हैं। संघ से जुड़े एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम आदि संगठन इन आदिवासियों के बीच पिछले कई साल से काम कर रहे हैं। इसके चलते बीजेपी को आदिवासी इलाके में काफी कार्यकर्ता मिल गए हैं।

पुरुषों से आगे हैं महिलाएं

– पिछले दो विधानसभा चुनाव में महिलाएं राज्य में वोटिंग के मामले में पुरुषों से आगे रही हैं।

– 2013 में 91.82% वोटिंग हुई थी। महिलाओं की वोटिंग 92.94%, जबकि पुरुषों की वोटिंग 90.73% रही थी। 2008 में 91.22% वोटिंग हुई थी। इसमें पुरुषों की वोटिंग 90.74% और महिलाओं की 91.72% रही थी। राज्य में 5 चुनावों में हर बार 78% से ज्यादा वोट पड़े। सर्वाधिक 91% वोटिंग पिछले चुनाव में हुई थी।

जातिगत समीकरण: 25 साल वोटर है जिनमें 70% बंगाली और अन्य

– त्रिपुरा देश का तीसरा सबसे छोटा राज्य है। 20 सीटों पर आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।
– 30 सीटें आरक्षित हैं। 10 एससी, 20 एसटी, 30 सामान्य सीटें हैं। 2013 विधानसभा चुनाव में भाजपा राज्य की 50 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। 49 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई।

– मुद्दे:बेरोजगारी, ट्रांसपोर्ट्स, इंडस्ट्री की कमी, भ्रष्टाचार। रोज वैली चिट फंड घोटाला, सरकार की हिंदू विरोधी नीति।

5 चुनाव और 25 साल में त्रिपुरा का चुनावी गणित

साल माकपा कांग्रेस बीेजपी अन्य
2013 49 10 00 01
2008 46 10 00 04
2003 38 13 00 09
1998 38 13 00 09
1993 44 10 00 06

#मेघालय: पहली बार बीजेपी V/S कांग्रेस

निर्दलियों को पिछली बार 27%वोट मिले, 13 विधायक बने थे, इस बार 84 मैदान में​

– मेघालय में इस बार मुख्य मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच है। राज्य में हर चुनाव में निर्दलीय बड़ी तादाद में जीतते हैं। पिछली बार 13 जीते थे। 27% वोट उन्हें मिले थे। इस बार 84 निर्दलीय कैंडिडेट मैदान में हैं।

– यहां 372 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। 32 महिला हैं। राज्य में करीब 75% वोटर ईसाई समुदाय के हैं। बीजेपी राज्य की 47 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बाकी की 13 सीटें क्षेत्रीय दलों को दे रखी हैं।

– 2013 के चुनाव में बीजेपी को 2 सीटें मिली थीं। चुनाव से पहले बीजेपी में 5 विधायक शामिल हुए हैं। कांग्रेस के 29 विधायक हैं।

– मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा लगातार 4 बार से विधायक हैं। कांग्रेस ने केरल के पूर्व सीएम ओमान चांडी और बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री के अल्फोंस को चुनाव की कमान दी है।

#नगालैंड: बीजेपी ने 15 साल का साथ छोड़ा

पूर्व सीएम नेफ्यू रियो वोटिंग से पहले ही चुनाव जीत गए, सीएम फेस बन सकते हैं

– नगालैंड के पूर्व सीएम और एनडीपीपी नेता नेफ्यू रियो वोटिंग से पहले ही निर्विरोध जीत गए हैं। बीजेपी और एनडीपीपी गठबंधन उन्हें सीएम कैंडिडेट घोषित कर सकता है। रियो नॉर्दर्न अंगामी-2 सीट से चुनाव लड़ रहे थे।

– रियो हाल ही में एनपीएफ से एनडीपीपी में शामिल हुए थे। वह 3 बार नगालैंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

– नगालैंड की 59 सीटों पर 27 को वोटिंग हैं। इन पर 195 उम्मीदवार हैं। इनमें 5 महिलाएं शामिल हैं।
– बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले एनपीएफ से 15 साल पुराना नाता तोड़कर एनडीपीपी से गठबंधन किया है। एनडीपीपी 40 और बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एनपीएफ 59 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। सीएम टीआर जेलियांग 7-पेरेन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मंत्री किरण रिजिजू बीजेपी के चुनाव प्रभारी हैं।

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