वियतनाम को डिफेंस के लिए 3300 करोड़ की मदद देगा भारत: मोदी ने कहा- युद्ध ने आपको दुनिया से दूर किया, बुद्ध ने भारत से जोड़ा

हनाेई.नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चीन से पहले वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे। 15 साल बाद किसी इंडियन पीएम का वियतनाम दौरा हुआ। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी हनोई गए थे। मोदी ने वियतनाम को डिफेंस के लिए 50 करोड़ डॉलर (करीब 3300 करोड़ रु.) देने का एलान किया है। शनिवार को वियतनाम के पीएम नगुएन जुआन फुक के साथ डेलिगेशन लेवल की बातचीत के बाद मोदी बौद्ध मंदिर कुआंग सू पगोडा पहुंचे। उन्होंने कहा, ”युद्ध ने आपको दुनिया से दूर किया। बुद्ध ने आपको भारत से जोड़ दिया।” बता दें कि वियतनाम की एक बार अमेरिका के साथ साठ के दशक में जंग हुई थी। इसके बाद तीन बार उसकी चीन के साथ जंग हो चुकी है।
चीन जाएंगे मोदी…
– यहां से मोदी जी-20 समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के हांगझोउ शहर को रवाना हो जाएंगे।
– भारत-वियतनाम ने डिफेंस, आईटी, स्पेस, डबल टैक्सेशन और समंदर में इन्फॉर्मेशन को लेकर 12 समझौते साइन किए।
– मोदी और वियतनामी काउंटरपार्ट नगुएन जुआन फुक की मौजूदगी में दोनों देशों के ऑफिशियल्स ने एग्रीमेंट्स पर साइन किए।
– वियतनाम ने एयर और डिफेंस प्रॉडक्शन में खासा इंटरेस्ट दिखाया है। भारत की एलएंडटी कंपनी वियतनामी कोस्ट गार्ड्स के लिए हाईस्पीड पैट्रोलिंग बोट्स बनाएगी।
– भारत और वियतनाम नेवी एक-दूसरे से शिपिंग इन्फॉर्मेशन भी साझा करेंगी।
कुआंग सू पगोडा में क्या बोले मोदी?
– वियतनाम में मोदी 1000 साल पुराने बौद्ध मंदिर कुआंग सू पगोडा पहुंचे।
– मोदी ने कहा, ”1959 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद यहां आए थे। 57 साल बाद मुझे आने का मौका मिला। युद्ध का मार्ग कुछ लोगों को कुछ वक्त के लिए रुतबा दिखाने का मौका देता है। लेकिन बुद्ध का मार्ग शांति दिखाता है, शांति देता है।”
– ”आज भी जो अशांति, आतंक के मार्ग पर जा रहे हैं, उनको वियतनाम सीख देता है कि वे बुद्ध के संदेशों से बड़ा परिवर्तन ला पाए। बम-बंदूक वाले वियतनाम से सीखें जो बुद्ध के रास्ते पर चला।”
– ”दोनों देशों की रिलेशनशिप 2000 साल पुरानी है। कुछ लोग यहां युद्ध करने आए, हम यहां शांति का संदेश लेकर आए। युद्ध ने आपको दुनिया से दूर किया, बुद्ध ने आपको भारत से जोड़ दिया।’
– ”मैं आपका यजमान हूं, आपको निमंत्रण देता हूं कि भगवान बुद्ध की धरती पर आइए। मेरा सम्मान किया, इसके लिए आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।”
इन मुद्दों पर भी समझौते
– दोनों देशों के बीच हेल्थ, साइबर सिक्युरिटी, कॉन्ट्रैक्ट एंड डिजाइन, इक्विपमेंट सप्लाई और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर भी समझौते हुए।
– दोनों देशों ने ये भी तय किया 2017 में ‘द इयर ऑफ फ्रेंडशिप’ भी मनाया जाएगा।
अब तक किससे मिले मोदी?
– 20वीं सदी के टॉप लीडर्स में से एक एक्स-पीएम हो चि मिन्ह को श्रद्धांजलि देने उनकी कब्र पर पहुंचे।
– मोदी का वियतनाम के प्रेसिडेंशियल पैलेस में ग्रैंड वेलकम हुआ।
– यहां मोदी वियतनाम के प्राइम मिनिस्टर गुएन शुआन फुक और प्रेसिडेंट ट्रॉन दाई क्वांग से मिले।
– एक्स पीएम हो चि मिन्ह के नाम से मशहूर अंकल हो पौन्ड में मोदी ने मछलियों को दाना खिलाया।
– इसके बाद प्रेसिडेंशियल पैलेस में भारत-वियतनाम डेलिगेशन लेवल बातचीत हुई।
– मोदी हनोई में मौजूद बौद्ध मंदिर कुआम सू पगोडा गए।
चीन को पीओके का जवाब है मोदी का वियतनाम दौरा
– क्यों अहम है यह दौरा?
– चीन-वियतनाम के बीच 3 बार जंग हो चुकी है। साउथ चाइना सी में भारत वियतनाम के साथ ऑयल एक्सप्लोरेशन कर रहा है। चीन को एतराज है।
– अभी हाल में हेग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज किया है। चीन भी इस फैसले को यह कहते हुए खारिज कर चुका है कि उसके लिए यह सिर्फ कागज का टुकड़ा है। हमारा 50 फीसदी समुद्री कारोबार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में, भारत तेल और गैस की खोज जारी रख सकता है।
– डिप्लोमैटिक मायने क्या हैं?
– भारत की तरह वियतनाम भी चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर परेशानियां झेलता रहा है। वहीं, चीन पाकिस्तान का समर्थन कर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ऐसे हालात में वियतनाम के साथ दोतरफा रिश्तों को मजबूत करना भारत की खास पहल मानी जाएगी।
– चीन के लिए क्या मैसेज छिपे हैं?
– जिस तरह पीओके को लेकर चीन पाकिस्तान का साथ देता रहता है, भारत भी उसी तर्ज पर जवाब देने के लिए वियतनाम से रिश्ते मजबूत कर रहा है। भारत डिफेंस एग्रीमेंट्स के जरिए वियतनाम की रक्षा पंक्ति को मजबूत करेगा। यह ठीक उसी तरह का होगा, जैसे चीन हमेशा पाकिस्तान की मदद करता रहा है। एनएसजी में भारत को चीन का विरोध सहना पड़ा। ऐसे समय में भारत वियतनाम के जरिए चीन को कड़ा मैसेज देना चाहता है।
वियतनाम की दो-तिहाई जनता का भारत पर भरोसा
– वियतनाम पर भारत का असर तेजी से बढ़ रहा है। प्यू ग्लोबल रिसर्च के एक सर्वे के मुताबिक, वियतनाम की करीब दो-तिहाई आबादी (66%) भारत के पक्ष में है। 18 से 29 साल के 72 फीसदी लोगों को भारत पर भरोसा है। सिर्फ 19% लोग चीन के पक्ष में हैं।