शिवराज ने अनाथ हुई बेटी को बनाया बहन

भोपाल : ग्वालियर की स्नेहलता के आंसू थम नहीं रहे हैं, क्योंकि उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा ने उसके हंसते- खेलते परिवार को तहस-नहस कर दिया है। तीर्थयात्रा पर गए उसके माता-पिता लापता हो गए हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माता-पिता खो चुकी स्नेहलता को बहन की तरह हर संभव मदद का ऐलान किया है। स्नेहलता के माता-पिता तीर्थयात्रा पर उत्तराखंड गए थे, आपदा में वे दोनों खो गए। माता-पिता का पता न चलने पर स्नेहलता ग्वालियर से उत्तराखंड की ओर कूच कर गई। कई दिन तक वह उत्तराखंड में भटकी मगर कोई पता नही चंला। वह अपनों को तलाषते हुए मध्य प्रदेश सरकार के हरिद्वार में लगाए गए राहत शिविर तक जा पहुंची। वहां भी हाथ खाली रहे तो उसने उत्तराखंड में रहकर माता-पिता की खोज जारी रखने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उत्तराखंड राज्य सरकार की व्यवस्थाओं का जायजा लेने रविवार को हरिद्वार पहुंचे तो उन्हें स्नेहलता के बारे में पता चला। चौहान ने स्नेहलता केा समझाया और भरोसा दिलाया कि वे उसकी हर संभव मदद करेंगे। आखिरकार स्नेहलता ने चौहान के साथ विशेष विमान से भोपाल आने के लिए हामी भर दी।

सोमवार को विमान से जैसे ही स्नेहलता भोपाल पहुंची उसकी अंस्रुधारा एक बार फिर फूट पड़ी। वह चौहान से लिपट का खूब रोई। चौहान व उनकी पत्नी साधना सिंह ने स्नेहलता को भरोसा दिलाया कि वह अपने अकेला न समझा, सभी उसके साथ है। चौहान का कहना है कि स्नेहलता और उसकी एक छोटी बहन है, दोनों के जीवन में कोई परेशानी न आए इसका ख्याल सरकार रखेगी। वे खुद दोनों बहनों की भाई की तरह ब्याह कराएंगे। इतना ही नहीं, स्नेहलता को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

चौहान ने बताया है कि फिलहाल दो दिन के लिए स्नेहलता को मुख्य सचिव के घर रखा जाएगा, उसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण होगा और फिर उसे ग्वालियर भेजा जाएगा। वे कहते हैं कि लड़का हो तो वह आसानी से जीवन जी लेता है, मगर लड़की के लिए ऐसा कर पाना आसान नहीं होता। स्नेहलता को मुख्यमंत्री से मिले भरोसे ने हालात से लड़ने की ताकत जरूर दी होगी, मगर उसे अपने अंदर वह हौसला पैदा करना होगा जो भविष्य को संवारने के लिए जरूरी है। (एजेंसी)

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