शुरू हुई दहेज-घोघा रो रो फेरी सेवा, मोदी बोले- UPA ने विकास पर लगा दिया था प्रतिबंध

भावनगर.सवा महीने में पांचवीं बार गुजरात पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को 650 करोड़ की लागत वाले घोघा-दहेज रो रो फेरी सेवा के पहले चरण का उद्घाटन किया। मोदी ने दावा किया कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए अपनी तरह की पहली परियोजना है। मोदी इसी फेरी से दहेज पहुंचे। यहां उन्होंने पी फॉर पी यानी पोर्ट्स फॉर प्रॉस्पेरिटी का मंत्र देते हुए कहा कि देश में विकास के लिए बंदरगाहों का विकास जरूरी है। बंदरगाह की सागरमाला परियोजना से एक करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।
2035 तक की जरूरतों के मुताबिक इसकी 400 परियोजनाओं में आठ लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब हमें केंद्र सरकार से शत्रुतापूर्ण रवैये का सामना करना पड़ता था। उद्योगों और राज्य की प्रगति को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए। पिछले तीन वर्षों में हमने इसे बदल दिया है।” मोदी ने फिर कहा कि नोटबंदी और जीएसटी समेत तमाम सुधारों और कड़े फैसलों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है। पीएम ने दिव्यांग बच्चों के साथ समुद्र में यात्रा भी की और वडोदरा में रोड शो भी किया।
फेरी सेवा से 360 किमी की दूरी घटकर 31 किमी हो गई
– दक्षिण गुजरात के दहेज और सौराष्ट्र के घोघा के बीच सड़क के रास्ते करीब 360 किमी की दूरी है। रो रो फेरी सेवा के जरिए यह दूरी समुद्री रास्ते से घटकर 31 किमी हो जाएगी। इससे 7 घंटे की यात्रा एक घंटे में हो सकेगी। एक जहाज यानी फेरी पर 100 वाहन (कार, बस और ट्रक) और 250 यात्री सफर कर सकेंगे। हालांकि अभी सिर्फ फेरी सेवा (यात्रियों का आवागमन) की शुरुआत हुई। दूसरे चरण में घोघा में 96 मीटर लंबा और दो मीटर चौड़ा लिंक स्पान बनने के बाद माल वाहक सेवा रो-रो शुरू होगी। इस परियोजना की नींव मोदी ने ही गुजरात सीएम रहते 2012 में रखी थी।
कांग्रेस सरकारों पर हमला : उद्योगों को पर्यावरण के नाम पर बंद करने की धमकी दी
– यूपीए सरकार ने वापी से कच्छ के मांडवी तक विकास पर प्रतिबंध लगा दिया। उद्योगों को पर्यावरण के नाम पर बंद करने और विकास पर ताला लगाने की धमकी दी गई। मुख्यमंत्री रहते गुजरात के विकास के लिए मुझे कितना संघर्ष करना पड़ा है, यह मैं ही जानता हूं।
– रो रो सेवा के लिए यूपीए सरकार ने शर्त रखी कि सर्विस चलाने वाली कंपनी ही पोर्ट बनाएगी। ऐसा संभव है क्या? क्या ट्रेन चलाने वाले को पटरियां बिछाने, बस चलाने वाले को सड़क या बस स्टॉप बनाने के लिए कहा जाता है क्या? हमने तय किया कि सरकार अपने खर्च पर पोर्ट बनाएगी।
– 7500 किमी का समुद्री तट, 14500 किमी का इंटरनल वाटर वे है। पहले की सरकार समझ ही नहीं सकी कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है। पहली पोर्ट पॉलिसी 1995 में बनी। देश को अरबों-खरबों का आर्थिक नुकसान हुआ। देश में सिर्फ 6 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं, हम 106 नए जलमार्ग पर काम कर रहे हैं।
मुझे कह नहीं सकते, चुनाव आयाेग पर निशाना साध रहे विरोधी
 वड़ोदरा में रोड शो से पहले रैली में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, मैं दीपावली पर वडोदरा क्यों आया हूं, इस पर लोगों के पेट में दर्द है। मुझे तो कुछ कह नहीं सकते। इसलिए चुनाव आयोग पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन मैं उनको कहना चाहता हूं कि उनको आयोग पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं है। मोदी ने राज्यसभा चुनावाें का जिक्र भी किया।
फेरी का सियासी अर्थ : भाजपा-पाटीदारों के बीच की दूरी घटेगी
फेरी सर्विस सौराष्ट्र आैर दक्षिण गुजरात का ही नहीं, बल्कि भाजपा आैर पाटीदारों के बीच का अंतर भी कम करेगी। सूरत के हीरा उद्योग पर सौराष्ट्र के पाटीदारों का नियंत्रण है। पाटीदाराें ने भाजपा के कई कार्यक्रमों में उग्र विरोध प्रदर्शन किया था। कपड़ा उद्योग में भी इस समुदाय की पैठ होने से जीएसटी के खिलाफ भी विरोध हुआ था। इसलिए सर्विस को पाटीदारों के भाजपा के प्रति असंतोष को कम करने के प्रयास बतौर देखा जा रहा है।
व्यापार : हीरा में 900, कपड़े में 350 करोड़ का बिजनेस बढ़ेगा
फेरी सर्विस होने से रोजाना 10 हजार लोगों के एक लाख मानव घंटों की बचत होगी। रोजाना एवरेज पांच हजार लोग सौराष्ट्र से दक्षिण गुजरात में आवाजाही करते हैं। फेरी सेवा प्रारंभ होने से हीरा उद्योग सूरत से सौराष्ट्र की आेर स्थानांतरित होगा। सौराष्ट्र के लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। एक अनुमान के मुताबिक फेरी सेवा से हीरा उद्योग को 900 करोड़ रुपए का आैर कपड़ा उद्योग को 350 करोड़ का लाभ होगा।
दक्षिण गुजरात में स्थित टेक्सटाइल उद्योग से जॉब वर्क के लिए रोजाना करोड़ों रुपए का सामान सौराष्ट्र की आेर जाता है। जॉब वर्क होने के बाद यह दोबारा सूरत वापस आता है। सूरत से सौराष्ट्र की इस दूरी को तय करने में कम से कम 14 से 16 घंटे का समय लगता है। साथ ही लागत भी काफी आती है। फेरी सर्विस होने से जॉब वर्क भी सौराष्ट्र की ओर डायवर्ट होगा।