समुद्र ने हिंदुस्तान के इतिहास को आकार दिया, अब ये हमारे भविष्य की कुंजी है: शांगरी-ला डायलॉग में मोदी

सिंगापुर.नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय समुद्र विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृति को जोड़ता है। हिंद महासागर ने ही भारत के ज्यादातर इतिहास को आकार दिया और अब ये हमारे भविष्य की कुंजी है। समुद्र के रास्ते भारत का 90% कारोबार होता है और ये हमारी ऊर्जा का स्रोत है। ये वैश्विक व्यापार के लिए भी लाइफ लाइन है।

समुद्र हमारे रिश्तों का भविष्य है

– मोदी ने कहा, ”वैदिक काल से भारत की सोच में समुद्रों का अहम स्थान रहा है। वेदों में वरुण को अहम स्थान दिया गया है, जो समुद्रों और जल के देवता हैं। भारत का जिक्र भी वेदों में समुद्र का वर्णन करते हुए दिया गया है। यही समुद्र हमारे रिश्तों का भविष्य है।”

– ”मल्लका पोर्ट और दक्षिण चीन समुद्र हमें प्रशांत महासागर से जोड़ता है और साथ ही हमारे सबसे अहम सहयोगियों से भी। 3 साल पहले मैंने मॉरिशस में सागर के जरिए हमारा उद्देश्य समझाया था। सागर मतलब सिक्युरिटी, ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन।”

हिंद महासागर से भारत के इतिहास को आकार मिला

– मोदी ने कहा, ”हिंद महासागर ने ही भारत के ज्यादातर इतिहास को आकार दिया और अब ये हमारे भविष्य की भी कुंजी है। समुद्र के रास्ते भारत का 90 फीसदी कारोबार होता है और ये हमारी ऊर्जा का स्रोत है। ये वैश्विक व्यापार के लिए भी लाइफ लाइन है।”
– ”हजारों सालों से हम पूर्व की तरफ झुकते आए हैं। ये केवल सूर्योदय देखने के लिए नहीं है, बल्कि उस रोशनी की पूजा करने के लिए है, जो पूरी दुनिया पर फैली है। अब इंसान उभरते हुए पूर्व की ओर देख रहे हैं, उन उम्मीदों के साथ, जो पूरे विश्व के लिए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि विश्व का भविष्य इंडो-पैसेफिक रीजन में होने वाले विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है।”

आसियान के लिए सिंगापुर हमारा अहम पड़ाव

– प्रधानमंत्री ने कहा, ”आसियान के लिए सिंगापुर ही हमारा अहम पड़ाव रहा है। सदियों से सिंगापुर हमारे लिए पूर्व के लिए प्रवेश द्वार रहा है। सभी दक्षिण एशियाई देशों के साथ हमारे राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं। भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ रहा है। व्यापार बढ़ रहा है। दोनों देशों ने अपने मसलों को सुलझाने में समझदारी का प्रदर्शन किया है और सीमाओं को शांतिपूर्ण रखने में सफल हुए हैं। रूस के साथ हमारी सैन्य स्वायत्तता को लेकर इंडिया फर्स्ट की कूटनीतिक साझेदारी मजबूत हुई है और ये विशेष है।”

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