सर्जिकल स्ट्राइक पर दुनिया में किसी ने सवाल नहीं उठाया

वॉशिंगटन.अमेरिका दौरे के पहले दिन नरेंद्र मोदी ने रविवार को वर्जीनिया में इंडियन कम्युनिटी को सम्बोधित किया। मोदी ने कहा, ”पीएम बनने के बाद आपने मेरे लिए इतने बड़े प्रोग्राम किए कि दुनिया के लिए ये मेरी पहचान बन गए। हमारी सरकार पर 3 साल में कोई दाग नहीं लगा। पहले आतंकवाद की परेशानी को कोई मानने को तैयार नहीं था, लेकिन अब खुद आतंकियों ने कई देशों को इसे समझा दिया। दुनिया ने हमारी सर्जिकल स्ट्राइक की ताकत देखी, पर किसी ने सवाल नहीं उठाए, जिन्हें भुगतना पड़ा उन्हें छोड़कर।” अपनी स्पीच में मोदी ने विदेश मंत्रालय के कामकाज को लेकर सुषमा स्वराज की तारीफ की। इस प्रोग्राम में करीब 600 लोग शामिल हुए। यहां मोदी के लिए खास लंच रखा गया। सोमवार को उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रम्प से होगी।
वर्जीनिया में मोदी की स्पीच 16 प्वाइंट्स…
1) आप से मिलकर नई ऊर्जा भर जाती है
– मोदी ने कहा, ”अमेरिका में बसे हुए मेरे सभी परिवार के लोग। परिवार के लोगों से मिलने का जो आनंद होता है, वो आनंद मैं जब-जब आपसे मिलता हूं, अनुभव करता हूं। ऊर्जा, नई उमंग-उत्साह आप मुझमें भर देते हैं। फिर मुझे आज वो मौका मिला है।”
– ”पिछले 20 साल में कई बार मुझे अमेरिका आने का मौका मिला। जब सीएम नहीं था, पीएम नहीं था, तब अमेरिका के करीब 30 स्टेट्स का मैंने भ्रमण किया। हर बार किसी ना किसी स्वरूप में यहां बसे हुए आप सब परिवारजनों से मिलने का मौका मिलता रहा।”
2) अमेरिका के प्रोग्राम मेरी पहचान बन गए
– ”पीएम बनने के बाद आपने इतने बड़े प्रोग्राम किए, जिसकी गूंज आज भी दुनिया में सुनाई दे रही है। न सिर्फ अमेरिकी लीडर्स, दुनिया के नेता भी जब मिलते हैं, तो उनके दिमाग में मेरी पहचान अमेरिका के उसी इवेंट से शुरू होती है। ये सब आप ही लोगों का कमाल है।”
– ”मैं जानता हूं कि अमेरिका में रहते हुए इस तरह की चीजें ऑर्गनाइज करने में कितनी मेहनत लगती है। उसके बावजूद आप इसको सफल बनाते हैं। इस बार की यात्रा में मैं ज्यादातर लोगों को नाराज करके जाने वाला हूं। कई दबाव और सुझाव थे कार्यक्रमों के। आपका भी मन था बड़ा कार्यक्रम करने का। मैं आज उन लोगों से मिलकर दर्शन करना चाहता हूं, जिन्होंने मेरे पिछले कार्यक्रमों के लिए मेहनत की। समय, धन दिया, निजी कार्यक्रम बदले।”
3) आप हर पल अपने देश के बारे में सोचते हैं
– ”एक तरह से यहां मैं जो स्वरूप देख रहा हूं, उसमें लघु भारत भी है और लघु अमेरिका भी है। हिंदुस्तान में जब कुछ बुरा होता है तो सबसे पहले आपकी नींद खराब होती है। ये इसलिए होता है कि आपका दिल हर पल चाहता है कि मेरा देश ऐसा कब बनेगा। मेरा देश कैसे बढ़ेगा। मैं विश्वास दिलाता हूं कि जो सपने आपने देखे हैं, वो आपके रहते पूरे होंगे।”
4) हिंदुस्तान में भी आपके जैसे सवा करोड़ लोग
– “अनुकूल वातावरण मिलते ही आप इतने फले-फूले कि अमेरिका के फलने-फूलने में सहायक बन गए। उसी भारतीय की ताकत से अमेरिका और खुद की विकास यात्रा चलती रही। आपके जैसा ही सामर्थ्य रखने वाले, बुद्धि और प्रतिभा वाले सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी बैठे हैं। वे भी आप जैसे ही हैं। उन्हें अनुकूल वातावरण मिला तो वो सवा सौ करोड़ भारतीय कितनी जल्दी देश बदल देंगे, उसका अंदाजा हम-आप लगा सकते हैं।”
5) हिंदुस्तान में हर कोई, कुछ करना चाहता है
– “सबसे बड़ा परिवर्तन जो मैंने महसूस किया है कि हर कोई कुछ करना चाहता है और कुछ ना कुछ कर रहा है, इस संकल्प के साथ कि मेरा देश आगे बढ़े। जब सवा सौ करोड़ देशवासियों का जज्बा, इरादा, कश्मीर से कन्याकुमारी तक अनुभव होता हो, तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि पिछले कई सालों तक जो रफ्तार नहीं था, उससे तेज गति से देश आज आगे बढ़ रहा है।”
6) भ्रष्टाचार के चलते सरकारें बदल गईं
– “इन दिनों भारत में जिन विषयों पर सरकारें बदनाम होती रहीं और बदलती रहीं, उसका कारण ये नहीं था कि किसी को कुछ चाहिए था और मिला नहीं। असंतोष का कारण वो नहीं था। भारत का आम आदमी, जैसे आप लोगों में संतोष का संस्कार है। जवान बेटा मर जाएगा तो मां-बाप कहेंगे कि ईश्वर की इच्छा थी। ये हमारे सोचने की प्रकृति है। सरकारें बदलने की बड़ी वजह है भ्रष्टाचार, बेईमानी। देश के आम आदमी को नफरत है। 3 साल में अब तक इस सरकार पर दाग नहीं लगा।”
7) व्यवस्था ऐसी हो जो ईमानदारी पैदा करे
– “सरकार चलाने में भी ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं कि व्यवस्था ऐसी बने कि ईमानदारी पैदा हो। टेक्नोलॉजी इसमें बहुत बड़ा योगदान बढ़ रहा है। सामान्य आदमी का स्वभाव अच्छा है तो वो उस रास्ते पर जाना पसंद करता है, सिस्टम में जिम्मेदारी की भावना आती है। हमने देश के आम आदमी को सामान्य आदमी को मिलने वाले फायदों को डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीम में कन्वर्ट किया।”
8) गैस सब्सिडी के 3 करोड़ घोस्ट क्लाइंट थे
– “भारत में गैस सब्सिडी देते हैं। कानून एक होता है, गरीब से गरीब को भी सब्सिडी जाती है और अमीर से अमीर को भी जाती है। मैंने रिक्वेस्ट की लोगों से कि भाई अगर आपको ईश्वर ने कुछ दिया है तो आप ये सब्सिडी क्यों लेते हैं? आपका एक दिन का जेब खर्च भी इससे ज्यादा होता है। देश के सामान्य आदमी के दिल में देश को आगे बढ़ाने की इच्छा है। वो अपने आपको भागीदार बनाना चाहता है, नेतृत्व करना चाहता है। हमने सब्सिडी सरकार के खजाने में डाल दी। हमने कहा कि ये हम उन गरीब परिवारों को देंगे, जो लकड़ी का चूल्हा जलाते हैं, मेहनत करते हैं।
– “मेहनत होती है, लेकिन ट्रांसपेरेंसी नया विश्वास पैदा करती है। हमने बीड़ा उठाया है कि आने वाले 3 साल में 5 करोड़ गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देंगे, लकड़ी के चूल्हे से मुक्त करेंगे। अभी 11-12 महीनों में करीब 1 करोड़ से ज्यादा परिवारों में हमने सिलेंडर पहुंचा दिए। सब्सिडी देते थे, उसमें बदलाव किया। पहले जो बेचता था, उसे सब्सिडी जाती थी, हमने वो बंद करके, जिसके घर पर जाता है, उसे सब्सिडी दे दी। 3 करोड़ सब्सिडी के घोस्ट क्लाइंट थे, लेकिन खातों में डायरेक्ट पैसा जाने की वजह से वो बच गया और गांवों में स्कूल बन रहा है उस पैसे से।
9) दो साल से यूरिया के लिए किसी सीएम की चिट्ठी नहीं आई
– “आज हिंदुस्तान टेक्नोलॉजी को बल देते हुए व्यवस्थाओं को विकसित कर रहा है। हमारे देश में जो लोग लगातार भारत की चीजों को देखते हैं, जब खेती का सीजन आता है तो यूरिया को पाना मुश्किल होता था। मैं सीएम था तो भारत सरकार को लगातार चिट्ठी लिखता था यूरिया के लिए। जब पीएम बना तो सीएम भी मुझे ऐसी ही चिट्ठी लिखने लगे। पिछले 2 साल से एक भी सीएम यूरिया के लिए मुझे चिट्ठी नहीं लिखता है। कहीं यूरिया की कमी नहीं है, कतारें नहीं है। पहले रात-रात भर कतारें लगाते थे, सोते थे खुले में। हमने रातोंरात यूरिया के कारखाने नहीं लगाए। रातोंरात उत्पादन नहीं बढ़ा। यूरिया की हमने नीम कोटिंग कर दी।”
– ”नीम के पेड़ की फली निकलती है, उसका तेल डाल दिया। यूरिया में सब्सिडी मिलती है किसानों को। सालाना 80 हजार करोड़ रुपया सब्सिडी मिलती है। पहले यूरिया केमिकल फैक्ट्री में चला जाता था। यूरिया का कोई दूसरा प्रोडक्ट बनाकर ज्यादा मुनाफा कमा लेते थे। नीम कोटिंग के बाद यूरिया का एक ग्राम भी किसी और काम में नहीं लग पाता है। नीम कोटिंग के कारण यूरिया की ताकत बढ़ गई, जो जमीन में सुधार लाता है। 5-7% तक प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी हुई। सब्सिडी कम हुई, किसान की दिक्कत कम हुई, उत्पादन बढ़ा। ये केवल टेक्नोलॉजी के कारण।”
10) हम सैटेलाइट के क्षेत्र में तरक्की कर रहे हैं
– “भारत इन दिनों टेक्नोलॉजी के सहारे तरक्की कर रहा है। स्पेस में नाम कर रहा है। दो दिन पहले 31 नैनो सैटेलाइट लॉन्च किए, पिछले साल 104 सैटेलाइट लॉन्च किए। दुनिया को अचम्भा हुआ। पिछले दिनों एक सैटेलाइट लॉन्च किया जो हाथियों के वजन के बराबर है। देश आधुनिक भारत के सपनों को पूरा करने के लिए एक टेक्नोलॉजी ड्रिवेन गवर्नमेंट, सोसाइटी, डेवलपमेंट पर नए सिरे से बल दिया जा रहा है और सुखद परिणाम तेज गति से नजर आ रहे हैं। हमारे देश में काम होते थे। कोई सरकार कार्यकाल को खराब करना नहीं चाहती है। लेकिन काम होना एक बात है और देश की जरूरत के हिसाब से तेज गति से सही दिशा में परिणाम के साथ काम होने में फर्क होता है। इसलिए फैसला भी समय की सीमा में हो, तेज गति हो और सही दिशा हो, परिणाकारी हो। इन चीजों को लेकर आज देश आगे बढ़ रहा है।”
11) देश की उम्मीदों को कामयाबी में बदलना है
– “इन्फ्रास्ट्रक्चर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए बेहद जरूरी है। इसमें भी हमारी सोच 21वीं शताब्दी और ग्लोबल बेंचमार्क को लेकर है। काम होने के लिए हो, इससे नहीं चलने वाला। पहले गांव में अकाल होता था तो चिट्ठी लिखी जाती थी कि मिट्टी का कुछ काम किया जाए, तो गड्ढे बना दिए जाते थे। डामर की सड़कें बनाने की बात होती थी। आज देश की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। जब देश के सामान्य आदमी की उम्मीदें बढ़ती हैं और उसे सही लीडरशिप मिल जाए तो उम्मीदें कामयाबी में बदल जाती है। जनता की उम्मीदों को कामयाबी में बदलने के लिए हम जी-जान से कोशिश करते हैं, परिणाम मिलने लगा है।”
12) किसी देश ने हमारी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल नहीं उठाए
– “आज विश्व आतंकवाद से परेशान है। कई देश जब भारत आतंकवाद की बात बताता था तो कई देश ऐसे थे, जिन्हें ये गले नहीं उतरता था। उन्होंने भुगता नहीं था। आज समझाने की जरूरत नहीं है, आतंकियों ने खुद समझा दिया है। लेकिन जब हिंदुस्तान सर्जिकल स्ट्राइक करता है तो दुनिया को ताकत का अहसास होता है कि हम संयम रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़े तो हम अपने सामर्थ्य का परिचय भी देते हैं। हम कानूनों से बंधे हुए हैं, हम वसुधैव कुटुम्बकम् में विश्वास करते हैं, ये हमारा चरित्र है।”
– ”हम दुनिया के नियमों का पालन करते हुए हमारे अखंडता, सुरक्षा और आम आदमी की सुख-शांति के लिए कठोर कदम उठाने का सामर्थ्य रखते हैं। हम ऐसा जब जरूरत पड़ी करते रहे हैं और दुनिया हमें कभी भी रोक नहीं सकती। सर्जिकल स्ट्राइक एक ऐसी घटना थी कि दुनिया चाहती तो भारत को कठघरे में खड़ा करत देती, आलोचना होती। पहली बार आपने अनुभव किया होगा कि इतने बड़े कदम पर किसी ने भी एक सवाल नहीं उठाया। जिन्हें भुगतना पड़ा, उनकी बात अलग है। हम दुनिया को समझाने में सफल हुए हैं कि आतंकवाद का कौन-सा रूप हमें परेशान कर रहा है।”
13) हमारे पास 800 मिलियन युवा हैं
– “देश की सबसे बड़ी ताकत ह्यूमन रिसोर्स, प्राकृतिक संपदा है। हमारे पास 800 मिलियन युवा हैं, सपने जवान हैं और हमारे देश की सामर्थ्य में भी जवानी है। इसके साथ हमें FDI की दिशा में आगे बढ़ना है। आजादी के बाद जितना मिला, उससे ज्यादा आज FDI आगे आ रहा है। दुनिया की हर एजेंसी भारत की ताकत को स्वीकार कर रही है। पूरा विश्व इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में भारत को देख रहा है। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और टैलेंट की बहुत जरूरत है। विश्व में फैले हुए भारतीय समाज के पास ये सामर्थ्य है।”
14) आपका बुद्धिधन भारत के काम आ सकता है
– ”ये भारत का बुद्धिधन, अनुभव धन जो विश्व में फैला है, मैं निमंत्रण देता हूं कि अगर आपको लगे कि ये भारत के काम आ सकता है तो इससे उत्तम अवसर कभी नहीं आएगा। अमेरिका में दुनिया के सभी देशों के लोग रहते हैं। यहां रहने वाले हिंदुस्तानी जितना आदर देते हैं, शायद ही दुनिया के किसी लीडर को उतना मिला होगा। कभी लगता है कि इस पीढ़ी के बाद क्या। जो इस पीढ़ी के पास जज्बा है, वो आने वाली पीढ़ी में बना रहेगा क्या? भारत के साथ आपका जुड़ना जरूरी है, निरंतर प्रयास जरूरी है। जिन राज्यों से आप आते हैं, उन राज्यों में अपने यहां अप्रवासी भारतीयों के लिए डिपार्टमेंट बनाए हैं, भारत सरकार ने भी भवन बनाया है।”
15) पाकिस्तान में बेटी को सुषमा घर लेकर आईं
– “विदेश मंत्रालय की सामान्य आदमी के मन में विदेश मंत्रालय की छवि टाई पहनने वाले, बड़े लोगों से मिलने वाले की थी। 3 साल में हमारे विदेश मंत्रालय ने मानवता की दृष्टि से नया मुकाम हासिल किया है। 80 हजार से ज्यादा हिंदुस्तानी दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट में फंसे तो हमारी सरकार उन्हें उनके घर वापस ले आई। हर पल विदेश में रहते हुए भारतीय को लगता था कि उसे कुछ हो गया तो? 3 साल से वो निश्चिंत है, कि कुछ हो गया तो भारत सरकार की एम्बेसी है। एक मुस्लिम भारतीय बच्ची पाकिस्तान जाकर फंस गई, तब उसने वहां की हिंदुस्तानी एम्बेसी में जाने का फैसला लिया। वो भारत लौटकर आई और हमारी सुषमा जी उसे लेने गईं। मैं जब पहले यहां आता था तो बैठते ही विदेश में रहने वाले हमारे भाई बोलते थे गंदगी की बात। आज मेरे लिए खुशी की बात है कि विदेशों से जितनी चिट्ठियां आती हैं, उनमें अधिकतम चिट्ठियां बदलाव की तारीफ वाली मिलती थीं।”
16) सुषमा ने विदेश मंत्रालय को गरीब से जोड़ा
– ”हमने नीतियों में बड़े परिवर्तन किए हैं। आपने कितने पापड़ बेलकर पासपोर्ट हासिल किए थे। 6-6 महीने में पासपोर्ट मिलता था, आज 15 दिन में मिल जाता है। हर पोस्ट ऑफिस में पासपोर्ट ऑफिस खोल दिए हैं। सोशल मीडिया बहुत ताकत रखता है, मैं भी जुड़ा हुआ हूं। आप भी नरेंद्र मोदी ऐप देखते होंगे, नहीं देखते तो ऐप डाउनलोड कर लीजिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया की ताकत को दिखाया। आज विदेश मंत्रालय हिंदुस्तान के गरीब से गरीब आदमी से जुड़ गया है। रात के 2 बजे भी अगर दुनिया के किसी हिस्से में कोई मुसीबत में हो तो 15 मिनट में सुषमा जी जवाब देती हैं और 24 घंटे के अंदर उस पर एक्शन लिया जाता है।”
– “तीन साल बेमिसाल रहे हैं। आने वाला हर पल देश को ऊंचे मुकाम पर ले जाने के लिए खपाते रहेंगे। मुझे बताया गया कि फोटो सेशन होने वाला है, मैं जरूर आपके बीच में आऊंगा। इस बीच मैं मीटिंग वगैरह कर लेता हूं। आपका बहुत धन्यवाद।”
हॉल में लगे मोदी-मोदी के नारे
– मोदी के हॉल में पहुंचने से पहले और स्पीच के दौरान कई बार लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए। यहां नमामि गंगे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन दिखाया गया।
– इसके पहले रविवार को मोदी के साथ राउंट टेबल मीटिंग में टॉप CEOs ने हिस्सा लिया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया भारत की ओर देख रही है, हमारी सरकार ने 7000 रिफॉर्म्स किए। मोदी ने GST लागू करने के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा, “GST अमेरिका के बिजनेस स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा हो सकता है।”
ट्रम्प ने बताया मोदी को सच्चा दोस्त
– मोदी अमेरिका पहुंचे, उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट करके मोदी को अपना सच्चा दोस्त बताया। उन्होंने अमेरिकी प्रेसिडेंट के आफिशयल अकाउंट पर ट्वीट किया- भारतीय पीएम मोदी के स्वागत के लिए व्हाइट हाउस तैयार है। अहम स्ट्रैटजिक इश्यूज पर अपने सच्चे दोस्त के साथ चर्चा होगी।
– सोमवार को मोदी डोनाल्ड ट्रम्प से पहली बार मिलेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई करार होने की उम्मीद है।

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