सर्वधर्म-समभाव से ही देश की एकता संभव : गहलोत

Tatpar 3 Jan 2014

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि इस देश की एकता व अखण्डता तभी कायम रह सकेगी, जब हम सर्वधर्म-समभाव को अपनाते हुए आगे बढ़ें। नए साल इस नई सोच को लेकर ही सभी दलों को आगे बढऩे का अवसर देगा कि वास्तव में राष्ट्रहित क्या है, उसी रूप में देश आगे बढ़ेगा।  गहलोत ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से भाजपा एक साम्प्रदायिक पार्टी है। उसकी सोच दूसरी है, जिसका प्रतिनिधित्व अधिकृत रूप में नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं। इससे लोग भयभीत भी हैं और चिंतित भी। उन्होंने कहा कि सर्वधर्म-समभाव की सोच को लेकर चलने से ही देश एक रहेगा।

गहलोत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने अपने पुराने अनुभव से सादगी की शुरुआत की है तो स्वागत किया जाना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में सादगी पहला उसूल होना चाहिए। यह मुल्क महात्मा गांधी और भगवान महावीर का है। जिनका भाव ही सत्य, अहिंसा और अपरिगृह सादगी पर आधारित है। मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री हो, मुख्यमंत्री हो या मंत्री हो या कोई जनप्रतिनिधि हो उन्हें इन सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, तभी हम गांव और गरीब को गणेश मान कर उनकी सेवा करने में सफल हो सकेंगे।