सांवेर में जाति को नहीं,दल व व्यक्ति को महत्व

  • भाजपा-कांग्रेस देते खटीक समाज के चेहरे को मौका
  • बलाई समाज से राधाकिसन मालवीय थे अंतिम विधायक

शैलेन्द्र सिंह पंवार, इंदौर। बलाई समाज के सबसे अधिक मतदाता होने के बावजूद सांवेर को पिछले 40 साल से इस समाज का विधायक नहीं मिल सका है। सांवेर में बलाई समाज के 60 हजार से अधिक मतदाता है। आखिरी बार बलाई समाज से कांग्रेस के स्व. राधाकिशन मालवीय विधायक चुने गए थे, जिन्हें 1980 में भाजपा के स्व. प्रकाश सोनकर ने पराजित किया था। 2003 में मालवीय के पुत्र राजेन्द्र मालवीय को कांग्रेस ने मौका दिया, जिन्हें फिर सोनकर ने पराजित किया। इस तरह सोनकर सांवेर से पिता-पुत्र को पराजित करने वाले विधायक भी रहे है। सोनकर के निधन के बाद 2007 में सांवेर विधानसभा में उपचुनाव की नौबत आई, तब भाजपा ने नए चेहरे के रूप में बलाई समाज से संतोष मालवीय को चुनावी मैदान में उतारा। मालवीय, सोनकर के ही समर्थक थे और तब सांवेर कृषि मंडी के अध्यक्ष भी थे। हालांकि टिकट उन्हें सुमित्रा महाजन की रुचि से मिला था, किंतु भाजपा का यह प्रयोग असफल रहा और कांग्रेस के तुलसी सिलावट ने उन्हें अच्छे खासे अंतर से पराजित किया। इसके साथ ही करीब 15 साल बाद एक बार फिर सांवेर की राजनीति में सिलावट की एंट्री हो गयी, जो आज तक जारी है। 1990 और 1993 में प्रकाश सोनकर से लगातार पराजित होने पर सिलावट ने 1998 में चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया, तब दिग्विजयसिंह की रुचि से चुनाव के मात्र 20 दिन पहले प्रेमचंद गुड्डू को मौका दिया गया। गुड्डू की युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पहचान थी, फिर भी सोनकर के मुकाबले गुड्डू को कमजोर माना जा रहा था, लेकिन साधन संपन्न गुड्डू ने सोनकर को पराजित कर सभी को चौकाया। तभी से वे चुनावी प्रबंधक के तौर पर भी पहचाने जाने लगे। गुड्डू का मुकाबला इस बार सिलावट से है, जो सांवेर के पिछले चार चुनाव में से तीन में विजयी होते आ रहे है। 2013 में सिलावट भाजपा के राजेश सोनकर से पराजित हुए थे, राजेश भी खटीक समाज से है। अजा वर्ग के लिए आरक्षित सांवेर विधानसभा में भले ही बलाई समाज का वर्चस्व है, लेकिन 2003 व 2007 को छोड़ दिया जाए तो दोनों ही दल पिछले 40 साल से खटीक समाज को ही मौका दे रहे है, जबकि यहां खटीक समाज के कुछ हजार ही मतदाता है। प्रकाश सोनकर व तुलसी सिलावट खटीक समाज से है, जबकि प्रेमचंद गुड्डू पासी है। क्षेत्र में अहिरवार समाज के भी बढ़ी संख्या में मतदाता है, लेकिन 40 साल के इतिहास में इस वर्ग से भी दोनों दलों ने किसी को मौका नहीं दिया है। सबसे खास ये है कि बलाई व अहिरवार समाज से प्रत्याशी नहीं होने के बावजूद इन दोनों समाजों ने जातिगत आधार पर कभी मतदान नहीं किया। जबकि बसपा इन वर्गों से प्रत्याशी उतारती रही है। इस बार भी बसपा ने बलाई समाज से पुर्व एसडीएम विक्रम गेहलोत को प्रत्याशी बनाया है। ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड व विंध्य अंचल की कई सीटों पर जातिगत आधार पर प्रत्याशी उतारने की सभी दलों में परम्परा है, किंतु सांवेर सहित मालवा-निमाड़ अंचल की कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस जातिगत आधार पर प्रत्याशी को महत्व नहीं देते है और ना ही संख्या बल में प्रभावी होने के बाद भी ऐसे कई समाज जातिगत आधार पर मतदान करते है। एक तरह से दल या व्यक्ति को महत्व दिया जाता है।।

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