सिंधिया बोले- बहुत चील बैठे हैं मुझे नोचने के लिए, आओ मुझ पर हमला करो

भोपाल. मध्यप्रदेश में जुबानी सियासत तेज होती जा रही है। एक दिन पहले सिंधिया के टाइगर अभी जिंदा है वाले बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं ने एक के बाद एक कई हमले किए। अब सिंधिया ने पलटवार करते हुए कहा- आज मेरे पास बहुत चील साइड- साइड बैठे हैं, मुझे नोचने के लिए। नोचा भी उसे जाता है, जिसमें कुछ अच्छा होता है। करो मुझ पर जितना हमला करना है। मैंने कल भी कहा था और आज भी कहता हूं- टाइगर अभी जिंदा है।

दअरसल, सिंधिया ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कमलनाथ सरकार पर एक के बाद एक कई हमले किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, केंद्रीय मंत्री पहलाद पटेल और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उपलब्धियों के लिए लगाई गई प्रदर्शनी का उद्धाटन किया।

पीएम ने लॉकडाउन का फैसला नहीं लिया होता तो लाशों के ढेर लग जाते: ज्योतिरादित्य
सिंधिया ने कहा, ‘मुझे कोरोना हो गया था। मानसिक तनाव काफी था। काफी कुछ भुगता है। उससे उभरने में मुझे 30 दिन लग गए। यह बीमारी घातक है। कामना करता हूं कि मेरे किसी दुश्मन को भी यह न हो। अभी यह खत्म नहीं हुई है। अभी दो से तीन महीने और हमें इससे बचना है। सावधानी बरतना जरूरी है। अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें। प्रधानमंत्री के लॉकडाउन का विरोध करने वाले समझ लें, अगर हमारे प्रधानमंत्री ने यह निर्णय नहीं लिया होता तो लाशों के ढेर लग जाते।’

एक दल ने देश में आपातकाल लगाया
सिंधिया ने कहा- प्रधानमंत्री में दूरदर्शिता के साथ सही निर्णय लेने का साहस भी है। चीन के सैनिकों को हमारे जवानों ने धूल चटाई। आज हमारे प्रधानमंत्री लेह पहुंचकर जवानों का हौसला बढ़ा रहे हैं। ये है सशक्त नेतृत्व का परिणाम। एक दल जिसने आपातकाल इस देश में लगाया। कई लोग कहेंगे कि आपने पार्टी बदली है और इसलिए आप आज आपातकाल की बात कर रहे हैं। मैंने कांग्रेस में रहकर भी आपातकाल का विरोध किया था और आज भी उसका विरोध करता हूं। कल भी सच का साथ देता था और आज भी उसी के साथ हूं। जो सही है, वह सही है। जो गलत है, वह गलत है।

शिवराज – ‘फोर डी’ दलाल कांग्रेस सरकार के पतन का कारण 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में ‘फोर डी’ का बोलबाला था और यही तत्कालीन सरकार के पतन का कारण बना। फोर डी का मतलब दलाल, दंभ, दुर्भावना और दिग्विजय सिंह। उस समय राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन को दलाली का अड्डा बना दिया गया था। सरकार के प्रमुख दंभ और अहंकार से भर गए थे। वे दुर्भावनावश कार्य कर रहे थे। इसके अलावा मिस्टर बंटाढार, दिग्विजय सिंह सरकार के पतन का कारण बने।

जनता की उपेक्षा कर खुद के हित साधे
सरकार में जनहित की उपेक्षा कर नेताओं ने अपने हित साधे। किसान कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ सबसे बड़ा धोखा किया गया। किसान कर्जमाफी के लिए कम से कम 50 हजार करोड़ रुपयों की जरुरत थी, लेकिन मात्र छह हजार करोड़ रुपयों के किसान ऋण माफ किए गए और उसमें भी विसंगतियां हैं। मौजूदा सरकार ने किसानों संबंधी विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों के खातों में 25 हजार करोड़ रुपए पहुंचाए। संबल योजना फिर शुरू कर दी गई है। हितग्राहियों के खातों में एक सौ दिनों के अंदर 40 हजार करोड़ रुपए पहुंचाए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *