सिंधिया समर्थक चार पूर्व मंत्रियों को नोटिस नहीं, पिछली भाजपा सरकार के मंत्री भी अब तक बंगलों पर काबिज

भोपाल. कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे 22 विधायकों को बंगले खाली कराने के नोटिस से सियासत गर्मा गई है। पूर्व मंत्री तरुण भनोट का बंगला सील कर दिया गया। उधर, सिंधिया समर्थक इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया और प्रद्युम्न सिंह तोमर को नोटिस भी जारी नहीं किए गए हैं। पिछली भाजपा सरकार के कुछ मंत्री भी अब तक बंगलों पर काबिज हैं। सिंधिया के समर्थन में भाजपा में आए 16 पूर्व विधायकों को आवास खाली कराने के नोटिस दिए गए हैं। नियमानुसार विधायकी जाते ही एक महीने में सरकारी आवास खाली करना होता है।

उधर, भाजपा के वरिष्ठ विधायकों में पूर्व मंत्री रहे विश्वास सारंग, संजय पाठक, जगदीश देवड़ा, रामपाल सिंह और विधायक कृष्णा गौर को कांग्रेस सरकार के दौरान नोटिस दिए गए थे, लेकिन बंगले खाली नहीं कराए गए। वर्तमान में भी ये मंत्रियों के बंगलों में ही रह रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जिन 16 पूर्व विधायकों को नोटिस दिए गए हैं, उन्हें कोरोना संकट के कारण रिमाइंडर नहीं दिया गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा का राज्यसभा का कार्यकाल पूरा हो गया है, लेकिन बंगला उन्हीं के पास है। भाजपा विधायक रहे मनोहर ऊंटवाल और कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा का निधन हो जाने के बाद उनके परिजनों ने जरूर विधानसभा से आवास खाली न करवाए जाने के लिए आवेदन दिया है।

न विधायक हैं और न किसी पद पर… दो माह से अधिक समय बीता, खाली नहीं किया आवास

कांग्रेस से भाजपा में गए 16 विधायकों के पास उनके आवास यथावत है। नियमानुसार विधानसभा सदस्यता न होने पर एक महीने में सरकारी बंगला या एमएलए रेस्ट हाउस में आवंटित आवास खाली करना होता है। सभी को पूर्व विधायक हुए दो माह बीत चुके हैं। इनमें राज्यवर्द्धन सिंह, हरदीप सिंह डंग, जजपाल सिंह जज्जी, ब्रजेंद्र सिंह यादव, जसमंत जाटव, सुरेश धाकड़, रघुराज कंसाना, गिर्राज दंडोतिया, कमलेश जाटव, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, मुन्नालाल गोयल, रक्षा सिरोनिया और मनोज चौधरी शामिल हैं। एंदल सिंह कंसाना और बिसाहूलाल सिंह को बंगले मिले हुए हैं।

पारस जैन ने छह महीने खाली नहीं किया था बंगला

2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद जल संसाधन मंत्री बने हुकुम सिंह कराड़ा को भाजपा सरकार में मंत्री रहे पारस जैन का बंगला आवंटित किया था, लेकिन जैन ने छह महीने तक बंगला खाली नहीं किया था। इसलिए कराड़ा को मंत्री बनने के बाद बंगले के लिए इंतजार करना पड़ा था।

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