सीएम से मिले भूपेश, बोले- मेरी भी जमीन हो तो दे दो किसानों को

रायपुर.कुरुदडीह के किसानों की आड़ में मंगलवार को भाजपा, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस की राजनीतिक चालों ने शह-मात के खेल को तेज कर दिया। किसानों की समस्या हल करने के नाम पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलकर जमीन देने की मांग कर दी। उन्होंने कहा-वहां मेरी भी जमीन है तो किसानों को दे दी जाए। पर राजनीति न हो।
वहीं जोगी कांग्रेस ने भूपेश से पहले वहां के किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री से मिलवा दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने जांच के बाद फैसला करने की बात कही तो राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने शाम को ऐलान कर दिया कि अवैध कब्जे वाली जमीन पहले मुक्त कराकर सरकार अपने कब्जे में ले लेगी। यह सीधे-सीधे संदेश है कि सरकार भूपेश के खिलाफ फैसला करने वाली है।
तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार भूपेश को शाम को मुख्यमंत्री निवास जाना था। लेकिन सुबह मुख्यमंत्री सचिवालय से यह सूचना भेजी गई कि मुलाकात अब मंत्रालय के सीएम सचिवालय में होगी। भूपेश को पहले प्रतिनिधि मंडल के साथ जाने की इजाजत नहीं दी गई। इस बीच जोगी कांग्रेस ने कल रात से ही अपनी चालें चलनी शुरू कर दी थीं। कुरुदडीह के किसानों को रात को ही जोगी कांग्रेस के लोगों ने रायपुर बुलवा लिया था।
जोगी कांग्रेस के विधायक आरके राय, पूर्व मंत्री विधान मिश्रा और प्रवक्ता सुब्रत डे के साथ 21 किसानों ने मुख्यमंत्री निवास में सीएम से मुलाकात कर अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि कलेक्टर से उनकी बात हो गई है। आप लोगों के पास जो भी रिकार्ड है वह 19 तारीख की पेशी में रखें।
इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। भूपेश को प्रतिनिधिमंडल के साथ सीएम से मिलने की इजाजत मिल गई। भूपेश भी अपने साथ कुरुदडीह के कुछ किसान लेकर आए। वे बाकायदा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ पहले कांग्रेस भवन में मिले। और अपने साथ कई नेताओं को लेकर मंत्रालय पहुंचे।
सार्वजनिक तौर पर सीएम और भूपेश का आमना-सामना होता रहा है लेकिन किसी मामले में दोनों के बीच 14 सालों बाद सीधी बातचीत हुई। नेताओं की मौजूदगी में ही भूपेश ने सीएम से कहा- आप किसानों को जमीन दे दीजिए, पट्टा दे दीजिए। इन गरीबों को ऋण पुस्तिका दे दो। ऋण पुस्तिका में तहसीलदार और आरआई का हस्ताक्षर करने का आदेश जारी कीजिए। पटवारी रिकार्ड व राजस्व रिकार्ड में इन गरीबों का नाम दर्ज होना चाहिए। आपको लगता है कि मेरा बेजा कब्जा है यदि मेरे नाम से भी जमीन है तो उस जमीन को भी इन लोगों को दे दो। लेकिन राजनीति करना बंद कीजिए। इन गरीबों के साथ न्याय होना चाहिए। गरीबों को जमीन मिले व रास्ता मिले।
मुख्यमंत्री और बघेल की मुलाकात के बाद राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि कुरुदडीह की जमीन पर हुए बेजा कब्जे को हटाकर सरकार जमीन को अपने कब्जे में लेगी। वे भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद थे। पाण्डेय ने बताया कि बघेल ने सीएम से कहा कि उनके गांव कुरुदडीह में शासकीय जमीन है। उसमें कुछ किसान हैं सरकार उनको वहां पट्टा दे दे। भूपेश के सरकार पर राजनीति करने के सवाल पर पाण्डेय ने कहा कि इसमें राजनीति वाली कोई बात नहीं है। यदि पट्टा दिया जाने लायक रहता तो 2003 के पहले ही दे दिया जाता। भूपेश बघेल के गांव का मामला है। सरकार के पास जब जमीन आ जाएगी तब इस पर विचार किया जाएगा कि क्या करना है।
सीएम बोले- परीक्षण के बाद फैसला होगा
बघेल की बातें सुनने के बाद सीएम ने कहा कि जितनी भी घास जमीन है उस पर तार का घेराव किया जाएगा। परीक्षण कराने व राजस्व विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर निर्णय होगा। 19 मई को तहसील दफ्तर में पेशी है। पहले तो उसके कब्जे का निराकरण होगा।
क्या है कुरुदडीह जमीन विवाद
जोगी कांग्रेस के हमले के बाद इस विवाद ने तूल पकड़ा है। इसके तहत दुर्ग जिले की पाटन तहसील कुरुदडीह गांव की 77 एकड़ जमीन पर मालगुजार बघेल परिवार का कब्जा है। इसमें करीब 55 एकड़ कास्त भूमि है। आरोप है कि यह जमीन बघेल परिवार ने अपनी मालगुजारी जमीन में शामिल कर ली है।
मालगुजार परिवार के सदस्य भूपेश बघेल स्थानीय विधायक होने के साथ ही पीसीसी चीफ भी हैं। किसान यह कह रहे हैं कि बघेल के विधायक बनने के बाद उनके परिवार ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। दूसरी तरफ पीसीसी चीफ का कहना है कि आरोप गलत है। उनके कब्जे में कोई जमीन नहीं है।

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