नई दिल्ली. नया साल। नई शुरुआत। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत को जल्द ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) मिलेगा। इस साल के अंत में सरकार ने जनरल बिपिन रावत को सीडीएस के रूप में नियुक्त कर दिया। अब सैन्य मामलों का नया डिपार्टमेंट बनाया गया है, जिसे सीडीएस लीड करेंगे। सीडीएस कई मामलों में गेम चेंजर साबित होंगे। इसका कारण है कि वे चार अलग स्तरों पर काम करेंगे या कहा जाए कि वे चार भूमिकाएं निभाएंगे। वे लीडरशिप के नए आयाम स्थापित करेंगे। सैन्य मामलों के विभाग प्रमुख होने के नाते समयांतराल में सशस्त्र बलों के बीच एकीकरण स्थापित करेंगे। सीडीएस के पास सचिव के समान पूरे अधिकार होंगे लेकिन उनका ओहदा सचिव से बड़ा होगा।

सीडीएस तीनों सेनाओं से संबंधित मामलों पर सलाह देंगे

प्रमुख सैन्य सलाहकार होने के नाते वे शीर्ष नेतृत्व को तीनों सेनाओं से संबंधित मामलों पर सलाह देंगे। इनमें नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल, न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी और डिफेंस प्लानिंग कमेटी शामिल है। फिलहाल सेना की तीनों अंग मतलब थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय में अपने-अपने कार्यालय बना रखे हैं। नई प्रक्रिया में अब से यह कार्यालय सैन्य विभाग के अंतर्गत होंगे, जो सीधे रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी।

सीडीएस और रक्षा सचिव दोनों ही रक्षा मंत्री को रिपोर्ट देंगे

सीडीएस सैन्य सलाहकार होंगे। हालांकि, रक्षा सचिव और उनके रोल को लेकर संशय है। कारण कि यह दोनों ही रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करेंगे। रक्षा विभाग के अंतर्गत रक्षा उत्पादन, डीआरडीओ, रिटायर्ड कर्मचारियों का कल्याण विभाग शामिल है। सीडीएस की मुख्य जिम्मेदारी ऑपरेशन के दौरान एकजुटता को बढ़ाना है। इसमें लॉजिस्टिक, कम्युनिकेशन, सपोर्ट सर्विस, रिपेयर और मेंटेंनेंस, ट्रेनिंग एंड ट्रांसपोर्ट जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

इसका परिणाम यह होगा कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा। इस स्तर पर उन्हें भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा। उन्हें एक ऐसा ढांचा तैयार करना होगा जो समयसीमा में बेहतर तालमेल के साथ काम कर सके। सीडीएस सिस्टम को स्थिरता और निरंतरता देंगे। यह नए ढांचे के निर्माण और प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है।

सीडीएस की मौजूदगी रक्षा के मामले में हमें अलग स्तर पर ले जाएगी

यह एक बड़ा कदम है। हमारे देश की सुरक्षा के मामले में बड़ा कदम साबित होगा। ताकत के मामले में यह हमें बेहतर स्थिति में लेकर जाएगा। नए सेटअप को स्थापित करना आसान काम नहीं होगा। यह हमारे देश के लिए कोई आसान सफर नहीं होगा। पहले सीडीएस को बेहतर नींव रखना होगी। उन्हें सहयोगियों से सहयोग की जरूरत होगी। इनमें तीनों सेना के प्रमुख के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय और प्रधान नेतृत्व भी शामिल होगा। 

-लेखक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं, जो चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तौर पर रिटायर हुए हैं।

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