सीहोर की मेघा ने एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा, ऐसा करने वाली प्रदेश की पहली महिला बनी

50 किलोमीटर की चल रही बर्फीली हवाओं ने कैंप- 4 में रास्ता रोका, बर्फीले तूफान के रुकते ही शुरू किया सागर माथा छूने का सफर8848 मीटर की ऊंचाई वाली माउंट एवरेस्ट समिट करने वाली मध्यप्रदेश की पहली महिला पर्वतारोही बनी मेघा

भोपाल. सीहोर जिले के भोज नगर की 25 वर्षीय मेघा परमार ने 22 मई को विश्व की सबसे ऊंची माउंट एवरेस्ट (सागर माथा) समिट पूरी की। जिसके बाद ऐसा करने वाली वह प्रदेश की पहली महिला बन गई हैं। समिट कंपलीट होने के बाद मेघा को एवरेस्ट बेस कैंप से काठमांडू शिफ्ट किया गया है।

मेघा के पिता दामोदार परमार किसान हैं और मां मंजू देवी गृहिणी। मेघा को माउंट एवरेस्ट समिट की प्री ट्रेनिंग मध्यप्रदेश के पर्वतारोही रत्नेश पांडे ने दी थी। गौरतलब है इसी साल 22 मई को ही छिंदवाड़ा के तामिया की रहने वाली 27 वर्षीय भावना डेहरिया ने भी एवरेस्ट समिट कंपलीट किया था।

सीहोर की मेघा ने सागर माथा समिट की शुरूआत 18 मई को कैंप नंबर 2 से रात को की। बर्फ से ढंकी पहाड़ियों पर रातभर चढ़ाई कर, सुबह कैंप नंबर 3 पहुंची। सागर माथा समिट के सफर में साथ चल रहे शेरपा और एवरेस्ट समिट ग्रुप के सदस्य रत्नेश पांडे रहे। कैंप–3 में कुछ समय गुजारने के बाद आगे का सफर शुरू किया। 

एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने की जिद ने  पहाड़ पर बिछी बर्फ की सफेद चादर और तेज बर्फीली हवाओं से सफर की बाधाओं को हरा दिया। शेरपा और साथ में चल रहे मध्यप्रदेश के पर्वतारोही रत्नेश पांडे के साथ मेघा 20 मई को एवरेस्ट के कैंप- 4 में पहुंची।

50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली हवाओं ने रोका 

7900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट के कैंप-4 से शिखर 948 मीटर दूर है। 20 मई की रात मेघा को एवरेस्ट समिट के लिए कैंप-4 से रवाना होना था। तभी अचानक शाम को मौसम खराब हो गया। करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगी। कैंप में ही करीब 3 घंटे तक हवाओं के थमने का इंतजार किया। जो अगले दो दिन तक नहीं रुकी। इसके चलते अगले दो दिन (20 और 21 मई) कैंप–4 में ही तेज बर्फीली हवाओं के बीच मेघा, कैंप में ही रुकी रहीं। 

22 मई की सुबह 5 बजे तिरंगा फहराया

21 मई को दोपहर बाद बर्फीली हवाओं की रफ्तार सामान्य हुई। नेपाल के माउंटेनिंग एसोसिशन से जुड़े शेरपाओं ने कैंप – 4 से एवरेस्ट समिट के सफर को शुरू करने की अनुमति दी। मौसम सामान्य होने के कुछ घंटों बाद 21 मई की रात कैंप से तिरंगा और सीहोर की मिट्‌टी लेकर रवाना हुई मेघा परमार ने 22 मई की सुबह करीब 5 बजे 8860 मीटर की ऊंचाई वाले एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा फहराकर एवरेस्ट समिट कंपलीट किया।

ट्रेनिंग के दौरान ऊंचाई से गिरी, रीढ़ की हड्‌डी में तीन फ्रेक्चर हुए
मेघा परमार बीते साल भी माउंट एवरेस्ट समिट करने गई थी। लेकिन, 8848 मीटर की ऊंचाई से महज 100 मीटर पहले सेहत बिगड़ने के कारण 8100 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद लौटना पड़ा था। सेहत सुधरने के बाद मेघा ने दोबारा एवरेस्ट समिट की तैयारी की। मनाली में ट्रेनिंग के दौरान ऊंचाई से गिरने के कारण रीढ़ की हड्‌डी में तीन फ्रेक्चर हुए। इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने मेघा को एवरेस्ट समिट का सपना छोड़ने और पहाड़ नहीं चढ़ने की सलाह दी। लेकिन, एवरेस्ट शिखर छूने का सपना पूरा करने फ्रेक्चर ठीक होने के बाद दोबारा माउंटेनिंग प्रैक्टिस शुरू की।


सेहत बिगड़ने के कारण तीन साथियों की समिट नहीं हुई कंपलीट

मेघा परमार कैंप नंबर 4 से एवरेस्ट समिट अपने तीन साथियों और गाइड रत्नेश पांडे के साथ निकली थी। लेकिन, कैंप से एवरेस्ट शिखर के बीच ग्रुप में शामिल तीन साथियों की सेहत बिगड़ गई। मजबूरन तीनों को एवरेस्ट समिट कंपलीट किए बिना लौटना पड़ा।

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