सुभाष चंद्रा को राज्यसभा जाने से रोकना चाहते हैं नवीन जिंदल, सोनिया को बताया अपना प्लान

नई दिल्ली। हरियाणा में राज्यसभा की लड़ाई दिलचस्प होती जा रही है। कांग्रेस नेता नवीन जिंदल नहीं चाहते है कि उनके दुश्मन सुभाष चंद्रा किसी भी कीमत पर राज्यसभा पहुंचे। इसके लिए नवीन जिंदल ने सोनिया गांधी से मुलाकात करके उनके सामने हरियाणा की राजनीतिक स्थिति रखी । जिंदल ने पार्टी प्रेसीडेंट के सामने सुभाष चंद्रा की रणनीति और कांग्रेस के कुछ नेताओं से उनके साथ नजदीकियों की भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने सुभाष चंद्रा को हराने का प्लान भी उनके सामने रखा। दरअसल हरियाणा में कांग्रेस का स्टैंड ही सुभाष चंद्रा की हार-जीत निश्चित करेगा।
क्या है हरियाणा की राजनीतिक स्थिति
-हरियाणा विधान सभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें से 47 बीजेपी के हैं इसके साथ साथ 5 निर्दलीयों का भी उसे समर्थन प्राप्त है। इसलिए बीजेपी के पास कुल 52 विधायकोंं का वोट है। इनमें से 31 वोट केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह के लिए है।
-बीजेपी ने दूसरी सीट के लिए सुभाष चंद्रा को सपोर्ट दिया है। वीरेंद्र सिंह के बाद बीजेपी के पास 21 विधायक हैं। साथ ही सुभाष चंद्रा को कुछ निर्दलीय और बसपा विधायक टेकचंद शर्मा का भी समर्थन है।
-हरियाणा में कांग्रेस के 15 विधायक है साथ ही उसे दो निर्दलीयों का भी समर्थन प्राप्त है। इस तरह उसके पास 17 वोट हैं।
-हरियाणा में तीन लोग निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। सुभाष चंद्रा जिनको बीजेपी का समर्थन प्राप्त है। आर. के. आनंद जिनको इनेलो का समर्थन प्राप्त है । इनेलो के पास 19 विधायक हैं।
-इसके अलावा राष्ट्रीय टोला पार्टी के उम्मीदवार डॉक्टर केपी सिंह ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया।
– हालांकि उनके साथ कोई भी विधायक नहीं है और ना ही किसी विधायक ने उनके प्रस्तावक के रूप में फार्म पर साइन किए हैं।
-इसलिए हरियाणा की दूसरी सीट के लिए सुभाष चंद्रा और आर. के. आनंद के बीच असली मुकाबला है।
कई रणनीतियों पर काम कर रहें है सुभाष चंद्रा
-राज्यसभा पहुंचने के लिए सुभाष चंद्रा कई रणनीतियों पर काम कर रहें है।
-सुभाष चंद्रा की पहली रणनीति है कि कांग्रेस चुनाव में ही भाग ना ले। उनकी इस रणनीति को हरियाणा के एक बड़े कांग्रेसी नेता का नैतिक सपोर्ट मिल रहा है। इस नेता का कहना है कि हम अपनी विरोधी पार्टी इनेलो के उम्मीदवार को क्यों वोट दें। इससे हम पर भ्रष्टाचार समेत इनेलो की बी-टीम होने का आरोप लगेगा।
-अगर यह हो जाता है तो सुभाष चंद्रा आराम से चुनाव जीत सकते हैं। अगर कांग्रेस के 17 वोट ही ना पड़े तो सुभाष के पास सबसे ज्यादा वोट हो जाएंगें।
-इसके साथ ही सुभाष चंद्रा इनेलो और कांग्रेस में भी सेंध लगाने की कोशिश कर रहे है।
-सुभाष चंद्रा ने कहा था कि उन्हें इनेलो के 2 MLA का समर्थन प्राप्त है। इसी से डर कर इनेलो ने अपने सभी विधायकों को मसूरी भेज दिया है। ये विधायक 11 तारीख को ही चंडीगढ़ आकर वोटिंग करेंगे।
आर. के. आनंद को ही वोट देगी कांग्रेस
-नवीन जिंदल ने अलावा कुलदीप शर्मा और कुलदीप विश्नोई ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात कर हरियाणा की स्थिति पर चर्चा की।
-नवीन जिंदल ने सोनिया गांधी के सामने रखा कि अगर हरियाणा में कांग्रेस आर.के. आनंद को वोट नहीं देगी तो बीजेपी समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा जीत जाएंगे।
-सोनिया गांधी के लिए हरियाणा से ज्यादा महत्वपूर्ण केंद्र की राजनीति है इसलिए राज्यसभा में बीजेपी विरोधी और अपने समर्थक सदस्यों की संख्या बढ़ाना उनके लिए राजनीतिक मजबूरी है। इसलिए यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेस के विधायक आर. के. आनंद को ही वोट देंगे।
-उधर सुभाष चंद्रा को जीत दिलाने के लिए बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कई दिनों से चंडीगढ़ में ही डेरा डाल रखा है।
-विजयवर्गीय ही बीजेपी के साथ साथ निर्दलीय विधायकोंं से बात-चीत कर रहे हैं। गौरतलब है कि हरियाणा में चुनावों के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने काफी मेहनत की थी।
पुराने कांग्रेसी रहे हैं आनंद
– आर. के.आनंद पहले भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव इनेलो के टिकट पर फरीदाबाद से केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के खिलाफ लड़ा था। साथ ही वो पुराने कांग्रेसी भी हैं।
-आर के आनंद पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और देश के कई चर्चित केस उन्होंने लड़े हैं। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की वसीयत भी आनंद ने ही लिखी थी। आनंद लंबे वक्त तक गांधी परिवार के निजी वकील भी रहे है।
क्या है सुभाष चंद्रा और नवीन जिंदल विवाद
-सुभाष चंद्रा एस्सेल समूह और जीटीवी समूह के मालिक हैं और मूल रूप से हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले हैं। साथ ही नवीन जिंदल भी हरियाणा के हिसार के ही रहने वाले है और दो बार कांग्रेस से एमपी रहे हैं।
-नवीन देश के जानेमाने बिजनेसमैन हैं वे जिंदल स्टील एंड पॉवर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन है। इसके साथ साथ वो एक मीडिया हाउस के मालिक भी हैं।
-गौरतलब है कि जी न्यूज के दो पत्रकारों-सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया पर नवीन जिंदल की कम्पनी जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड (जेपीसीएल) ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इन पर 100 करोड़ रुपयों की जबरन वसूली का आरोप था। जिसके बाद इन दोनों पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था।

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