सुषमा के PAK दौरे के 4 दिन बाद ही अलगाववादियों से मिले पाक हाई कमिश्नर

नई दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्लामाबाद से लौटने के महज 4 दिन बाद ही पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने सोमवार रात कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात की। दिल्ली में बासित और हुर्रियत के चेयरमैन सैयद अली गिलानी के भेजे डेलीगेशन के बीच मुलाकात ऐसे वक्त हुई जब सोमवार को ही सुषमा ने संसद में अपने पाक दौरे पर बयान दिया था।
क्या बातचीत बहाली की राह में खलल पैदा करेगी मुलाकात?
– दिल्ली में बासित और हुर्रियत नेताओं के बीच की यह मुलाकात भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत बहाल होने की राह में रुकावट पैदा कर सकती है।
– इसका खतरा इसलिए है क्योंकि हाल ही में सुषमा स्वराज पाकिस्तान दौरे से लौटी हैं।
– सुषमा ने इस्लामाबाद में हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था।
– सुषमा ने इस्लामाबाद से ही 10 दिसंबर को एलान किया था कि भारत-पाक के बीच कॉम्प्रिहेंसिव कम्पोजिट डायलॉग दोबारा शुरू होगा।
– इसके बाद सुषमा ने सोमवार को संसद में भारत-पाक रिश्तों पर बयान दिया।
– उन्होंने बातचीत बहाली के फैसले को दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई शुरुआत करार दिया।
– जब विपक्ष ने इस पर सवाल उठाना चाहे तो उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पाकिस्तान जाने की आलोचना करने वाले अजीब-अजीब आलोचना करते हैं। साड़ी का रंग हरा क्यूं था? उर्दू क्यों बोली? …क्यूं न बोलती? उर्दू मेरे मुल्क की भी जुबान है।” (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
अगस्त में अलगाववादियों के ही मुद्दे पर बनते-बनते बिगड़ गई थी बात
– भारत-पाकिस्तान के बीच अगस्त में होने वाली एनएसए लेवल की मीटिंग 4 दिन के सस्पेंस के बाद रद्द हो गई थी।
– पाकिस्तान हुर्रियत नेताओं से मिलने और कश्मीर पर ही बात करने पर अड़ा था।
– लेकिन सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के सामने दो शर्तें रख दी थीं।
– उन्होंने कहा था- अगर पाकिस्तान के एनएसए सरताज अजीज हुर्रियत के नेताओं से मिले और आतंकवाद के इतर कश्मीर जैसे मुद्दों पर बोले तो बात नहीं होगी।
– हुर्रियत नेताओं से मुलाकात करने की पाकिस्तान की इच्छा पर सुषमा ने कहा था- पाकिस्तान शिमला समझौते की स्पिरिट को समझे।
– उन्होंने कहा था कि बातचीत होगी तो सिर्फ दो देशों के बीच। कोई भी तीसरी पार्टी (हुर्रियत) बीच में नहीं आएगी। आप हुर्रियत या किसी और से बात मत कीजिए।
क्या है कॉम्प्रिहेंसिव कम्पोजिट डायलॉग?
– सुषमा ने बीते बुधवार को इस्लामाबाद से एलान किया था कि दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों पर कॉम्प्रिहेंसिव बायलैटरल डायलॉग (समग्र बातचीत) का सिलसिला फिर से शुरू होगा।
– 2008 के मुंबई हमलों के बाद यह बातचीत थम गई थी।
– कॉम्प्रिहेंसिव बायलैटरल डायलॉग के तहत भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद, कारोबार, सर क्रीक, कश्मीर समेत तमाम मुद्दों पर बीच कई लेवल पर बातचीत होगी।
– पहले इसे कंपोजिट डालयॉग और 2008 के बाद रिज्यूम्ड डायलॉग कहा जाता था।
– 1998 में कंपोजिट डायलॉग का सिलसिला शुरू हुआ था जो 2008 में मुंबई हमले के बाद थम गया था।
– अगले महीने भारत-पाक के विदेश सचिव मुलाकात कर आगे की बातचीत का तौर-तरीका तय करने वाले हैं।
EXPERT ने इसे बताया था जल्दबाजी में दबाव से भरा फैसला
– सुषमा के एलान के बाद विदेश मामलों के एक्सपर्ट रहीस सिंह ने dainikbhaskar.com को बताया था – कम्पोजिट डायलॉग पर रजामंदी जल्दबाजी तो है, बेहद चौंकाने वाली भी है। क्या सरकार ने बातचीत के सभी आठों मुद्दों की गंभीरता परखी?
– ये सही है कि दोनों मुल्कों का भविष्य कश्मीर, सियाचीन, सरक्रीक समेत 8 मुद्दों से तय होगा। लेकिन पाक का रुख इन पर ट्रेडिशनल रहा है। और भारत का भी। फिर आखिर इन पर बातचीत की पहल किस आधार और किस शर्त पर की जा रही है?
– ऊफा में मोदी-नवाज के बीच बनी रजामंदी को चंद महीनों में हुर्रियत को बुलाकर पाक ने तोड़ दिया था। क्या पाक ने हुर्रियत मुद्दा छोड़ दिया? कुछ भी साफ नहीं है। फिर मोदी सरकार के 180 डिग्री घूम जाने का राज क्या है?
– सच तो यह कि भारत की पाकिस्तान पॉलिसी साफ नहीं है। यह अहम मुद्दों पर भटकी हुई रही है। यही खासियत आज भी देखने को मिल रही है।
– यह भी कहा जा सकता है कि भारत इस्लामाबाद में बाहरी दबावों के कारण झुकता हुआ दिखा। यह भारत की प्रो-एक्टिव और रीयल पाॅलिटिक्स पर बेस्ड फॉरेन पॉलिसी नहीं दिखाता। इसलिए भारत को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है।