सूखा पीड़ित किसानों के मुआवजे पर कांग्रेस ने किया हंगामा और वॉेक आउट

रायपुर.विधानसभा में बुधवार को सूखा पीड़ित किसानों को मुआवजा देने की मांग को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्ष ने केंद्र सरकार से मिले 1600 करोड़ रुपए में किसानों को केवल साढ़े चार सौ करोड़ ही बांटने का आरोप लगाया। इस मामले में वे राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के उत्तर से भी संतुष्ट नहीं हुए और नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
पांडेय ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर किसानों के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। प्रश्नकाल में कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने किसानों को मुआवजा न मिलने और अकाल घोषित इलाकों में मनरेगा के तहत भी काम न मिलने का आरोप लगाया।
धनेंद्र साहू ने कहा कि सूखे की पटवारी रिपोर्ट अब तक सरकार ने जारी नहीं की है। किसान भटक रहे हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि पीड़ित किसानों के लिए सरकार को राहत कार्य शुरू करने ही होंगे। इस मामले में पंचायत मंत्री और राजस्व मंत्री के बयान विरोधाभासी हैं।
 सूखा पीड़ित किसानों के लिए केंद्र से मिले 1600 करोड़ में से केवल साढ़े चार सौ करोड़ ही बांटे गए हैं। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत कई कांग्रेस विधायकों ने सरकार के मुआवजा वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
हर पीड़ित किसान को मुआवजा: राजस्व मंत्री पांडेय ने कहा कि सरकार हर सूखा पीड़ित पात्र किसान को मुआवजा देगी। इस वजह से तहसील के बजाए किसान को इकाई माना गया है। वास्तविक सूखे की रिपोर्ट आ जाएगी तो तहसील मायने नहीं रखती। हमारे पास पटवारी रिपोर्ट भी है।
सरकार ने नजरी आंकलन के बाद तुरंत किसानों की मदद की। सरकार के पास सर्वे रिपोर्ट भी है। सरकार ने सूखे के साथ ही ओला प्रभावित किसानों को भी मदद करने का ऐलान किया है। केंद्र से मिले 1600 करोड़ में से बचे रुपए भी किसानों में बांटे जा रहे हैं। सूखा पीड़ित इलाकों में 200 दिन मनरेगा का काम दिया जाएगा। वहां पीने के पानी की समस्या दूर करने सरकार ने 45 करोड़ रुपए भी जारी किए हैं।
लैब उपकरण खरीदी में भ्रष्टाचार, वाक आउट
प्रदेश के स्कूलों में लैब उपकरण खरीदी में दस करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष ने शिक्षामंत्री केदार कश्यप पर सवालों की बौछार कर दी। कांग्रेस विधायकों ने यह भी कहा कि जानबूझकर घटिया उपकरण उस वक्त खरीदे गए, जब सत्र समाप्त हो रहा था।
विपक्ष ने मंत्री पर गलत जवाब देने का भी आरोप लगाया। शिक्षामंत्री द्वारा जांच की मांग ठुकराए जाने पर जोरदार हंगामा हुआ और विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
विधानसभा में ध्यानाकर्षण के दौरान वृहस्पति सिंह, मोहन मरकाम व मोतीलाल देवांगन ने सरकार का ध्यान इस मामले की खींचा। सिंह, मरकाम, देवांगन ने कहा कि करीब तीन करोड़ रुपए की ऐसी चीजों के लिए निविदा बुलाई गई, जिनकी जरूरत स्कूलों में थी ही नहीं।
खरीदी नियमों की अनदेखी करके बजट लैप्स होने की आशंका से करोड़ों रुपए की आनन-फानन में खरीदी की गई।
चहेती फर्मों को सैंपल नहीं दिखाए जाने के बाद भी न्यूनतम दर से कई गुना अधिक दरों पर क्रय आदेश जारी किए गए। विपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि उच्च दर वाली एजेंसियों को फर्जी तरीके से निर्मात्री संस्थान का प्रमाण पत्र बनवाने में शिक्षा विभाग की भूमिका है।
नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि शिक्षामंत्री का जवाब गलत है तो सही जानकारी क्या है? यदि गलती हुई है तो इसकी जांच की घोषणा करें।
सत्र के प्रारंभ में खरीदी हो इसे प्राथमिकता देंगे – कश्यप
विपक्ष के आरोपों से गिरे शिक्षा मंत्री कश्यप ने ऐलान किया कि भविष्य में नया सत्र शुरू होते ही उपकरणों की खरीदी हो इसका ध्यान रखा जाएगा। मामले में जांच की जरूरत नहीं है। लोक शिक्षण संचालनालय ने दस करोड़ रुपए के लैब उपकरण खरीदने विज्ञापन जारी किया था।
डीपीआई में क्रय समिति बनाई गई थी। 261 सामग्रियों की सूची विशेषज्ञों ने ही बनाई थी। मूल निर्माता फर्मों को उनके द्वारा प्रस्तुत एनएसआईसी, डीटीआईसी, प्रमाणपत्र के आधार पर ही वांछित सामग्री का निर्माता माना जाता है। इसी आधार पर एन-वन तय होता है।
वर्तमान में क्रय जिला स्तर किया जा रहा है। किसी फर्म को अग्रिम भुगतान नहीं किया गया है।

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