सौंफ, मिश्री, धनिया साथ खाने से इन प्रॉब्लम्स में मिलती है राहत

आमतौर पर सब्जियों में मसाले और सुगंध के लिए इस्तेमाल होने वाला धनिया भारत के लगभग हर हिस्से में पैदा किया जाता है। धनिया के हरे पत्ते और बीजों को हर भारतीय रसोई में देखा जा सकता है। औषधीय गुणों से भरपूर धनिये का वानस्पतिक नाम कोरिएंड्रम सटाईवम है। मसालों के अलावा इसे आदिवासी अनेक हर्बल नुस्खों में भी उपयोग में लाते हैं। चलिए आज जानते हैं धनिया के औषधीय गुणों और इससे जुडे आदिवासी हर्बल फार्मूलों के बारे में…
1. सौंफ, मिश्री व धनिया के बीजों की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना कर 6-6 ग्राम रोजाना खाने के बाद लेने से एसिडिटी, आंखों की जलन, पेशाब में जलन व सिरदर्द दूर होता है।

2. हाथ-पैर में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया के बीजों और मिश्री को कूट कर खाना खाने के बाद 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता है।

धनिया के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।