स्मृति के खिलाफ प्रिविलेज्ड मोशन, कठेरिया के बयान पर लोकसभा में हंगामा

नई दिल्ली. बजट के बाद मंगलवार को संसद कार्यवाही के पहले दिन हंगामा शुरू हो गया है। स्मृति ईरानी पर कांग्रेस ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित स्टूडेंट रोहित वेमुला सुसाइड को लेकर झूठा बयान देने का आरोप लगाते हुए प्रिविलेज्ड मोशन ला रही है। वहीं, लोकसभा में रामशंकर कठेरिया के बयान मामले में स्थगन प्रस्ताव दिया गया है। मंत्री ने मौत के बदले मौत का बयान दिया था।
सदन में आखिर ऐसा क्या बोला था स्मृति ने…
 – कांग्रेस लीडर कीसी वेणुगोपाल और रणजीत रंजन ने लोकसभा में स्मृति ईरानी के खिलाफ प्रिविलेज्ड मोशन लाने का नोटिस दिया है।
– वहीं, सुबह 9:30 बजे पार्लियामेंट्री पार्टी मीट हुई। इसमें पीएम मोदी, नरेश गुजराल, हरसिमरत कौर समेत एनडीए सांसद शामिल हुए।
– लोकसभा में मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
– राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इसकी शुरुआत फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली करेंगे।
– बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में राहुल गांधी सबसे आगे रहेंगे। वे लोकसभा में स्पीच भी दे सकते हैं।
 सोमवार को क्या हुआ था?
– सदन जैसे ही शुरू हुआ स्पीकर सुमित्रा महाजन ने जेटली को बजट पेश करने को कहा।
– तभी कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल खड़े हो गए और उन्होंने स्पीकर से यह बताने को कहा कि एचआरडी मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव का क्या हुआ?
– वेणुगोपाल ने कहा, आम बजट के दिन ऐसा करना मेरे लिए दुखद है। मैं एचआरडी मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया हूं।
– इसके बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और दूसरी पार्टी के सांसद भी खड़े हो गए और उन्होंने अपने नोटिस का स्टेट्स देने की मांग की।
– इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने आपत्ति जताते हुए कहा – ‘बहुत ही घटिया राजनीति… कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाना चाहिए।’
– शोरगुल के बीच स्पीकर ने कहा कि हंगामा नहीं करें और मिनिस्टर को बजट पेश करने दें। मुझे 26 और 29 फरवरी को स्मृति ईरानी के खिलाफ नोटिस मिला है। मुझे अभी फैसला करना है।
किस नेता ने क्या कहा?
– कांग्रेस लीडर गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि रोहित वेमुला की खुदकुशी पर संसद में दिए गए ईरानी के बयान में कई विरोधाभास थे। जिस तरह उन्होंने देश को गुमराह किया, यह विशेषाधिकार हनन के लिए मामला है।
– वहीं, बीजेपी सपोक्स्पर्सन एमजे अकबर के मुताबिक स्मृति ने जो फैक्टस पेश किए वह ऑफिशियल हैं। मंत्री ऑफिशियल अकाउंट, जो पुलिस का होता है, उसी पर स्टेटमेंट दे सकते हैं। गुलाम नबी आजाद ने भी अपने भाषण में माना था नेता किस आधार पर बयान देते हैं।
– कांग्रेस के अलावा दूसरी अपोजिशन पार्टियां भी स्मृति के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने का मन बना रही हैं।
– सीपीएम, जेडीयू ने भी स्मृति के विरोध का फैसला किया है।
– सीपीएम के मोहम्मद सलीम ने कहा है कि वे सोमवार को स्पीकर सुमित्रा महाजन को स्मृति के खिलाफ नोटिस देंगे।
– केसी त्यागी का कहना है कि स्मृति के बयानों में कई विरोधाभास हैं। यह विशेषाधिकार हनन का मामला है।
विवाद की वजह और स्मृति ने पार्लियामेंट में क्या दी थी सफाई
 स्मृति पर पांच गलत फैक्ट देने का आरोप लगा है।
– स्मृति ने संसद में कहा था- रोहित के सुसाइड के बाद दूसरे दिन तक डॉक्टर नहीं पहुंचे। जबकि यूनिवर्सिटी की सेंट्रल चीफ मेडिकल ऑफिसर बोली थीं कि वे घटना की जानकारी मिलते ही 3 से 4 मिनट के भीतर उसी दिन शाम को रोहित के कमरे में पहुंची थीं।
– स्मृति ने कहा था कि दूसरे दिन तक वहां पुलिस नहीं पहुंची थी। जबकि रोहित के भाई ने कहा है कि जब वह शाम को साढ़े आठ बजे रोहित के कमरे में पहुंचे तब वहां डॉक्टर और पुलिस मौजूद थे।
– स्मृति ने कहा था कि जांच कमेटी के प्रॉक्टोरियल बोर्ड में दलित रिप्रजेंटिटिव थे। जबकि रोहित को प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने नहीं बल्कि एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने रोहित को सस्पेंड किया था। काउंसिल में कोई भी दलित रिप्रजेंटिटिव नहीं था।
रोहित के दाेस्त ने क्या कहा
– रोहित के दोस्त विजय ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ‘‘स्मृति ईरानी ने संसद में झूठ बोला। यूनिवर्सिटी ने जो 11 मेंबर अप्वाइंट किए थे। उनमें कोई एससी-एसटी कम्युनिटी से नहीं था। स्मृति ईरानी झूठ फैला रही हैं।’’
 क्या है मामला?
– आंध्र प्रदेश के गुंटूर का रहने वाला दलित स्टूडेंट रोहित सोशियोलॉजी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट कर रहा था।
– रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहित और आंबेडकर यूनियन के पांच दलित स्टूडेंट्स पर एबीवीपी के एक एक्टिविस्ट पर अगस्त में हमला करने का आरोप लगा था।
– यूनिवर्सिटी ने 21 दिसंबर को रोहित के हॉस्टल में जाने पर बैन लगा दिया।
– इसके बाद 17 जनवरी को रोहित ने फांसी लगा ली।
– एचआरडी मिनिस्ट्री ने इस मामले में जांच कमेटी का एलान किया।
– इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस अशोक कुमार रूपनवाल की चेयरमैनशिप में जांच कमेटी बनाई। वे 3 महीने में रिपोर्ट सौपेंगे।