हताश कांग्रेस में चुनौती बना ‘नेता और अध्यक्ष’ पद

Tatpar 8 Jan 2014

जयपुर। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद निराश राजस्थान कांग्रेस के सामने नए प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चयन बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि इन पदों पर चुने जाने वाले नेता ही लोकसभा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के लिए पार्टी में जान फूंकने का काम करेंगे। पार्टी में जान फूकने का काम करेंगे। पार्टी नया प्रदेश अध्यक्ष अब तक नियुक्त नहीं कर पाई है, जबकि नेता प्रतिपक्ष का चुनाव मंगलवार को होना था, लेकिन विधायक दल की बैठक टल गई। विधानसभा चुनाव तो पार्टी बुरी तरह हार गई, लेकिन अब अगले दो वर्ष उसके लिए महत्वपूर्ण है। इस वर्ष मई में लोकसभा चुनाव, नवम्बर में नगरीय निकाय चुनाव और अगले वर्ष जनवरी में पंचायत चुनाव होने है। इसके बाद नगरीय निकाय चुनावों का एक दौर और होगा।

लोकसभा में जहां पार्टी के सामने मौजूदा सीटें बचाए रखने की चुनौती होगी, वहीं नगरीय निकाय, अध्यक्षों, जिला प्रमुखों और प्रधानों के सीधे चुनाव होने से इनका टिकट वितरण भी महत्वपूर्ण हो गया है। मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान ने विस. चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा भेज दिया था। प्रदेश प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत ने कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में गत 31 दिसम्बर तक नए प्रदेशाध्यक्ष नियुक्ति की बात कही थी।

सूत्रों के अनुसार प्रदेशाध्यक्ष के लिए पिछले दिनों सचिन पायलट का नाम जोर-शोर से चला, फिर बात आई कि किसी सांसद को अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। अब कहा जा रहा है कि किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।

आलाकमान चाहता है कि चुनाव की दृष्टि से अध्यक्ष किसी ऐसे नेता को बनाया जाए, जिस पर दोनों की सहमति हो।

नेता प्रतिपक्ष चयन के लिए मंगलवार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक टल गई। प्रदेश प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने बताया कि बैठक में केन्द्रीय मंत्री गुलाब नबी आजाद को शामिल होना था, लेकिन वे कोलकाता में है।

शर्मा ने बताया कि प्रदेश प्रभारी गुरुदास कामत ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सूचित किया है कि घने कोहरे के कारण आजाद जयपुर नहीं पहुंच सकेंगे।

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