हमारे और केन्द्र के खाद्य सुरक्षा कानून में जमीन- आसमान का अन्तर : डॉ. रमन सिंह

Tatpar 3 Sep 2013

प्रदेश की बारह लाख महिलाओं को अन्नपूर्णा राशन कार्ड
विकास यात्रा को जोरदार जन समर्थन : डॉ. रमन सिंह
कोयला खदान क्षेत्रों में एस.ई.सी.एल. के सहयोग से होंगे श्रमिक हितैषी कार्य

रायपुर! मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राज्य के गरीबों के लिए देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून बनाकर और उसमें पोषण सुरक्षा के तत्व को जोड़कर उसे सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।  हमारे और केन्द्र के खाद्य सुरक्षा कानून में जमीन-आसमान का अन्तर है। केन्द्र के कानून में निःशुल्क नमक और किफायती चना तथा दाल का प्रावधान नहीं है, जबकि हमारे कानून में इसकी मुकम्मल व्यवस्था की गयी है। छत्तीसगढ़ ने कृषि उत्पादन, उसके उपार्जन, भण्डारण और वितरण का एक बेहतर नेटवर्क विकसित कर राज्य की जनता को कानून बनाकर भोजन का अधिकार दिया है। केन्द्र के कानून में इस प्रकार के नेटवर्क का अभाव झलकता है।हमारा कानून उनसे बेहतर है।
मुख्यमंत्री आज प्रदेश व्यापी विकास यात्रा के सातवे चरण के दूसरे दिन के दौरे पर रवाना होने से पहले कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 42 लाख गरीब परिवारों को नये राशन कार्ड दिए जा रहे हैं। इनमें से महिला सशक्तिकरण की भावना के अनुरूप लगभग बारह लाख नये राशन कार्ड संबंधित परिवारों की वरिष्ठ महिला मुखिया के नाम से जारी किए जा हैं। इन्हें अन्नपूर्णा राशन कार्ड का नाम दिया गया है, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में महिलाओं को घर की अन्नपूर्णा माना गया है। यह छत्तीसगढ़ के इस कानून की एक बड़ी विशेषता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारे खाद्य सुरक्षा लागू होने के बाद कोरिया जिले में अंत्योदय और प्राथमिकता वाले राशन कार्ड धारकों की संख्या एक लाख 25 हजार से बढ़कर एक लाख 71 हजार तक पहुंच गयी है। इन्हें एक रूपए और दो रूपए किलो में हर महीने 35 किलो चावल का लाभ मिलेगा। राज्य में सात सितम्बर तक खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके अन्तर्गत शत-प्रतिशत नये राशन कार्डों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए है। उन्होंने कहा कि कोरिया जिला कोयला खदानों की बहुलता वाला जिला है। इस जिले में कोयला खदान क्षेत्रों के श्रमिक परिवारों को बेहतर से बेहतर बुनियादी सुविधा दिलाने के लिए राज्य सरकार केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम दक्षिण पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एस.ई.सी.एल.) से समन्वय कर हर संभव व्यवस्था कर रही है। एस.ई.सी.एल को इस इलाके में श्रमिकों के हित में कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सी.एस.आर.) मद की अधिक से अधिक राशि खर्च करने के लिए कहा गया है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विगत छह मई को राज्य के दक्षिण बस्तर जिले के मुख्यालय दंतेवाड़ा से  प्रारंभ उनकी लगभग छह हजार किलोमीटर की विकास यात्रा में अब तक करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली गयी है। प्रारंभ में तेज गर्मी और लू के थपेड़े और बाद में कही हल्की तो कही भारी बरसात के बावजूद यात्रा के हर पड़ाव में जगह-जगह उमड़े भारी जनसैलाब ने राज्य सरकार की नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों के प्रति अपना जोरदार सहयोग और समर्थन प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के संदर्भ में कहा कि कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध इस जिले में कृषि महाविद्यालय का शुभारंभ, चिरमिरी को तहसील का दर्जा देने की घोषणा, जिले की महिलाओं और शिशुओं को त्वरित चिकित्सा सेवा दिलाने के लिए ‘महतारी एक्सप्रेस’ वाहन सुविधा की शुरूआत, मनेन्द्रगढ़ के शासकीय स्नातक कॉलेज को स्नातकोत्तर कॉलेज का दर्जा देने और  बैकुंठपुर में स्टेडियम निर्माण की घोषणा, चिरमिरी में लगभग 34 करोड़ 38 लाख रूपए की लागत वाले पेयजल आवर्धन प्रोजेक्ट का भूमिपूजन,  और यात्रा के प्रथम दिवस पर कल लगभग 156 करोड़ रूपए के ढाई सौ से ज्यादा निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन, हजारों की संख्या में हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सामग्री और अनुदान राशि का वितरण इस जिले में विकास यात्रा की प्रमुख उपलब्धियां हैं। इस दौरान जिले के चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में ‘कोर-पीडीएस मेरी मर्जी’ नामक योजना भी शुरू की गयी , जिसमें राशन  कार्ड धारकों को उनकी मर्जी की किसी भी उचित मूल्य दुकान से राशन उठाने की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कोरिया जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। इस जिले में लगभग छह हजार महिलाओं को अलग-अलग समूहों में संगठित कर उन्हें स्कूली बच्चों की गणवेश सिलाई सहित अचार, पापड़ आदि घरेलू वस्तुओं के उत्पादन पर आधारित कुटीर उद्योगों से जोड़ा गया है। यहां के महिला स्व-सहायता समूहों ने रेशम उद्योग में भी दिलचस्पी ली है और इन समूहों की महिलाएं जिले के प्रसिद्ध जलप्रपात ‘अमृत धारा’ के बा्रंड नाम से कोसा धागे तैयार कर रही हैं। डॉ. रमन सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि  प्रदेश के अन्य जिलों की तरह इस जिले में भी विगत नौ वर्ष में विकास का नया और उत्साहजनक वातावरण निर्मित हुआ है। इस दौरान जिले में लगभग 55 करोड़ रूपए के 41 बड़े पुलों का निर्माण किया गया है। जिले में इस अवधि में विद्युतीकृत गांवों की संख्या 388 से बढ़कर 652 और एकल बत्ती कनेक्शन धारक परिवारों की संख्या 326 से बढ़कर लगभग बीस हजार तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2003 में कोरिया जिले में किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों की संख्या केवल 413 थी, जबकि पिछले तीन वर्ष में इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया और आज इस जिले में क्रेडिट कार्ड धारक किसानों की संख्या 45 हजार तक पहुंच गयी है, जिन्हें सहकारी समितियों से केवल एक प्रतिशत ब्याज पर खेती के लिए ऋण सुविधा मिल रही है।
डॉ. रमन सिंह ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जनता को एक जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासन दिलाने के लिए ऑन लाईन व्यवस्था लागू की गयी है। इसके फलस्वरूप राजस्व न्यायालयों  के फैसले भी ऑन लाईन हो गए हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति इन्टरनेट पर देख सकता है। आवेदकों, अनावेदकों और संबंधित वकीलों को पेशी की तारीख उनके मोबाईल फोन पर एस.एम.एस के जरिए भी उपलब्ध करायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरिया जिले में दस हजार वनवासी परिवारों को वन अधिकार मान्यता पत्र और 584 गांवों को सामूहिक प्रयोजन के लिए जमीन के वन अधिकार पत्र दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत नौ-दस वर्ष में शिक्षा के क्षेत्र में भी कोरिया जिले ने जोरदार प्रगति की है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि प्रदेश के दूर-दराज इलाकों के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टरों की कमी देर करने के लिए बड़ी संख्या में उनकी नियुक्ति की जा रही है। कोरिया जिले को भी इसका लाभ मिलेगा। जिले में सर्पदंश से पीड़ित मरीजों को त्वरित इलाज की सुविधा देने के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की जा रही है।