हम अपनी पॉलिसी किसी देश को काउंटर करने के लिए नहीं बनाते

नई दिल्ली. मोदी सरकार के 3 साल पूरे होने पर मंत्री बारी-बारी से अपने काम का ब्योरा दे रहे हैं। सोमवार को सुषमा स्वराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विदेश मंत्रालय के कामकाज के बारे में जानकारी दी। सुषमा ने कहा, “बीते 3 साल में विदेश मंत्रालय ने विदेशों में फंसे 80 हजार भारतीयों को बचाया।” सुषमा ने ये भी कहा कि हमारे प्रधानमंत्री की इमेल ग्लोबल लेवल पर मजबूत हुई है। चीन के वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) पर कहा कि हम कोई भी पॉलिसी किसी देश को काउंटर करने के लिए नहीं बनाते।
घरेलू मामलों में भी विदेश मंत्रालय की सक्रियता बढ़ी…
– सुषमा ने कहा- “इस सरकार ने ये परंपरा शुरू की है कि इस सरकार का हर मंत्री हर साल अपने काम का ब्योरा देगा। मैं पहली बार पेश हुई हूं। इस सच्चाई को तो आप स्वीकार करेंगे कि गरीब कल्याण के कारण हमारी सरकार का सम्मान बढ़ा है। विश्व में भी हमारा प्रभुत्व बढ़ा है। पीएम का कद काफी बढ़ा हुआ है। संकट में फंसे हुए भारतीयों की हमने मदद की है।”
– “घरेलू मामलों में भी विदेश मंत्रालय सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एफडीआई यूपीए की तुलना में 37.5 फीसदी बढ़ी है। हमारे दूतावास काम को आगे बढ़ाते हैं। प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा हमारा उद्देश्य है। हमने 80 हजार लोगों को विदेशों में बचाया है। पहले पीएम ने खाड़ी देशों से रिश्ते बेहतर किए। इसीलिए मैंने दो लोगों को चुना।”
– “मैंने काम को दो भागों में बांटा। हमारे राजदूत की सक्रियता बेहद तेज हुई है। पीएम की कोशिश रंग लाई। इसमें ऑपरेशन मैत्री शामिल हुई। ये वो आंकड़ा है वो सिर्फ संकट में फंसे लोगों का है। हमने अपने नागरिकों को सहूलियत का ध्यान रखा। पासपोर्ट की सेवाओं में विस्तार और सुधार किया। नियम सरल किए।”
प्रभावी कूटनीति, उत्तम परिणाम
– सुषमा ने कहा, “एक तिमाही से दूसरी तिमाही । पहले 77 पासपोर्ट केंद्र थे हमने 17 बढ़ाए। फिर पोस्ट ऑफिस के जरिए पासपोर्ट देना का काम किया। 67 केंद्र शुरू किए गए।”
– “हमने घोष वाक्य है- प्रभावी कूटनीति, उत्तम परिणाम। हमारे आलोचक कहते थे कि मुस्लिम देशों से संबंध खराब रहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने खाड़ी देशों और बाकी देशों से संबंध बहुत बेहतर किए।”
– “पीएम अब इजराइल जा रहे हैं। दोनों देश जानते हैं कि भारत फिलिस्तीन का करीबी है और इजराइल का भी। लेकिन दोनों देश कहते हैं कि आप हमारे विवाद को सुलझाएं। कार्यप्रणाली भी बदली।”
मोदी ने ट्रम्प से 3 बार बात की
– “ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में कोई कमी नहीं आई है। मोदी ने तीन बार ट्रम्प से बात की है। जेटली की बातचीत हुई। हमारी हाईलेवल पर बातचीत जारी है। दोनों देशों के एनएसए लगातार बात करते हैं। रिश्ते वैसे ही हैं जैसे ओबामा के वक्त थे।”
– “वीजा पर अभी कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ। लॉटरी से ही वीजा निकलता है। चिंता जरूर है। वहां कानून बनाना होगा। वहां की कांग्रेस को फैसला करना है। मोदी इस मुद्दे को यात्रा के दौरान उठाएंगे। हम अपने हितों का ध्यान रखेंगे। डिफेंस पार्टनरशिप पर कोई असर नहीं होगा। दोनों देशों के एनएसए इस बारे में लगातार बातचीत कर रहे हैं।”
– “क्लाइमेट को लेकर चिंता नहीं है। भारत ने दबाव या भय में पेरिस समझौते पर दस्तखत नहीं किए। मोदी जी ने साफ कर दिया था कि हम पांच हजार साल से पर्यावरण की रक्षा का वचन दिया है। अमेरिका रहे ना रहे हम पेरिस समझौते बने रहेंगे।”
CPEC का विरोध नहीं लेकिन कनेक्टिविटी पर फोकस
– सुषमा ने कहा, “हम कोई भी नीति किसी और को काउंटर करने के लिए नहीं बनाते। सीपैक (CPEC) का हम विरोध नहीं करते लेकिन कनेक्टिविटी पर फोकस करते हैं। चाबहार, BCIM कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट ही हैं। सवाल ये है कि इसकी उपयोगिता क्या है? चीन इस बात को समझेगा। सीपैक हमारी प्रभुसत्ता का मामला है। चीन के दो हेलिकॉप्टर उत्तराखंड में उतरे। लेकिन सीमा क्लियर नहीं इसलिए ये मामले हो जाते हैं। लेकिन एयर स्पेस का मामला है इसलिए हम उचित तरीके से उठाएंगे।”
– “चीन कहता है कि भारत से हमारा विरोध सीधा नहीं है। हमने उनसे कह दिया है कि फ्रांस भी नॉन एनपीटी कंट्री था। फिर वो पाकिस्तान की बात करता है। हमने कहा कि मटैरियल सप्लाई हमको विश्वसनीयता की वजह से मिला। हम चीन से बातचीत कर रहे हैं। हमारे मित्र देश भी यही कहते हैं कि भारत को एनएसजी की सदस्यता मिले। रूस भी यही कर रहा है क्योंकि उसके चीन से अच्छे रिश्ते हैं।”
पाक हमारे लिए एक देश है
– सुषमा ने कहा, “विदेश मंत्रालय का वक्त पाकिस्तान पर नहीं बीतता। हमारे लिए वो एक देश है। बाकी देशों पर जो वक्त खर्च करते हैं, उतना ही पाकिस्तान पर खर्च करते हैं। तीन बातें याद रखें। बातचीत, बातचीत दो देशों की ही होगी, मध्यस्थता मंजूर नहीं। आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं होगी। बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन 3 शर्तें हैं। शपथ में नवाज को बुलाया था। दो साल तक हाथ बढ़ाते रहे हैं।”
– “हमें क्या मिला? पठानकोट। जांच लटकी हुई है। इसलिए हमने तीन कसौटियां तय कर दीं। एक कदम आगे, दो कदम पीछे वाला मामला नहीं।”
– “अस्ताना में मोदी-नवाज के बीच बातचीत तय नहीं है। जाधव के मामले में मेरिट पर काम होगा। जाधव की फांसी पर रोक लगी हुई है। वहां हमारा पक्ष मजूबत है। कश्मीर को पाकिस्तान वहां नहीं ले जा सकता। ये बाइलेटरल मुद्दा है। आईसीजे में हमारे कई मुद्दे चल रहे हैं। इसमें सिंधु जल समझौता भी शामिल है। जाधव मामला वियना कन्वेंशन से जुड़ा है। वहां से हमें राहत मिली है।”
कतर मामले पर क्या बोलीं?
– सुषमा ने कहा, “हमें इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। हमारी चिंता सिर्फ वहां केवल किसी भारतीय के फंसे होने को लेकर है। अगर है तो हम निकालेंगे। हमारे कतर और सऊदी से बेहतर रिश्ते हैं। हमारे हितों पर कोई असर नहीं होगा।”
सऊदी और यूएई में सबसे ज्यादा कामगार जाते हैं
– 80 हजार भारतीयों पर कितना खर्च हुआ? लोग क्यों डेंजर जोन में जाते हैं? इस सवाल पर सुषमा ने कहा- “सऊदी और यूएई में सबसे ज्यादा कामगार जाते हैं। वहां दो कंपनियों में दिक्कत आई है। एमजे अकबर और वीके सिंह ने इस मोर्चे को संभाला। उन्होंने हमारी मदद की। कुछ लोगों को वहीं दूसरी नौकरी मिल गई और कुछ देश वापस आ गए। मैंने पिछले दिनों गल्फ राजदूतों से इस बारे में बात की थी।”
– “लोगों को लाने पर एक रुपए खर्च नहीं हुआ। इसके लिए एक फंड होता है। भारत सरकार से पैसा नहीं लिया। उजमा का मामला है। वो विजिट वीजा पर गई थी। उसने वहां हमारी एम्बेसी को घर माना। ये मानवीय संवेदना का मामला है।”
किसी भी योजना की गति अब धीमी नहीं
– सुषमा ने कहा, “चाबहार की गति पहले धीमी थी लेकिन अब नहीं है। क्योंकि मामला सुलझा लिया गया है। बाकी कनेक्टिविटी में भी पहले गति धीमी थी, अब नहीं है। अफसर मेरे साथ हर 3 महीने और पीएम 6 महीने में समीक्षा करते हैं। इससे काम में तेजी आई है।”
– “हर जगह हमने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का मुद्दा उठाया। हमने सबसे कहा है कि आप पाकिस्तान को भारत के प्रिज्म से मत देखिए। ओसामा कहां मिला? सऊदी में हमला हुआ तो तार कहां जुड़े? ये मानवता के खिलाफ वाला मामला है। हम पाकिस्तान से खुद निपट सकते हैं और उसे संभाल सकते हैं।”

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