हरीश जाटव की मौत मॉब लिंचिंग है या नहीं, भिवाड़ी एसपी जांच करेंगे : पायलट

भिवाड़ी (अलवर). उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि बाइक से महिला की टक्कर के बाद मारे गए हरीश जाटव की मौत मॉब लिंचिंग है या नहीं, इसका पता पुलिस की जांच के बाद ही लगेगा। भिवाड़ी के नए एसपी डाॅ. अमनदीप सिंह घटना की नए सिरे से जांच करेंगे।  किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

पायलट अलवर के झिवाणा में मृतक हरीश व रतिराम के परिवार से मिलने पहुंचे थे। पायलट ने कहा कि पहलू खां प्रकरण में भी यदि आठ महीने पहले सरकार बनते ही एसआईटी गठित कर जांच करवा ली जाती तो शायद अदालत का फैसला कुछ और होता। हालांकि अदालत के फैसले के बाद सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है। अब कोई दोषी बच नहीं पाएगा। पायलट ने अलवर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि यह सभी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। कानून हर जाति, समुदाय के लिए बराबर हैं।


पायलट ने कहा कि सरकार को हरीश और उसके पिता रतिराम की मौत का दुख है। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दिलाई जाएगी। उन्होंने हरीश जाटव के परिजनों को ढांढस बंधाया। हरीश की पत्नी रेखा उप मुख्यमंत्री पायलट के पैरों में लिपट गई और न्याय की गुहार करने लगी। अपने बच्चों और परिवार के हालात बताए।

पायलट ने रेखा की चार बच्चियों की पढ़ाई, लालन-पालन और अन्य आर्थिक मदद के लिए सरकार से हरसंभव मदद दिलाने की बात कही। उनके साथ राज्य सरकार में श्रम मंत्री टीकाराम जूली, जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह, अलवर एसपी पारिस देशमुख सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

रतिराम की पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट दी, नहीं बताई मौत की वजह

अलवर जिले में मॉब लिंचिंग के शिकार हरीश जाटव के पिता रतिराम का पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को दे दी, लेकिन इसमें मौत की वजह का खुलासा नहीं किया। एफएसएल रिपोर्ट की आड़ लेकर डॉक्टरों ने फाइनल ओपीनियन रोक ली।

ज्ञातव्य है कि झिवाणा निवासी हरीश जाटव की मौत से आहत पिता ने 15 अगस्त की शाम जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। मामले को लेकर टपूकड़ा सीएचसी में दो दिन तक विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन चला था। तीसरे दिन 18 अगस्त को जाकर प्रशासन व ग्रामीणों के बीच सहमति बन पाई थी। जिसके बाद शव का मेडि़कल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया।

रिपोर्ट पुलिस को दे दी हैं लेकिन फाइनल स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि गंभीर मामलों में अक्सर एफएसएल की रिपोर्ट आने का इंतजार किया जाता है। बोर्ड ने कहा है कि फाइनल ओपिनियन तभी दी जाएगी जब एफएसएल से विसरे की जांच रिपोर्ट आ जाएगी।