हितानन्द की नियुक्ति से भाजपा में छिड़ी बहस,सुहास रहेंगे या जाएंगे

 

 

 

 

 

  • 27 विधानसभा उपचुनाव तक तो रूकेंगे भगत
  • हितानन्द को मिलेगा मध्य भारत व मालवा का प्रभार

शैलेन्द्र सिंह पंवार, इंदौर। मप्र भाजपा में सह संगठन मंत्री के तौर पर हितानन्द शर्मा की नियुक्ति से अब ये बहस छिड़ पड़ी है कि प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत रहेंगे या जाएंगे। भगत बिते अप्रैल माह में चार साल पुरे कर चुके है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो भाजपा में संगठन महामंत्री को तीन से चार साल ही काम करने का मौका मिलता है। भगत को साढ़े चार साल हो चुके है। चूंकि 27 विधानसभा उपचुनाव सिर पर है और भगत को इनका पुरा होमवर्क है, उन्हें एक्सटेंशन मिले या नहीं, पर ये तय है कि वे अभी तो अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो रहे है। वैसे भी हितानन्द अभी सह संगठन मंत्री ही हुए है, उन्हें प्रमोट होने में कम से कम 2 से 3 वर्ष तो लगेंगे ही, फिर बहुत कुछ उनकी कार्यप्रणाली पर भी निर्भर करता है। क्योंकि 2018 में विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले ही अतुल राय को भी यही दायित्व दिया गया था, उनके प्रभार के क्षेत्र महाकौशल में परिणाम भी ठीक ठाक ही रहे थे, लेकिन हाईप्रोफाइल कार्यशैली उनके लिए महंगी पड़ गयी, चुनाव निपटते ही सबसे पहले राय को ही रवाना किया गया। राय भी भाजपा में आने से पहले संघ के विभाग प्रचारक थे, लेकिन अब संघ या भाजपा में किस भूमिका में है शायद ही किसी को पता हो। खैर तब परिणाम के लिए भगत पर भी अंगुलियां उठी थी, उनसे कार्यकर्ताओं को संवाद व प्रवास की शिकायतें रहती थी। हालांकि उनकी कार्यशैली लो प्रोफ़ाइल है और संगठन के कामों पर भी उनकी पैनी नजर रहती है। संभवतः ऐसी शिकायतों को दूर करने के लिए ही भगत 2019 के लोकसभा चुनाव में पहले की तुलना में और एक्टिव हुए, लगभग सभी जिलों में तब उनके प्रवास हुए। संभागीय संगठन मंत्रियों पर निर्भरता छोड़ उन्होंने मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करने की कोशिशें की, इससे उन्होंने संवादहीनता की शिकायतों को भी बहुत हद तक दूर किया है, हालांकि अभी भी इसमे और गुंजाइश बाकि है। भगत ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया पिछले दिनों संगठन की नियुक्तियों में, कई जिलों में उन्होंने व्यक्तिगत रुचि लेकर अपनी पसंद से जिला अध्यक्ष बनवाये, इसको लेकर भी वे निशाने पर थे, लेकिन नई लीडरशिप को आगे लाने के लिए उनके इस निर्णय को संगठन में सही माना गया। जिला व मंडल अध्यक्ष की आयु निर्धारण का फार्मूला भी उनके ही दिमाग की उपज था, जिसको युवा कार्यकर्ताओं में खूब सराहना मिली।

■ एक और सह संगठन मंत्री की होगी नियुक्ति
कहा तो ये भी जा रहा है कि हितानन्द के अलावा जल्द ही मप्र भाजपा को एक और सह संगठन मंत्री मिलेगा, भगत जब तक है मुख्य भूमिका में होंगे और सह संगठन मंत्रियों के बीच प्रदेश के आधे-आधे कामों का बटवारा कर दिया जाएगा। बिल्कुल 10 वर्ष पुर्व की स्थिति, तब माखन सिंह संगठन महामंत्री थे और अरविंद मेनन व भगवत शरण माथुर के बीच सह दायित्व थे। हितानन्द को मध्य भारत (भोपाल, होशंगाबाद,ग्वालियर, चंबल संभाग) के साथ ही मालवा प्रान्त (इंदौर, उज्जैन संभाग) की जिम्मेदारी दी जा सकती है। उप चुनाव की दृष्टि से भी ये दोनों ही प्रान्तों का फिलहाल विशेष महत्व है। हितानन्द संघ में कई वर्षों तक जिला व विभाग प्रचारक रह चुके है, अभी तक उनके पास विद्या भारती में मध्य भारत प्रान्त संगठन मंत्री का दायित्व था। मूलतः अशोक नगर जिले के रहने वाले हितानन्द लो प्रोफ़ाइल है और प्रवास करने के साथ ही सीधा संवाद भी करते है।।

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