‘हिन्दी में समझ नहीं आता, अंग्रेजी में समझाऊं क्या’ –

Tatpar 27 feb 2014

विकास प्राधिकरणों के सीईओ से मुझे प्रो-एक्टिव लीडरशिप की जरूरत है। लेकिन लगता है कि आप लोगों को जितनी चाबी भरी जाती है, उतना ही चलते हैं। यह बात आवास एवं पर्यावरण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एप्को में विकास प्राधिकरणों की समीक्षा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सवा महीने पहले मैंने सिर्फ दो बातें कही थीं।

पहली यह कि मास्टर प्लान की सड़कें कैसे बनाई जाएं और दूसरी अफोर्डेबल हाउस की कार्ययोजना को ओर अधिक बेहतर कैसे बनाएं। इसके लिए 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा था। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सवा महीने बाद रिपोर्ट के नाम पर कागजी योजना बनाकर मैंने सामने रख दी। आप लोगों को हिन्दी में समझ नहीं आता, अंग्रेजी में समझाऊं क्या।

मंत्री के इतना कहते ही सभाकक्ष में सन्नाटा पसर गया। मंत्री ने कहा कि आप ने जो कागजी योजना बनाई है, उसका मैदानी स्तर पर कितना लाभ होगा कोई मुझे आकर समझा दे। मंत्री ने कहा कि मुझे अफसोस है कि आला अफसरों सहित विकास प्राधिकरणों की सीईओ के पास न तो विजन है और न ही लीडरशिप। उन्होंने कहा कि अधिकांश प्राधिकरणों के अधिकारी बैठक में खाली हाथ चले आए हैं उनके पास यह बताने के लिए नहीं है कि वे अपने शहर के विकास में कितना और क्या योगदान दे पाएंगे।

साडा के अधिकारी नाकारा

मिंत्री ने कहा कि साडा को 3000 हेक्टेयर जमीन आवंटित है, इसमें भी 1700 हेक्टेयर का कब्जा उनके पास है। इसके बावजूद वहां पर कोई भी बड़ी योजना नहीं आई। इस पर साडा सीइओ आदित्य तोमर ने कहा कि मकान बनाए हैं, लेकिन बिकते ही नहीं है। मंत्री ने कहा कि साडा के अधिकारी नाकारा हैं, कोई विजन ही नहीं है। वहां पर इंडस्ट्रियल एरिया विकसित करों, दिल्ली के उद्योगपति आने को तैयार हैं।

केवल राजनैतिक कारणों से जिंदा है प्राधिकरण

मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि 74वें संविधान के तहत प्राधिकरण बंद हो जाना चाहिए थे, लेकिन इन्‍हें केवल राजनैतिक कारणों से जिंदा रखा गया हैं। उन्‍होंने कहा कि यदि आप लोग अपनी श्रेष्‍ठता साबित नहीं करोगे तो इसे बंद करना हमारी मजबूरी हो जाएगी।

मंत्री ने कहा कि कोई प्राधिकरण 40 ईडब्‍ल्‍यूएस बना रहा है तो काई 100। बड़ा एरिया लो कम से 100 एकड़ जमीन लेकर उस पर बढि़या सर्वसुविधायुक्‍त आवासीय कालोनी बनाओ, जिसमें ईडब्‍ल्‍यूएस और एलआईजी के 1000-1500 आवास हो।