होलिका में कोरोनासुर का पुतला दहन, जानें- मुहूर्त व कोरोना से बचने के उपाय

होली के त्यौहार पर कोरोनावायरस का प्रकोप (Coronavirus Outbreak On Holi) दिखाई दे रहा है। होली पर जहां लोग कोरोना वायरस को लेकर सावधान हैं, वहीं जागरुकता के लिए होलिका दहन में कोरोना वायरस का पुतला भी दहन करेंगे। मुंबई के वर्ली इलाके में लोग होलिका दहन के लिए इस बार कोरोनासुर का पुतला दहन किया जाएगा। इसी प्रकार देश के अन्य जगहों पर भी अलग-अलग थीम पर होलिका दहन कर जागरुकता का संदेश देंगे।

जानें- कब होगा होलिका दहन ( होलिका दहन मुहूर्त)

फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर यानि आज यायिजय योग में होलिका दहन होगा। इस होलिका दहन में भद्रा का दोष नहीं है। होलिका का दहन प्रदोष काल में करना शुभ होता है। सोमवार को शूल योग शाम 4.57 बजे लगेगा। इस योग के शुरुआती दो घंटे तक होलिका दहन नहीं हो सकता है। इसलिए, शाम 6.57 बजे से रात्रि 7.43 बजे के बीच होलिका दहन करना शुभ होगा, क्योंकि इस अवधि में यायिजय योग, पूर्णिमा, सिंह राशि का चंद्रमा और सोमवार का संयोग होगा। इस अवधि में होलिका का दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का शमन होगा और सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

होलाष्टक समाप्त होते ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएगा

होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक समाप्त हो जाएगा और फिर मांगलिक कार्य शुरू होंगे। होली से आठ दिन पूर्व तक भक्त प्रहलाद को अनेक यातनाएं दी गई थीं, जिसके कारण इस काल को होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्टक में नकारात्मकता चरम पर होती है, इसलिए कोई मांगलिक कार्य नहीं होते। होलिका दहन के साथ ही विवाह व अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

इसलिए होलिका दहन

फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को ही हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने श्रीहरि विष्णु के भक्त प्रहलाद को आग में जलाकर मारना चाहा था। भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर मर गई, तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई। होलिका में नए अनाज की आहुति देनी चाहिए। इसलिए जौ, गेहूं, चना की बालियां गन्ने में बांधकर होलिका में भूनकर इसका प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

होली पर कोरोनावायरस का प्रकोप (Coronavirus Outbreak On Holi)

होली पर इस बार कोरोना की आशंका जताई जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग होली खेलने के लिए बढ़े पैमाने पर एक जगह खड़े होकर पानी का इस्तेमाल करते हैं। पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन चुके कोरोना वायरस के कई मामले भारत में भी सामने आ गए हैं। थकान से लेकर, सिरदर्द, नाक बहने, खांसी, गले में खराश, बुखार आदि के लक्षणों के रूप में सामने आने वाली इस समस्या से खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानी बरतें, आइए जानते हैं।

सूखी होली खेलें-

सूखी होली आपको संक्रमण से बचाने में कारगर हो सकती है। पानी के साथ होली खेलने पर आपको सर्दी होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में जहां तक संभव हो सके

सेनेटाइजर का करें इस्तेमाल-

अगर बाहर से लोग आपके साथ होली खेलने आ रहे हैं तो उन्‍हें सेनेटाइजर इस्‍तेमाल करने को दें। घर पर पूरी सावधानी से रहें।

खानपान का रखें ध्यान-

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसकी आशंका ज्यादा होती है। उनमें से भी अधिकतर लोग 8-10 दिन के उपचार के बाद ठीक हो जाते हैं। यानी शरीर मजबूत रहे, यह जरूरी है और इसके लिए खानपान का ध्यान रखना जरूरी है।

हाथ मिलाने से करें परहेज़-

यह एक संक्रामक बीमारी है। इसलिए किसी भी व्यक्ति से हाथ मिलाने से बचें। अगर हाथ मिलाना जरूरी हो, तो हाथ मिलाने के तुरंत बाद अपने हाथ एल्कोहलयुक्त साबुन से धोएं। इन दिनों वैसे भी दिन में लगभग हर घंटे अपने हाथों को साबुन की सहायता से धोते रहें। हाथ धोने के सही तरीके को अपनाते हुए साबुन लगाकर 20 सेकंड तक हाथों को रगड़ें और फिर साफ पानी से उसे अच्छी तरह धोएं।

भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बचें-

भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज करें। बाजार, मॉल, मेले आदि में जाने से बचें। अगर आसपास कोई खांसी-जुकाम से पीड़ित है, तो उनके करीब न जाएं और उनसे तीन फिट की दूरी पर रहकर बात करें। अगर कोई संक्रमित है, तो उसके खांसने या छींकने से आसपास का व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।

मास्क का करें इस्तेमाल-

संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने भर से ही मुंह से निकली द्रव की सूक्ष्म बूंदें हवा के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं। ऐसे में अगर संक्रमित व्यक्ति से मिलना जरूरी है, तो मास्क जरूर लगाएं। बार-बार हाथ धोते रहें।

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