13 साल बाद Moody’s ने सुधारी भारत की रेटिंग, कहा- रिफॉर्म्स देश में ग्रोथ लाएंगे

नई दिल्ली. अमेरिकी एजेंसी Moody’s ने 13 साल बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया है। एजेंसी ने शुक्रवार को भारत की रेटिंग Baa3 से बढ़ाकर Baa2 कर दी है। Moody’s ने भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ने की वजह यहां इकोनॉमिक और इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स को बताया है। 2004 में Moody’s ने भारत को Baa3 रेटिंग दी थी। इसे सबसे निचला इन्वेस्टमेंट ग्रेड माना जाता है।

भारत में लगातार ग्रोथ हो रही

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक Moody’s ने अपने स्टेटमेंट में कहा, “भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां हो रहे इकोनॉमिक रिफॉर्म्स हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की ग्रोथ में इजाफा होगा। यह भी मुमकिन है कि मीडियम टर्म में सरकार पर कर्ज का भार कम होता जाए।”
– “हमारा मानना है कि रिफॉर्म्स को सही तरीके से लागू करने पर कर्ज के तेजी से बढ़ने और ग्रोथ कम होने का खतरा कम होगा।”
– हालांकि, Moody’s ने सलाह दी है कि भारत को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा कर्ज कहीं उसका क्रेडिट प्रोफाइल खराब न कर दे।

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया ट्वीट

– “इंटरनेशनल एजेंसी Moody’s ने 2004 के बाद पहली बार भारत की रेटिंग अपग्रेड की है। ये मोदी सरकार में भरोसे को दिखाता है।”

और क्या कहा क्रेडिट एजेंसी ने?

– “भारत में हो रहे इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स ग्रोथ को रफ्तार देंगे। मोदी सरकार के पास अपने कार्यकाल का करीब आधा वक्त है। उम्मीद है कि सरकार रिफॉर्म्स को लेकर बड़े फैसले लेगी।”
– “भारत सरकार अभी कई रिफॉर्म्स का खाका तैयार कर रही है। अगर इन्हें सही वक्त पर लागू किया गया तो देश में बिजनेस और प्रोडक्टिविटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोत्तरी होगी।”
– “भारत के रिफॉर्म प्रोग्राम की खासियत ये है कि उनमें झटका सहने की ताकत है। ये बताती है कि देश में ग्रोथ की और दुनिया के सामने खड़े होने की ताकत कितनी मजबूत है।”

प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा जीएसटी

– Moody’s ने कहा कि जीएसटी जैसे रिफॉर्म्स से भारत में इंटरस्टेट बैरियर हटेंगे, लिहाजा प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।
– “मॉनीटरी पॉलिसी में सुधार करके नॉन परफॉर्मिंग लोन्स (NPLs) की परेशानी से निपटा जा सकता है। सरकार के नोटबंदी, आधार से अकाउंट्स को जोड़ना और बेनिफिशियरी के बैंक खाते में डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसे सिस्टम से इकोनॉमी में अड़चनें कम हुई हैं।”
– Moody’s का अनुमान है कि इस फाइनेंशियल ईयर (2017-18) में भारत की ग्रोथ रेट 6.7% के आसपास रहेगी। इसके बाद सरकार की तरफ से स्मॉल और मीडियम इंडस्ट्रीज (SMEs) और एक्सपोर्टर्स को मदद मिलने के बाद अगले फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ 7.5% से ज्यादा हो सकती है।

क्या है मूडीज, कैसे दी जाती है रेटिंग?

– रेटिंग देने के इस सिस्टम देने की शुरुआत 1909 में जॉन मूडी ने की थी। इसका मकसद इन्वेस्टर्स को एक ग्रेड देना है, ताकि मार्केट में उसकी क्रेडिट बन सके।
– एजेंसी ने ग्रेडिंग के लिए 9 सिम्बल- Aaa, Aa, A, Baa, Ba, B, Caa, Ca और C तय किए हैं। Aa से लेकर Caa तक की 1, 2, 3 सब-कैटेगरी भी होती हैं।
– फिलहाल Moody’s ग्लोबल कैपिटल मार्केट का अहम हिस्सा है। ये फाइनेंशियल मार्केट को क्रेडिट रेटिंग, रिसर्च टूल्स और एनालिसिस देता है।
– Moody’s कॉर्पोरेशन, Moody’s इन्वेस्टर्स सर्विस की पेरेंट कंपनी है, जो क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च का काम करती है
– 2016 में कॉर्पोरेशन का रेवेन्यू 3.6 बिलियन डॉलर (करीब 23 हजार 321 करोड़ रुपए) था। एजेंसी का काम दुनिया के 41 देशों में है, जिसमें करीब 11 हजार 700 लोग काम करते हैं।

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