1965 War Story-4: शास्त्री जी ने कहा था, ‘पाक के लोगों का न हो नुकसान’

चंडीगढ़/जोधपुर. जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि पाकिस्तान का ऑपरेशन जिब्राल्टर बुरी तरह से पिट गया था। अब वह गुस्से में था और पूरी तैयारी के साथ अखनूर पर कब्जे के लिए आगे बढ़ा था। 1 सितंबर को उसने छंब जोरियां पर हमला बोला। यह हमला जमीनी भी था और हवाई भी। हवाई हमले में 50 के करीब भारतीय नागरिक जोरियां गांव में मारे गए और एक मस्जिद भी तबाह हो गई। पाकिस्तान की स्थिति छंब में अच्छी थी। उसके पास अमेरिकी पैटन टैंक थे और हमारे पास फ्रैंच एएमएक्स टैंक्स थे जो छोटे और लाइट टैंक थे।
ऐसे ही पाकिस्तान के पास एफ-86 फाइटर जेट्स थे, जो बहुत तेज थे और हमारे पास वेम्पायर जेट्स थे जो बहुत धीमे थे। जब हमले तेज हुए तो 3 सितंबर को एयर मार्शल अर्जन सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हवाई हमले की परमिशन मांगी। हवाई हमले का मतलब था युद्ध को बढ़ावा देना, लेकिन बिना हवाई हमले के पाकिस्तान को आगे बढ़ने से रोक पाना भी मुश्किल था। परमिशन मिलते ही अर्जन सिंह ने आर्मी चीफ जनरल जे एन चौधरी के साथ प्लान बनाया। इस बीच शास्त्री जी नहीं चाहते थे कि ये सब हो। वे शांति पसंद इंसान थे। लगातार पाकिस्तानी हमले के बाद भी वे यही चाह रहे थे कि हम ऐसा न करें।

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