2019 में मोदी v/s गांधी? राहुल बोले-अगले चुनाव में PM कैंडिडेट बनने को तैयार

कैलिफोर्निया. दो हफ्ते के यूएस दौरे पर आए राहुल गांधी (47) का मंगलवार को बर्कले यूनिवर्सिटी में प्रोग्राम था। इस दौरान उन्होंने नोटबंदी, देश में हो रही हत्याओं और फ्रीडम ऑफ स्पीच के मुद्दे पर बीजेपी और नरेंद्र मोदी को घेरा। हालांकि, एक बार मोदी को खुद से बेहतर कम्युनिकेटर बताया और स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ भी की। स्पीच के बाद राहुल से पूछा गया कि क्या वे 2019 के लोकसभा चुनाव में पीएम कैंडिडेट बनेंगे? इस पर राहुल ने कहा- ”हां। मैं ऐसा करने के लिए बिल्कुल तैयार हूं, बशर्ते मेरी पार्टी यह फैसला करे।” राहुल के इस संकेत के ये मायने हैं कि 2014 तक जहां मनमोहन सिंह कांग्रेस के पीएम कैंडिडेट थे, वहीं 2019 में अब राहुल बनाम मोदी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
राहुल से क्या हुआ था सवाल…
– राहुल से पूछा गया कि 2014 में भी सवाल उठे थे कि क्या आप पीएम कैंडिडेट बनेंगे। ये सवाल 2019 में भी उठेगा। क्या आप जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं?
– इस पर राहुल ने कहा, ”हां। मैं ऐसा करने के लिए बिल्कुल तैयार हूं। लेकिन हमारी पार्टी अलग तरीके से काम करती है। हमारे यहां संगठन के चुनाव होते हैं। यह प्रॉसेस चल रही है। हमारे यहां इंटरनल सिस्टम है। हम कुछ लोगों को बतौर डेलिगेट चुनते हैं जो बाद में पार्टी के फैसले करते हैं। मेरे लिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि ये (पीएम कैंडिडेट बनना) मेरा फैसला है। यह फैसला कांग्रेस पार्टी को करना है।”
– राहुल से दोबारा पूछा गया कि अगर फैसला हुआ तो क्या आप पीएम कैंडिडेट बनने की बात को लेकर ओपन हैं? इस पर राहुल ने कहा- हां। बिल्कुल।
सवाल पूछने से रोका तो महिला बोली- ये कैसा फ्री स्पीच?
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राहुल की स्पीच के बाद जब सवाल-जवाब का दौर शुरू हुआ तो ऑडियंस में बैठी एक महिला को सवाल पूछने से रोक दिया गया।
– इस पर महिला ने कहा, “जब सब कुछ कंट्रोल हो रहा है तो इसे फ्री स्पीच कैसे कहा जा सकता है?”
बीजेपी एक मशीन की तरह है
राहुल ने कहा, “बीजेपी एक मशीन की तरह है। करीब एक हजार लोग कंप्यूटर पर बैठे रहते हैं। वो आपको मेरे बारे में बताएंगे। ये (बीजेपी) एक खास तरह की मशीन है। वो पूरे दिन मेरे बारे में गलत प्रचार करती है। ये सब उस शख्स के इशारे पर हो रहा है जो देश चला रहा है।”
मैंने पिता-दादी को खोया, मैं हिंसा नहीं समझूंगा तो कौन समझेगा?
– राहुल ने कहा, “मैंने हिंसा के चलते अपने पिता को खोया, अपनी दादी को खोया। अगर ये सब मैं नहीं समझूंगा तो कौन समझेगा?”
– “मोदी ने राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) को खत्म कर दिया है। हमने जब ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने की बात की तो हमें परेशानियों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस अपनी पॉलिसीज और विजन को बातचीत से तय करती है, उसे वह थोपती नहीं।”
1984 के दंगों पर भी ऑडिएंस ने किए सवाल
– राहुल से सवाल पूछा गया कि 1984 के दंगा केस में आरोपी जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को पार्टी क्यों बचाती रही? इस पर राहुल ने कहा, “मैं दंगा पीड़ितों के साथ हूं। उनके हक के लिए लड़ता रहूंगा। किसी के भी खिलाफ हुई हिंसा की मैं कठोर निंदा करता हूं।”
– “नफरत, गुस्सा और हिंसा हमें खत्म कर सकती है। पॉलिटिक्स का पोलराइजेशन (ध्रुवीकरण) खतरनाक है। अहिंसा का विचार खत्म होता जा रहा है, जबकि इसके जरिए ही मानवता को आगे ले जाया जा सकता है।”
नोटबंदी के लिए किसी से कुछ नहीं पूछा गया
– राहुल ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी जैसे फैसले के लिए न तो चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर से सलाह ली और न ही संसद को कुछ बताया। इसके चलते देश का काफी नुकसान हुआ।
– “छोटे और मझोले व्यापारी भारत की आर्थिक तरक्की की रीढ़ हैं। भारत को छोड़कर इतिहास में ऐसा किसी देश में नहीं हुआ जहां लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया हो। इंदिरा गांधी से एक बार पूछा गया कि भारत को कहां ले जाना चाहिए- लेफ्ट या राइट, उन्होंने कहा- देश को सीधा और लंबा खड़ा होना चाहिए।”
राहुल ने बताया- 2012 के बाद कांग्रेस ने क्या गलती की?
– राहुल ने कहा, “2012 के आसपास कांग्रेस पार्टी में घमंड आ गया और हमने लोगों से बात करना बंद कर दिया।”
– “भारत में ज्यादातर वंशवाद चल रहा है। आप इसमें अखिलेश यादव, एमके स्टालिन, प्रेम कुमार धूमल के बेटे, अभिषेक बच्चन और मुकेश अंबानी का नाम ले सकते हैं। मैं चाहता हूं कि कांग्रेस में मेरे बाद ऐसा न हो।”
– “कांग्रेस के शासनकाल की शुरुआत में कश्मीर में आतंकवाद बढ़ रहा था, लेकिन जब हमारा टेन्योर खत्म हो रहा था तो वहां शांति कायम हो गई। अब फिर से कश्मीर आतंकवाद की चपेट में है। पीएम मोदी ने कश्मीर में आतंकियों को जगह दी है। वहां तेजी से हिंसा बढ़ी है।”
मोदी की तारीफ भी की
– राहुल ने कहा- मोदी में कुछ खास स्किल्स हैं, वो एक अच्छे कम्युनिकेटर है और इस मामले में मुझसे बेहतर हैं। उन्हें पता है कि लोगों तक किस तरह संदेश पहुंचाना है। लेकिन मोदी अपने साथ काम कर रहे लोगों, अपने सांसदों से बात नहीं करते। ये बात मुझे खुद बीजेपी के लोगों ने बताई है।