22 साल में पहली बार मुस्लिम मुद्दा नहीं, इनका 25 सीटों पर असर

अहमदाबाद.इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में धर्म से ज्यादा जातिगत राजनीति का कार्ड खेला जा रहा है। पिछले 22 साल में पहली बार राज्य में मुस्लिम वोटर्स किसी भी पार्टी के एजेंडे में शामिल दिखाई नहीं दे रहे, जबकि राज्य की 25 सीटों पर इनका काफी असर है। बीजेपी और कांग्रेस का ज्यादा फोकस पटेल, दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय के वोटर्स पर है।

2012 में दो मुस्लिम बने थे MLA

– गुजरात में करीब 9.6 फीसदी मुस्लिम आबादी है। राज्य की 182 सीटों में से 25 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। यानी इन सीटों पर मुस्लिम मतदाता हार-जीत में अहम किरदार निभाते हैं।

– पिछले 37 साल में राज्य में सबसे अधिक 12 मुस्लिम MLA 1980 में थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 2 मुस्लिम ही MLA बने।

– 1995 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य विधानसभा चुनावों में मुस्लिम चुनावी एजेंडे से बाहर नजर आ रहे हैं।

– बीजेपी ने इस बार एक भी सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा है, वहीं कांग्रेस ने महज 6 मुस्लिमों को टिकट दिया है।

मुस्लिम बहुल 25 में 17 सीटें बीजेपी के पास

– 2012 के चुनाव में बीजेपी ने 25 मुस्लिम बहुल सीटों में से 17 पर कब्जा किया था। 8 सीटें कांग्रेस को मिलीं थीं।

– माना जाता है कि गुजरात में करीब 20 फीसदी मुस्लिम बीजेपी को वोट देते हैं। 2007 चुनाव तक मुस्लिम कांग्रेस के परंपरागत वोटर माने जाते थे, लेकिन 2012 में बीजेपी ने इसमें सेंधमारी की थी।

– बता दें कि गुजरात में बीजेपी के 200 से अधिक नगर पार्षद मुस्लिम हैं। इनमें करीब 100 चेयरमैन हैं।

पाटीदार, दलित और ओबीसी पर फोकस
– कांग्रेस का फोकस जातियों पर है। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल कांग्रेस को समर्थन का एेलान कर चुके हैं। ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर, दलित नेता जिग्नेश पहले ही कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं।

– आदिवासी नेता छोटू वासावा भी कांग्रेस के साथ हैं। कांग्रेस मैनिफेस्टो में भी मुस्लिमों के लिए कोई खास एलान नहीं है।

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