24 साल में चौथी बार बढ़ी OBC क्रीमीलेयर लिमिट, 27% कोटे में भी कोटा

नई दिल्ली. ओबीसी कीमलेयर की लिमिट 4 साल में चौथी बार बढ़ाई गई है। इसके साथ ही सरकार ने तय किया है कि ओबीसी के लिए तय 27% कोटे को इस कैटेगरी में अलग-अलग सब कैटेगरी बनाकर बांटा जाएगा। बता दें कि ओबीसी आरक्षण को लेकर केंद सरकार ने बुधवार को दो अहम फैसले किए पहला, ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर की इनकम लिमिट 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपए सालाना कर दी। दूसरा, ओबीसी की सेंट्रल लिस्ट में जातियों के लिए कोटे के अंदर कोटा तय करने को मंजूरी दे दी। इस मुद्दे पर ओबीसी कमीशन बिल पर सिलेक्ट कमेटी के चेयरमैन भूपेंद्र यादव और ओबीसी वेलफेयर पर बनाई गई पार्लियामेंट्री कमेटी के चेयरमैन गणेश सिंह से बात की।
Q&A में जानें पूरा मामला…
Q. ओबीसी कोटे के अंदर कोटा देने की जरूरत क्यों पड़ी?
– सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। 11 राज्य सब-कैटेगरी बना भी चुके हैं। केंद्र की लिस्ट में पांच हजार से ज्यादा जातियां हैं। आरक्षण के बावजूद कई सोशल और एजुकेशन के लिहाज से पिछड़ी हैं। इन फैसलों से उन्हें फायदा मिलेगा।
Q. क्या इससे ओबीसी आरक्षण का मूल स्वरूप बदलेगा?
– नहीं। 27% आरक्षण रहेगा। यह जातियों की सब- कैटेगरी के बीच बांटा जाएगा। नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनसीबीसी) ने 2011 में तीन सब-कैटेगरी की सिफारिश की थी।
Q. राजस्थान-हरियाणा के जाट आंदोलन तो वजह नहीं?
– नहीं। यह नई जाति को आरक्षण देने के बजाय ओबीसी जातियों को बराबर आरक्षण देने की काेशिश है। सुप्रीम कोर्ट और एनसीबीसी के अलावा ओबीसी पर संसद की कमेटी भी 4 बार इसकी सिफारिश कर चुकी है। आयोग आरक्षण के लाभ के असमान वितरण की जांच कर इसे दूर करने के तौर-तरीके तय करेगा।
Q. क्रीमीलेयर की आय सीमा बढ़ाने का फाॅर्मूला क्या है?
– आय के स्टैंडर्ड्स तय हैं। खेती से होने वाली इनकम नहीं जोड़ी। परिवार में सैलरी और बिजनेस से होने वाली इनकम की लिमिट 6 से बढ़ाकर 8 लाख रुपए की है। इससे उन्हें फायदा होगा, जो इनकम लिमिट की वजह से आरक्षण का लाभ नहीं ले पा रहे थे।
Q. क्रीमीलेयर इनकम लिमिट से कितने लोगों को फायदा होगा?
– कोई तय आंकड़ा नहीं है। एनसीबीसी ने भी कहा था कि ओबीसी से जुड़े आंकड़े जुटाने चाहिए।
क्या 2 फैसले हुए?
1) 24 साल में चौथी बार बढ़ी क्रीमीलेयर लिमिट फैसला
– क्रीमीलेयर 24 साल में चौथी बार बढ़ी है। 1993 में 1 लाख थी। 2013 में तीसरी बार यूपीए ने 4.5 से बढ़ा 6 लाख की। ताजा फैसले से ज्यादा लोग आरक्षण के दायरे में आएंगे। एनसीबीसी ने नौकरियों में 16% से कम ओबीसी होने का हवाला देकर लिमिट 15 लाख करने को कहा था।
2) सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 25 साल बाद सब-कैटेगरी क्यों?
– आेबीसी में कुछ मजबूत वर्ग आरक्षण का ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। काफी वर्ग अब भी पिछड़े हैं। सभी को समान मौके देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में सब-कैटेगरी बनाने को कहा था। जातियों के कुछ समूहों में बंटने पर उनके बीच 27% आरक्षण का बंटवारा किया जाएगा।
क्या हो सकते हैं फैसले के मायने?
– फैसला 39 करोड़ से ज्यादा ओबीसी आबादी से जुड़ा है। 2014 में भाजपा को 34% ओबीसी वोट मिले थे। हिंदी पट्टी में यह वर्ग निर्णायक है। यूपी में 71 में से 26 सांसद ओबीसी के ही हैं। भाजपा ओबीसी की छोटी जातियों के सहारे गुजरात, हिमाचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी कामयाबी हासिल करना चाहती है।

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