25 साल पहले सीएम बनने से चूके थे नाथ, गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ किया काम

नई दिल्ली.  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह फैसला लिया गया। इससे पहले कमलनाथ और सिंधिया ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में सोनिया गांधी और प्रियंका भी मौजूद थीं। बैठक में कमलनाथ के नाम पर मुहर लगी। हालांकि, भोपाल में विधायक दल की बैठक के बाद इसका ऐलान किया गया।

कमलनाथ के बारे में तीन किस्से
मप्र के विधानसभा चुनाव से पहले इसी साल मई में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था। वे छिंदवाड़ा से नौ बार के सांसद हैं। कानपुर में जन्मे कमलनाथ कांग्रेस के उन मौजूदा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने गांधी परिवार की तीन पीढ़ी के साथ काम किया है।

1) इंदिरा गांधी ने उन्हें तीसरा बेटा बताया था
कमलनाथ संजय गांधी के स्कूली दोस्त बताए जाते हैं। वे 1980 में पहली बार छिंदवाड़ा से सांसद बने थे। इस चुनाव में प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी ने उन्हें अपना तीसरा बेटा बताया था।

2) संजय गांधी का ध्यान रखने जानबूझकर जेल गए थे
आपातकाल के बाद 1979 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान संजय गांधी को एक मामले में कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेज दिया। तब इंदिरा संजय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं। कहा जाता है कि तब कमलनाथ जानबूझकर एक जज से लड़े। जज ने उन्हें भी अवमानना के चलते सात दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया, जहां वे संजय गांधी के साथ रहे।

3) 25 साल पहले सीएम बनने से चूके 
72 साल के कमलनाथ मप्र की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से 9 बार से सांसद हैं। वे 1980, 1985, 1989, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009, 2014 में सांसद बने। 1993 में भी कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी। बताया जाता है कि तब अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह का नाम आगे कर दिया। इस तरह कमलनाथ 25 साल पहले सीएम बनने से चूक गए थे।

1997 में छिंदवाड़ा से हार गए थे कमलनाथ
1996 में कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप लगे थे। उस वक्त पार्टी ने उनकी पत्नी को टिकट दिया था। वे चुनाव जीत गईं। लेकिन अगले साल उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1997 में यहां उपचुनाव हुए थे, इसमें कमलनाथ हार गए। कमलनाथ को सुंदरलाल पटवा ने हराया था।

यूपीए सरकारों में कई बार केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं कमलनाथ
कमलनाथ 1991 में राज्य पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 1995-1996 टेक्सटाइल मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री रहे। उन्होंने 2001-2004 तक कांग्रेस के महासचिव का पद संभाला। वे 2004-2009 तक यूपीए सरकार में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहे। 2009 में कमलनाथ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री बने। 2011 में उन्हें शहरी विकास मंत्री बनाए गए। 2012 में उन्हें संसदीय कार्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।