27 अगस्त 1976 : जब एक्टर राज कपूर ने खो दी थी अपनी ‘आवाज’

मुंबई. बॉलीवुड के पॉपुलर सिंगर मुकेश चंद्र माथुर को गुजरे हुए 39 साल हो गए हैं। 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में जन्मे मुकेश को एक्टर राज कपूर की आवाज के रूप में जाना जाता था। यही वजह है कि 27 अगस्त 1976 को जब उनका निधन हुआ तो राज कपूर ने कहा था, “मैंने अपनी आवाज को खो दिया।” मुकेश ने अपने सिंगिंग करियर में ‘नैना हैं जादू भरे…’ (बेदर्द जमाना क्या जाने), ‘मुझको इस रात की तनहाई में…’ (दिल भी तेरा हम भी तेरे), ‘वक्त करता जो वफा…’ (दिल ने पुकारा), ‘दीवानों से ये मत पूछो…'(उपकार), ‘कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे…’ (पूरब और पश्चिम), ‘दर्पण को देखा…(उपासना), ‘जो तुमको हो पसंद…’ (सफर) और ‘जानें कहां गए वो दिन…’ (मेरा नाम जोकर) जैसे कई पॉपुलर सॉन्ग्स बॉलीवुड को दिए हैं। 1974 में फिल्म ‘रजनीगंधा’ के सॉन्ग ‘कई बार यूं ही देखा है’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड (मेल प्लेबैक सिंगर) से नवाजा गया था। इसके अलावा भी कई नॉमिनेशंस और अवॉर्ड्स इस सॉन्ग के लिए मुकेश को मिले थे। उन्हें चार बार [(सब कुछ सीखा हमने (अनाड़ी, 1959), सबसे बड़ा नादान (पहचान, 1970), ‘जय बोलो बेईमान की’ (बे-ईमान, 1972) और ‘कभी कभी मेरे दिल में’ (कभी कभी, 1976)] फिल्मफेयर का बेस्ट सिंगर अवॉर्ड भी मिला था।

ऐसे हुई थी सिंगिंग की शुरुआत

कायस्थ परिवार में जन्मे मुकेश के पिता जोरावर चंद्र माथुर इंजीनियर थे और मां चांद रानी गृहणी। कहा जाता है कि मुकेश ने 10वीं क्लास में पढ़ाई छोड़ दी थी और लोकनिर्माण विभाग में काम करने लगे। इसी दौरान उन्होंने व्वाइस रिकॉर्डिंग शुरू की और धीरे-धीरे सिंगिंग के फील्ड में आ गए। गुजरे जमाने के फेमस एक्टर मोतीलाल ने सबसे पहले मुकेश की आवाज को तब नोटिस किया, जब वे अपनी बहन की शादी में गा रहे थे। फिर क्या था, मोती मुकेश को मुंबई ले आए और पंडित जगन्नाथ प्रसाद से उन्हें संगीत की शिक्षा दिलवाई। 1941 में फिल्म ‘निर्दोष’ में उन्होंने बतौर एक्टर काम किया। इस दौरान एक सॉन्ग ‘दिल ही बुझा’ भी उन्होंने गाया था। हालांकि, बतौर सिंगर मुकेश को पहला ब्रेक मोतीलाल की फिल्म ‘पहली नजर’ (1945) में मिला। इस फिल्म का सॉन्ग ‘दिल जलता है तो जलने दे’ काफी पॉपुलर हुआ। इसके बाद कभी उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

फिल्मी स्टोरी सी मुकेश की लव लाइफ

मुकेश की लव लाइफ किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। कहा जाता है कि उनका अफेयर गुजराती मिलेनियर रायचंद त्रिवेदी की बेटी सरला त्रिवेदी से चल रहा था। उन दिनों फिल्मों में गाने के प्रोफेशन को अच्छा नहीं माना जाता था। इसलिए रायचंद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी मुकेश से शादी करे। उन्होंने इस कपल को तोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन एक्टर मोतीलाल ने मुकेश की मदद की और कांदिवली के एक मंदिर में सरला से उनकी शादी करवा दी। दिलचस्प बात यह है कि मुकेश की शादी उनके बर्थडे (22 जुलाई 1946) पर हुई थी। मुकेश और सरला के पांच बच्चे हुए। रीता, नितिन, नलिनी, मोहनीश और नम्रता (अमृता)। नितिन ने पिता की राह पकड़ी और सिंगिंग में ही अपना करियर बनाया। हालांकि, वे उतने सफल नहीं हो सके। मुकेश के पोते नील नितिन मुकेश बॉलीवुड में बतौर एक्टर काम कर रहे हैं।

हार्ट अटैक से हुआ था निधन

27 अगस्त 1976 को डेट्रॉइट, मिशिगन (US) में मुकेश का निधन हो गया था। वे वहां एक कॉन्सर्ट के सिलसिले में गए थे। 27 अगस्त को वे जल्दी उठे और नहाने चले गए। इसी दौरान उनके सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर्स ने हार्ट अटैक की पुष्टि करते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया। मुकेश द्वारा छोड़ा गया बाकी कॉन्सर्ट लता मंगेशकर ने पूरा किया था। वे ही उनकी बॉडी को भारत लाई थीं। मुकेश के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड की तकरीबन हर शख्शियत शामिल हुई थी। ‘धर्मवीर’ (1977), ‘अमर अकबर एंथॉनी’ (1977), ‘प्रेमिका’ (1980), ‘मैला आंचल’ (1981), ‘आरोही’ (1982), ‘लव एंड गॉड’ (1986) और ‘चंद्र ग्रहण’ (बंगाली, 1997) जैसी कई फिल्में मुकेश के निधन के बाद रिलीज हुईं, जिनमें उन्होंने आवाज दी थी।